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सोनम मस्कर ने एशियन गेम्स 2026 में जीता सिल्वर, कोल्हापुर परिवार के संघर्ष और जमीन बेचने की कहानी

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सोनम मस्कर ने एशियन गेम्स 2026 में जीता सिल्वर, कोल्हापुर परिवार के संघर्ष और जमीन बेचने की कहानी

सारांश

जमीन बिकी, टैंकर गए, लेकिन सपना नहीं टूटा — कोल्हापुर के मस्कर परिवार की इस जिद्द ने सोनम को एशियन गेम्स 2026 में 10 मीटर एयर राइफल टीम का सिल्वर मेडल दिलाया। अब निशाना 2028 ओलंपिक के स्वर्ण पर है।

मुख्य बातें

सोनम मस्कर ने एशियन गेम्स 2026 में महिला 10 मीटर एयर राइफल टीम स्पर्धा में रजत पदक जीता।
भारतीय टीम ने कुल 1898.0 अंक हासिल किए; सोनम ने 634.1 अंक के साथ क्वालिफिकेशन राउंड में तीसरा स्थान पाया।
टीम में एलावेनिल वलारिवन (633.5 अंक) और विदर्सा कोचालुमकाल विनोद (630.4 अंक) भी शामिल थीं।
लॉकडाउन में पिता उत्तम मस्कर का व्यवसाय ठप्प हुआ; परिवार ने साढ़े 10 गुंठे जमीन और दुकान बेचकर सोनम की ट्रेनिंग जारी रखी।
कोल्हापुर की वेद एकेडमी में प्रशिक्षण के बाद एनसीओई में चयन और फिर राष्ट्रीय टीम तक का सफर।
सोनम का अगला लक्ष्य 2028 लॉस एंजेलिस ओलंपिक में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतना।

निशानेबाज सोनम मस्कर ने 20 सितंबर 2026 को एशियन गेम्स 2026 में महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल टीम स्पर्धा में भारत के लिए रजत पदक जीता। कोल्हापुर, महाराष्ट्र की इस युवा शूटर ने 634.1 अंक हासिल कर क्वालिफिकेशन राउंड में तीसरा स्थान प्राप्त किया और भारतीय टीम की इस ऐतिहासिक जीत में अहम भूमिका निभाई। यह पदक उस परिवार के अदम्य साहस और बलिदान का प्रतीक है जिसने लॉकडाउन के दौरान अपनी जमीन और दुकान तक बेच दी, लेकिन बेटी का सपना नहीं टूटने दिया।

स्पर्धा में भारतीय टीम का प्रदर्शन

भारतीय महिला 10 मीटर एयर राइफल टीम ने इस स्पर्धा में कुल 1898.0 अंक अर्जित कर रजत पदक अपने नाम किया। टीम में शामिल सोनम मस्कर ने 634.1 अंक के साथ क्वालिफिकेशन राउंड में तीसरा स्थान हासिल किया। एलावेनिल वलारिवन ने 633.5 अंक अर्जित कर सातवाँ स्थान प्राप्त किया, जबकि विदर्सा कोचालुमकाल विनोद ने 630.4 अंक हासिल किए। यह पदक एशियन गेम्स 2026 में भारत के शुरुआती उल्लेखनीय पदकों में से एक है।

लॉकडाउन ने बदली परिवार की जिंदगी

मस्कर परिवार कई वर्ष पहले व्यवसाय के लिए मुंबई में बस गया था और बच्चों की पढ़ाई सुचारु रूप से चल रही थी। कोरोना महामारी के कारण अचानक पढ़ाई बीच में छोड़ परिवार को कोल्हापुर के अपने गाँव लौटना पड़ा। गाँव वापसी के बाद आजीविका के लिए इस्तेमाल होने वाले एक टैंकर को बेचना पड़ा। अगले दो तीन वर्षों में मुश्किलें और गहरी होती गईं और एक और टैंकर भी बेचना पड़ा।

बच्चों की शिक्षा और सोनम के शूटिंग उपकरणों में कोई कटौती न हो, इसके लिए परिवार ने घर की साढ़े 10 गुंठे जमीन और गडहिंग्लज स्थित दुकान तक बेच दी। माता पिता ने वर्षों तक आर्थिक संकट झेला, लेकिन बच्चों के सपनों को कभी कमज़ोर नहीं पड़ने दिया।

