क्या बिहार के शिवहर जिलाधिकारी ने भ्रष्टाचार के आरोप में राजस्व अधिकारी को निलंबित किया?

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क्या बिहार के शिवहर जिलाधिकारी ने भ्रष्टाचार के आरोप में राजस्व अधिकारी को निलंबित किया?

सारांश

शिवहर के जिलाधिकारी ने भ्रष्टाचार के खिलाफ एक सख्त कदम उठाते हुए राजस्व अधिकारी को निलंबित किया है। यह कार्रवाई विशेष सतर्कता इकाई की जांच के बाद की गई। इस कदम को स्थानीय जनता ने सराहा है।

मुख्य बातें

भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति का पालन किया जा रहा है।
सतर्कता विभाग की कार्रवाई से प्रशासन में सुधार की उम्मीद है।
पारदर्शिता और ईमानदारी शासन के मूल तत्व हैं।
सामान्य जनता का समर्थन प्रशासनिक सुधारों में महत्वपूर्ण है।
भ्रष्टाचार के मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी।

पटना, 21 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति अपनाते हुए, शिवहर जिलाधिकारी प्रतिभा रानी ने पुरन्हिया ब्लॉक में तैनात राजस्व अधिकारी रामकृष्ण महतो को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

यह कार्रवाई उस समय की गई जब विशेष सतर्कता इकाई ने कथित तौर पर रिश्वत लेते हुए राजस्व अधिकारी को गिरफ्तार किया।

एक अधिकारी के अनुसार, यह घटना 5 जनवरी को हुई, जब विशेष सतर्कता इकाई ने जाल बिछाया और आरोपी राजस्व अधिकारी को 10,000 रुपए रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा।

कथित तौर पर यह रिश्वत भूमि का म्यूटेशन (स्वामित्व परिवर्तन) कराने के एवज में मांगी गई थी।

पीड़ित की शिकायत के बाद सतर्कता विभाग ने आरोपों की जांच की। पुष्टि होने पर छापेमारी की गई और आरोपी को गिरफ्तार किया गया। इसके बाद कानून के प्रावधानों के तहत कानूनी कार्रवाई शुरू की गई।

जिलाधिकारी प्रतिभा रानी ने निलंबन आदेश जारी करते हुए स्पष्ट किया कि जिला प्रशासन में भ्रष्टाचार और कर्तव्य में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

उन्होंने कहा कि पारदर्शिता, ईमानदारी और जवाबदेही शासन के मूल तत्व हैं और किसी भी सरकारी कर्मचारी के भ्रष्टाचार में लिप्त पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

इस निलंबन से जिले के राजस्व विभाग और अन्य सरकारी कार्यालयों में हलचल मच गई है।

सामान्य जनता ने भी इस कदम का स्वागत किया है और इसे भ्रष्टाचार-मुक्त प्रशासन की दिशा में एक मजबूत संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

इसी तरह, पहले अररिया जिले के जिलाधिकारी ने एक राजस्व अधिकारी को निलंबित किया और सेवा से बर्खास्तगी की कार्रवाई शुरू की।

कथित राजस्व अधिकारी की पहचान मोहम्मद इम्तियाज आलम के रूप में हुई। उन्हें मंगलवार शाम 15,000 रुपए रिश्वत लेते हुए सतर्कता विभाग की टीम ने गिरफ्तार किया।

आलम ने पहले रामघाट वार्ड नं. 14, नरपतगंज ब्लॉक की एक किसान कमलेश्वरी यादव से भूमि अभिलेख सुधारने के लिए अवैध लाभ (रिश्वत) मांगा था।

यह कार्रवाई उपमुख्यमंत्री और राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा के निर्देश के बाद की गई।

सिन्हा ने कहा कि राजस्व और भूमि सुधार विभाग में किसी भी परिस्थिति में भ्रष्टाचार और रिश्वत बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने यह भी जोर दिया कि सभी सरकारी कर्मचारियों का कर्तव्य है कि सामान्य नागरिकों और किसानों का काम समय पर, पारदर्शी और कानूनी तरीके से किया जाए।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह घटना दर्शाती है कि सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग जारी है। जिलाधिकारी का यह कदम एक सकारात्मक संदेश है, लेकिन क्या यह सम्पूर्ण व्यवस्था में बदलाव लाएगा? यह एक गंभीर प्रश्न है।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या यह पहली बार है कि किसी अधिकारी को निलंबित किया गया है?
नहीं, इससे पहले भी कई अधिकारियों को भ्रष्टाचार के आरोप में निलंबित किया गया है।
भ्रष्टाचार के खिलाफ और कौन से कदम उठाए जा रहे हैं?
सरकार ने विभिन्न विभागों में सतर्कता इकाइयों को सक्रिय किया है और जनता से शिकायतें स्वीकार की जा रही हैं।
राष्ट्र प्रेस
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