पश्चिम बंगाल: CM सुवेंदु अधिकारी ने TMC कार्यकाल से जुड़े 5 पुलिस अधिकारी निलंबित किए, IPS अफसर भी शामिल
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने 25 जुलाई 2026 को विधानसभा में पाँच पुलिस अधिकारियों के निलंबन की घोषणा की — इनमें एक भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी भी शामिल है। इन अधिकारियों पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) की पिछली सरकार (2021–2026) के दौरान पक्षपातपूर्ण आचरण और पुलिस के दुरुपयोग के आरोप हैं।
निलंबन की घोषणा कहाँ और कैसे हुई
मुख्यमंत्री ने छह दिवसीय विस्तारित बजट सत्र के समापन दिवस पर पश्चिम बंगाल विधानसभा को संबोधित करते हुए पाँचों अधिकारियों के नाम सार्वजनिक किए। उन्होंने प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष भाषा में कहा कि पिछले कार्यकाल में विभिन्न स्थानों पर पुलिस का दुरुपयोग हुआ और सनातन धर्म का पालन करने वालों की भावनाएँ आहत की गईं। इसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर एक बयान जारी कर स्पष्ट किया कि उनके प्रशासन में शासन में भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
निलंबित अधिकारियों की सूची
निलंबित IPS अधिकारी कोटेश्वर राव दक्षिण 24 परगना के डायमंड हार्बर पुलिस जिले के पूर्व अधीक्षक थे। वे TMC महासचिव और डायमंड हार्बर लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी के करीबी माने जाते थे।
अन्य चार निलंबित अधिकारी हैं: उत्तर दिनाजपुर के कालियागंज पुलिस स्टेशन के पूर्व इंस्पेक्टर-इन-चार्ज मोअज्जम हुसैन; कोलकाता पुलिस के बरतला पुलिस स्टेशन के पूर्व ऑफिसर-इन-चार्ज सुबर्ण दत्ता चौधरी; उसी थाने के पूर्व सब-इंस्पेक्टर साधन पांडे; और नादिया जिले के कृष्णानगर पुलिस स्टेशन के पूर्व इंस्पेक्टर-इन-चार्ज अमलेंदु बिस्वास।
पहले भी हो चुकी है कार्रवाई — RG Kar मामला
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब CM अधिकारी ने पूर्व सरकार से जुड़े अधिकारियों पर कार्रवाई की हो। मई 2026 में कार्यभार संभालने के तुरंत बाद उन्होंने अगस्त 2024 में कोलकाता के सरकारी RG कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में एक महिला डॉक्टर के साथ दुष्कर्म और हत्या के मामले में कर्तव्य में लापरवाही के आरोपी तीन IPS अधिकारियों को निलंबित किया था।
उन तीन अधिकारियों में तत्कालीन कोलकाता पुलिस आयुक्त विनीत कुमार गोयल, तत्कालीन पुलिस उपायुक्त (उत्तरी प्रभाग) अभिषेक गुप्ता, और तत्कालीन पुलिस उपायुक्त (मध्य प्रभाग) इंदिरा मुखर्जी शामिल थे। उनके विरुद्ध विभागीय जाँच के आदेश भी दिए गए थे। इसी महीने की शुरुआत में उन तीनों के निलंबन की अवधि 120 दिनों के लिए और बढ़ा दी गई।
राजनीतिक संदर्भ और आगे की राह
यह कार्रवाई ऐसे समय में आई है जब नई भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार TMC के पाँच वर्षीय शासन की जाँच को अपनी प्राथमिकता बता रही है। आलोचकों का कहना है कि ये निलंबन राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा हो सकते हैं, जबकि सरकार का तर्क है कि यह जवाबदेही सुनिश्चित करने का कदम है। अब विभागीय जाँच की प्रक्रिया और उसके निष्कर्ष यह तय करेंगे कि इन अधिकारियों के विरुद्ध आगे क्या कार्रवाई होती है।