MP कैबिनेट ने ₹5,960 करोड़ मंजूर: कन्या विवाह योजना, स्कूल उन्नयन और किसान ऋण को बड़ा बढ़ावा
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में 23 जून 2026 को भोपाल स्थित मंत्रालय में संपन्न मंत्रि-परिषद की बैठक में राज्य के सर्वांगीण विकास, जनकल्याण और सांस्कृतिक गौरव को बल देने के उद्देश्य से ₹5,960 करोड़ की राशि को स्वीकृति दी गई। यह निर्णय शिक्षा, कृषि और सामाजिक सुरक्षा — तीनों मोर्चों पर एक साथ हस्तक्षेप का संकेत देता है।
कन्या विवाह और कल्याणी योजना को ₹1,740 करोड़
मंत्रि-परिषद ने मुख्यमंत्री कन्या विवाह सहायता योजना और कल्याणी विवाह सहायता योजना को 1 अप्रैल 2026 से अगले 5 वर्षों तक निरंतर संचालित रखने के लिए ₹1,740 करोड़ 57 लाख की स्वीकृति दी। 1 अप्रैल 2006 से प्रभावशील इस योजना के तहत गरीब, निराश्रित और निर्धन परिवारों की विवाह योग्य कन्याओं, विधवाओं और परित्यक्ताओं के सामूहिक विवाह में प्रति कन्या ₹55,000 की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है।
यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में महिला सशक्तिकरण की योजनाओं पर सार्वजनिक व्यय बढ़ाने की माँग लगातार उठती रही है। योजना का क्रियान्वयन सीधे राज्य सरकार द्वारा किया जाता है, जिससे लाभार्थियों तक पहुँच सुनिश्चित होती है।
शिक्षा क्षेत्र में ₹635 करोड़ से स्कूलों का उन्नयन
विद्यार्थियों की शैक्षणिक पहुँच और गुणवत्ता सुधारने के लिए मंत्रि-परिषद ने शासकीय माध्यमिक शालाओं को हाई स्कूल और हाई स्कूलों को हायर सेकेण्डरी स्तर पर उन्नत करने की योजना पर सैद्धांतिक स्वीकृति दी। वर्ष 2026-27 में 75 माध्यमिक शालाओं को हाई स्कूल तथा 100 हाई स्कूलों को हायर सेकेण्डरी स्कूल में उन्नत किया जाएगा।
यही प्रक्रिया 2027-28 और 2028-29 में भी प्रतिवर्ष दोहराई जाएगी। इस पूरे उन्नयन कार्यक्रम पर अनुमानित व्यय ₹635 करोड़ 24 लाख निर्धारित किया गया है। गौरतलब है कि विकसित मध्य प्रदेश 2047 के अंतर्गत 2029 तक 100 प्रतिशत सकल नामांकन दर प्राप्त करने का लक्ष्य रखा गया है, और यह उन्नयन उसी दिशा में एक ठोस कदम है।
किसानों को शून्य ब्याज पर फसल ऋण
मंत्रि-परिषद ने वर्ष 2026-27 के लिए शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर किसानों को अल्पावधि फसल ऋण देने की योजना की शर्तों को स्वीकृति दी। इस बार खरीफ और रबी सीजन के लिए अलग-अलग देय तिथि (ड्यू डेट) समाप्त कर वार्षिक एकल ऋण सीमा लागू की जाएगी, जिसमें नगद और वस्तु ऋण की उप-सीमाएँ निर्धारित रहेंगी।
योजना के तहत किसानों को प्रथम ऋण आहरण की तिथि से 12 माह की देय अवधि मिलेगी। अल्पावधि फसल ऋण लेने वाले किसानों को 1.25 प्रतिशत सामान्य ब्याज अनुदान और निर्धारित ड्यू डेट तक ऋण चुकाने वाले किसानों को 4 प्रतिशत अतिरिक्त प्रोत्साहन ब्याज अनुदान राज्य सरकार द्वारा दिया जाएगा। यह व्यवस्था किसानों की नकदी प्रवाह समस्याओं को कम करने की दिशा में एक सकारात्मक बदलाव मानी जा रही है।
आगे की राह
मोहन यादव सरकार के इन निर्णयों का क्रियान्वयन अप्रैल 2026 से शुरू होना है और अधिकांश योजनाएँ अगले पाँच वर्षों में चरणबद्ध तरीके से लागू की जाएंगी। स्कूल उन्नयन की प्रक्रिया 2028-29 तक जारी रहेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि योजनाओं की सफलता उनके ज़मीनी क्रियान्वयन और लाभार्थियों तक पारदर्शी पहुँच पर निर्भर करेगी।