मध्य प्रदेश में चीता पुनर्वास: रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व में छोड़े गए 'व्योम' और 'नीरा', अब तीसरा ठिकाना
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व, सागर में 7 अक्टूबर 2026 को दो चीतों — नर 'व्योम' और मादा 'नीरा' — को जंगल में छोड़ा गया, जिससे राज्य का चीता पुनर्वास कार्यक्रम अपने तीसरे आवास तक पहुँच गया। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस अवसर पर स्वयं उपस्थित रहकर दोनों चीतों को रिजर्व में छोड़ा। यह कदम भारत के चीता संरक्षण अभियान में एक महत्त्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।
तीसरे ठिकाने की विशेषता
रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व — जिसे पहले नौरादेही वन्यजीव अभयारण्य के नाम से जाना जाता था — मध्य प्रदेश में चीतों के लिए तीसरा स्थान है। इससे पहले कूनो नेशनल पार्क और गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य में चीते रखे गए थे। इस रिजर्व की एक विशेष बात यह है कि जिस इलाके में चीते छोड़े गए हैं, वहाँ पहले से बाघ भी मौजूद हैं — यह स्थिति राज्य के कुछ अन्य चीता आवासों से अलग है। मुख्यमंत्री यादव ने बताया कि इस क्षेत्र में लगभग 170 वर्ष पहले चीते देखे गए थे, जो इसे ऐतिहासिक रूप से उपयुक्त पुनर्वास स्थल बनाता है।
चीतों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि
मुख्यमंत्री यादव ने बताया कि जब 2022 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में मध्य प्रदेश में चीता प्रोजेक्ट शुरू किया गया था, तब केवल 8 चीते भारत लाए गए थे। उन्होंने कहा, "शुरुआती आठ चीतों से अब इनकी संख्या बढ़कर 60 हो गई है। यह हमारे मजबूत वन्यजीव प्रबंधन और विकसित होते इकोसिस्टम का सबूत है।" यादव ने यह भी घोषणा की कि अगले महीने इस रिजर्व में दो और चीते लाए जाएंगे।
स्थानीय समुदायों को आर्थिक लाभ
मुख्यमंत्री ने वन्यजीव पर्यटन से होने वाली आमदनी में स्थानीय समुदायों की भागीदारी पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि इस वर्ष राज्य के अभयारण्यों से लगभग ₹80 करोड़ की कमाई हुई, जिसमें से ₹20 करोड़ संरक्षित क्षेत्रों के आसपास रहने वाले ग्रामीणों में बाँटे गए। यादव ने कहा, "यह उनका अधिकार है, क्योंकि वे वर्षों से इन अभयारण्यों के आसपास के गांवों और घरों में रह रहे हैं।" सरकार टाइगर रिजर्व के बफर जोन में होमस्टे को बढ़ावा दे रही है और स्थानीय लोगों को इसके लिए ₹2 3 लाख की ग्रांट भी दी जा रही है।
पर्यटन और रोज़गार की संभावनाएँ
मुख्यमंत्री ने कहा कि चीता प्रोजेक्ट न केवल वन्यजीव संरक्षण को सुदृढ़ करेगा, बल्कि पर्यटन और रोज़गार के नए अवसर भी पैदा करेगा। उन्होंने बताया कि जिन वन क्षेत्रों में कृषि भूमि सीमित है, वहाँ पशुपालन को प्रोत्साहन देकर ग्रामीण आजीविका को भी मज़बूती दी जा सकती है। गौरतलब है कि इस रिजर्व में बाघों के साथ साथ चीतों के लिए भी उपयुक्त वातावरण तैयार किया गया है, जो इसे एक दुर्लभ बहु प्रजाति संरक्षण परियोजना का रूप देता है।
अन्य घोषणाएँ और कार्यक्रम
मुख्यमंत्री यादव रिजर्व में आयोजित वन्यजीव संरक्षण सप्ताह के समापन समारोह में बोल रहे थे। उन्होंने 'गिद्ध आबादी आकलन 2026' रिपोर्ट जारी की और बुंदेली भाषा में रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व पर एक पुस्तक का अनावरण भी किया। यह कार्यक्रम मध्य प्रदेश को वन्यजीव संरक्षण के मानचित्र पर और अधिक प्रमुखता से स्थापित करने की दिशा में एक ठोस कदम है।