मध्य प्रदेश: मोहन कैबिनेट ने ₹42,490 करोड़ के विकास प्रस्तावों को दी मंजूरी, शिक्षा-सिंचाई पर बड़ा दांव
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में 15 सितंबर 2026 को भोपाल स्थित मंत्रालय में मंत्रि-परिषद की बैठक संपन्न हुई, जिसमें राज्य के सर्वांगीण विकास, अधोसंरचना सुदृढ़ीकरण और जनकल्याण के लिए ₹42,490 करोड़ से अधिक के प्रस्तावों को मंजूरी प्रदान की गई। यह निर्णय मध्य प्रदेश सरकार के इस वित्त वर्ष के सबसे बड़े एकल कैबिनेट व्यय अनुमोदनों में से एक है।
समग्र शिक्षा योजना को मिली पाँच साल की निरंतरता
मंत्रि-परिषद ने गुणवत्तापूर्ण स्कूली शिक्षा के विस्तार के लिए केंद्र प्रवर्तित 'समग्र शिक्षा योजना' को आगामी पाँच वर्षों तक जारी रखने के लिए ₹36,006 करोड़ से अधिक की स्वीकृति दी। यह पूरे पैकेज की सबसे बड़ी मद है और प्रदेश के लाखों स्कूली बच्चों को प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित करेगी। गौरतलब है कि यह योजना केंद्र और राज्य की साझा वित्त-पोषण व्यवस्था के तहत संचालित होती है।
परिवहन और उद्यानिकी विभाग की योजनाओं को मंजूरी
नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने के उद्देश्य से परिवहन विभाग की 11 योजनाओं के लिए ₹1,166 करोड़ की निरंतरता अनुमोदित की गई। इसी क्रम में किसानों की आमदनी बढ़ाने के लक्ष्य से उद्यानिकी विभाग की 8 योजनाओं के लिए ₹491 करोड़ की स्वीकृति प्रदान की गई। ये योजनाएँ ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में रोज़गार और आजीविका सुरक्षा की दृष्टि से अहम मानी जा रही हैं।
तीन सिंचाई परियोजनाओं से 1.27 लाख हेक्टेयर में बढ़ेगी सिंचाई क्षमता
जल संसाधन के क्षेत्र में उज्जैन की चितावद सिंचाई परियोजना, सिंगरौली की गौंड सिंचाई परियोजना तथा अशोकनगर की चंदेरी सिंचाई परियोजना के लिए ₹2,600 करोड़ से अधिक स्वीकृत किए गए। इन परियोजनाओं से 1 लाख 27 हजार हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि में सिंचाई क्षमता विकसित होने की संभावना है, जो बुंदेलखंड और विंध्य क्षेत्र के किसानों के लिए विशेष रूप से राहतकारी होगी।
नए जिलों में खनिज शाखाएँ, स्कूलों में नए पद
प्रशासनिक ढाँचे को सुदृढ़ करते हुए नवगठित जिलों मैहर, मऊगंज और पांदुर्णा में खनिज शाखाओं की स्थापना के लिए 21 नए पद सृजित किए गए। इसके अतिरिक्त अनूपपुर और शहडोल के उन्नत विद्यालयों के लिए 36 पदों के सृजन को भी मंजूरी मिली।
लाड़ली बहना और मार्कफेड के लिए अहम फैसले
कैबिनेट ने रक्षाबंधन पर लाड़ली बहना योजना की लाभार्थी महिलाओं को दी गई ₹250 की अतिरिक्त विशेष सहायता का अनुसमर्थन किया। साथ ही राज्य सहकारी विपणन संघ मार्कफेड को ₹2,220 करोड़ का ब्याज-मुक्त ऋण देने का निर्णय भी लिया गया, जो किसानों की उपज विपणन व्यवस्था को मज़बूती देने के इरादे से है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में किसानों की आर्थिक स्थिति को लेकर सरकार पर दबाव बना हुआ है।
इन निर्णयों के क्रियान्वयन की गति पर विशेषज्ञों और विपक्ष की नज़र रहेगी, क्योंकि बड़े अनुमोदन और ज़मीनी परिणाम के बीच का अंतर ही वास्तविक शासन की कसौटी होता है।