गांधी सागर अभयारण्य में सीएम मोहन यादव ने छोड़ी मादा चीता सीसीबी-2, मध्य प्रदेश में चीतों की संख्या 56 पहुँची
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 20 सितंबर 2026 को नीमच जिले के गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य में बोत्सवाना से लाई गई मादा चीता सीसीबी-2 को आधिकारिक तौर पर छोड़ा। इस कदम के साथ अभयारण्य में चीतों की कुल संख्या बढ़कर चार हो गई है — जिनमें दो नर और दो मादा चीते शामिल हैं।
गांधी सागर में चीतों का बढ़ता कुनबा
सीसीबी-2 के अभयारण्य में प्रवेश के साथ ही यहाँ चीतों के प्रजनन की संभावनाएँ और प्रबल हो गई हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि इससे दो दिन पूर्व ही चार नए चीते गांधी सागर पहुँचे थे। राज्य में शावकों सहित चीतों की कुल संख्या अब 56 है।
गौरतलब है कि पिछले वर्ष गांधी सागर में छोड़े गए नर चीते 'पावक' और 'प्रभास' स्वस्थ हैं। मुख्यमंत्री यादव ने इस पर संतोष जताते हुए कहा कि यह संरक्षण टीम के सतत प्रयासों का परिणाम है।
मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया और प्रोजेक्ट चीता का महत्त्व
चीता छोड़ने के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए सीएम मोहन यादव ने कहा कि यह कदम वन्यजीवों के प्रति मध्य प्रदेश की 'जियो और जीने दो' की भावना को दर्शाता है। उन्होंने प्रोजेक्ट चीता को न केवल मध्य प्रदेश, बल्कि पूरे एशिया के लिए एक ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण पहल बताया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार चीता संरक्षण के लिए लगातार प्रभावी प्रयास कर रही है। उन्होंने वन विभाग और प्रदेश की जनता को बधाई देते हुए कहा कि राज्य के पर्यावरण तंत्र को और मजबूत करने की जरूरत बनी हुई है।
करीब 100 साल बाद फिर लौटा चीता
यह ऐसे समय में आया है जब भारत में चीतों की वापसी को लेकर वैश्विक स्तर पर उत्सुकता बनी हुई है। मुख्यमंत्री ने स्मरण दिलाया कि एक समय एशिया में चीते विलुप्त हो गए थे और मध्य प्रदेश से भी गायब हो गए थे। इस परियोजना का उद्देश्य करीब 100 साल के अंतराल के बाद चीतों के जीवन चक्र को फिर से स्थापित करना है।
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि असम से जंगली भैंसे भी गांधी सागर क्षेत्र में लाए गए हैं, जो वन्यजीवों को फिर से बसाने की व्यापक सरकारी प्रतिबद्धता का हिस्सा है।
आम जनता और स्थानीय समुदाय पर असर
मुख्यमंत्री ने इस पहल के सामाजिक और आर्थिक प्रभावों का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, चीता संरक्षण परियोजना से रोजगार के अवसर बढ़े हैं और स्थानीय लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है। शुरुआत में ग्रामीणों के मन में कुछ आशंकाएँ थीं, किंतु समय के साथ स्थिति बेहतर हुई है।
मोहन यादव ने जोर दिया कि वन्यजीव संरक्षण तभी सफल हो सकता है, जब सभी संबंधित पक्षों का सकारात्मक सहयोग मिले। उन्होंने वन विभाग के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को उनकी उल्लेखनीय सेवाओं के लिए बधाई दी।
आगे की राह
गांधी सागर अभयारण्य में अब दो नर और दो मादा चीतों की मौजूदगी प्राकृतिक प्रजनन की राह खोलती है, जो परियोजना की दीर्घकालिक सफलता के लिए निर्णायक होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि चीतों का प्रजनन सफलतापूर्वक हुआ तो यह भारत में चीता पुनर्वास की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि साबित होगी।