पिता उत्तम मस्कर की जुबानी

पिता उत्तम मस्कर ने बताया कि सोनम ने 11वीं कक्षा में राइफल शूटिंग चुनी। यह खेल खर्चीला था, लेकिन शुरुआती दो महीनों में ही सोनम ने राज्य स्तर की प्रतिस्पर्धा में हिस्सा लिया और उनकी रुचि प्रगाढ़ होती गई। उत्तम मस्कर ने कहा, "मैंने साफ़तौर पर कह दिया था कि 12वीं की परीक्षा के बाद ही यह खेल जारी रख सकती हैं। लॉकडाउन में मेरा बिजनेस ठप्प हो गया, जिसके बाद गाँव आना पड़ा। लॉकडाउन के बाद कोल्हापुर की वेद एकेडमी में राधिका मैडम और रोहित सर के मार्गदर्शन में सोनम का बेस मजबूत हुआ, जिसके बाद एनसीओई में चयन हुआ और अब वह दिल्ली में है।"

माँ, बहन और भाई की भावनाएँ

माँ सुमन ने बताया, "बेटी की उपलब्धि पर बहुत गर्व है। वह परिवार से दूर रहती हैं, जिससे कभी कभी भावुक हो जाती हैं, लेकिन देश के लिए यह करना ज़रूरी है। प्रैक्टिस के दौरान वह 5 6 घंटे खड़ी रहती हैं और भारी राइफल व ड्रेस के साथ कड़ी मेहनत करती हैं।" बहन मानसी ने कहा कि भारी राइफल उठाने के कारण सोनम को कभी कभी कंधे में दर्द होता है, लेकिन उन्हें पूरा भरोसा है कि सोनम ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतेंगी। भाई ने बताया कि व्यस्त कार्यक्रम के कारण दिन में केवल 5 10 मिनट ही बात हो पाती है और बातचीत हमेशा ओलंपिक में गोल्ड जीतने के लक्ष्य पर केंद्रित रहती है।

अगला लक्ष्य: 2028 ओलंपिक में स्वर्ण

एशियन गेम्स में यह ऐतिहासिक सफलता हासिल करने के बाद सोनम ने अपना अगला लक्ष्य स्पष्ट कर दिया है। उन्होंने कहा, "2028 के लॉस एंजेलिस ओलंपिक में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतना मेरा मुख्य लक्ष्य है और इसके लिए मैं अभी से कड़ी तैयारी कर रही हूँ।" गौरतलब है कि यह सफलता न केवल मस्कर परिवार के वर्षों के संघर्ष को सार्थक करती है, बल्कि कोल्हापुर और महाराष्ट्र के लिए भी गौरव का क्षण बन गई है। आने वाले वर्षों में सोनम की निगाहें ओलंपिक के उस शीर्ष पायदान पर टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जमीनी स्तर पर शूटिंग जैसे महंगे खेलों में सरकारी सहयोग देर से पहुँचता है — जब परिवार बहुत कुछ गँवा चुका होता है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत एशियन गेम्स में पदक तालिका में ऊँचा स्थान पाने की कोशिश कर रहा है; असली चुनौती यह है कि अगली सोनम को अपना घर बेचने की नौबत न आए।
RashtraPress
20 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सोनम मस्कर ने एशियन गेम्स 2026 में कौन सा पदक जीता?
सोनम मस्कर ने एशियन गेम्स 2026 में महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल टीम स्पर्धा में भारत के लिए रजत पदक जीता। उन्होंने 634.1 अंक हासिल कर क्वालिफिकेशन राउंड में तीसरा स्थान प्राप्त किया।
सोनम मस्कर के परिवार ने किन मुश्किलों का सामना किया?
कोरोना लॉकडाउन के दौरान पिता उत्तम मस्कर का व्यवसाय ठप्प हो गया और परिवार को मुंबई छोड़ कोल्हापुर लौटना पड़ा। आजीविका के लिए दो टैंकर बेचने के बाद सोनम की ट्रेनिंग जारी रखने हेतु साढ़े 10 गुंठे जमीन और गडहिंग्लज की दुकान भी बेचनी पड़ी।
सोनम मस्कर को किसने प्रशिक्षित किया?
लॉकडाउन के बाद सोनम ने कोल्हापुर की वेद एकेडमी में राधिका मैडम और रोहित सर के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण लिया। इसके बाद उनका एनसीओई (नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस) में चयन हुआ और वे दिल्ली में ट्रेनिंग कर रही हैं।
एशियन गेम्स 2026 की 10 मीटर एयर राइफल टीम स्पर्धा में भारत ने कितने अंक बनाए?
भारतीय टीम ने कुल 1898.0 अंक हासिल कर रजत पदक जीता। टीम में सोनम मस्कर (634.1 अंक), एलावेनिल वलारिवन (633.5 अंक) और विदर्सा कोचालुमकाल विनोद (630.4 अंक) शामिल थीं।
सोनम मस्कर का अगला लक्ष्य क्या है?
सोनम मस्कर का अगला लक्ष्य 2028 के लॉस एंजेलिस ओलंपिक में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतना है। उन्होंने कहा कि इसके लिए वे अभी से कड़ी तैयारी शुरू कर चुकी हैं।
राष्ट्र प्रेस
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