प्रोजेक्ट चीता: भारत में चीतों की संख्या 53 हुई, 33 भारतीय मूल के — भूपेंद्र यादव

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प्रोजेक्ट चीता: भारत में चीतों की संख्या 53 हुई, 33 भारतीय मूल के — भूपेंद्र यादव

सारांश

भारत में चीतों की संख्या अब 53 हो गई है — और 33 भारतीय मूल के हैं। प्रोजेक्ट चीता की समीक्षा बैठक में पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने वैश्विक मानकों से बेहतर सर्वाइवल रेट और गुजरात के बन्नी घास के मैदानों तक विस्तार की योजना का ऐलान किया।

मुख्य बातें

भारत में वर्तमान में 53 चीते हैं, जिनमें से 33 भारतीय मूल के हैं।
प्रवेशित चीतों और शावकों की सर्वाइवल रेट वैश्विक मानकों के अनुरूप या उनसे बेहतर पाई गई।
कुनो राष्ट्रीय उद्यान प्राथमिक आवास स्थल है; गांधीसागर वन्यजीव अभयारण्य अतिरिक्त आवास के रूप में तैयार।
गुजरात के बन्नी घास के मैदानों में परियोजना विस्तार की तैयारी जारी।
समीक्षा बैठक 2026 के अंतर्राष्ट्रीय बिग कैट एलायंस शिखर सम्मेलन से कुछ सप्ताह पहले आयोजित।

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने 19 मई 2026 को घोषणा की कि भारत में वर्तमान में 53 चीते हैं, जिनमें से 33 भारतीय मूल के हैं। यह जानकारी उन्होंने प्रोजेक्ट चीता की उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए दी, जो 2026 के अंतर्राष्ट्रीय बिग कैट एलायंस शिखर सम्मेलन से कुछ सप्ताह पहले आयोजित की गई।

सर्वाइवल रेट वैश्विक मानकों के अनुरूप

मंत्री यादव ने बताया कि प्रवेशित चीतों और उनके शावकों की सर्वाइवल रेट वैश्विक मानकों के अनुरूप पाई गई है, और कुछ मामलों में तो उनसे बेहतर भी है। उनके अनुसार, यह वैज्ञानिक प्रबंधन और निगरानी प्रोटोकॉल की प्रभावशीलता को दर्शाता है।

कुनो और गांधीसागर: प्रमुख आवास स्थल

कुनो राष्ट्रीय उद्यान को चीता आबादी की स्थापना के लिए प्राथमिक स्थल के रूप में विकसित किया गया है। वहीं, गांधीसागर वन्यजीव अभयारण्य को आगे विस्तार के लिए एक अतिरिक्त आवास के रूप में तैयार किया जा रहा है। ये दोनों स्थल मध्य भारत में फैले एक विशाल, परस्पर जुड़े भूभाग का हिस्सा हैं, जो चीतों के फैलाव और आनुवंशिक आदान-प्रदान को सुगम बनाते हैं।

गुजरात के बन्नी घास के मैदानों तक विस्तार

मंत्री ने बताया कि गुजरात के बन्नी घास के मैदानों सहित नए क्षेत्रों में परियोजना का विस्तार करने की तैयारी जारी है। इन क्षेत्रों में आवास की तैयारी और शिकार संवर्धन के उपाय संतोषजनक स्तर पर पहुँच गए हैं, जो चीतों के सफल पुनर्वास के लिए आवश्यक हैं।

समीक्षा बैठक में कौन-कौन शामिल

इस उच्च-स्तरीय बैठक में वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, परियोजना विशेषज्ञ और देशभर में वन्यजीव संरक्षण से जुड़े वरिष्ठ फील्ड अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक का उद्देश्य परियोजना की प्रगति का आकलन और भविष्य की कार्ययोजना पर विचार-विमर्श करना था।

गौरतलब है कि भारत में चीतों को 1952 में विलुप्त घोषित कर दिया गया था। सितंबर 2022 में नामीबिया से पहले चीते लाए गए थे, और बाद में दक्षिण अफ्रीका से भी चीते भारत पहुँचे। यह परियोजना दुनिया का पहला अंतर-महाद्वीपीय चीता स्थानांतरण प्रयोग है। आने वाले महीनों में गांधीसागर और बन्नी क्षेत्रों में विस्तार की प्रगति इस परियोजना की दीर्घकालिक सफलता की कसौटी होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन परियोजना की असली परीक्षा अभी बाकी है। कुनो में सीमित भूमि क्षमता और चीतों के बीच आपसी संघर्ष की पहले सामने आई घटनाएँ यह सवाल उठाती हैं कि क्या मौजूदा आवास स्थल बढ़ती आबादी को दीर्घकाल तक संभाल सकते हैं। गांधीसागर और बन्नी तक विस्तार की 'तैयारी' और वास्तविक स्थानांतरण के बीच की खाई को पाटना ही इस परियोजना की विश्वसनीयता तय करेगा। अंतर्राष्ट्रीय बिग कैट एलायंस शिखर सम्मेलन से ठीक पहले आई यह घोषणा कूटनीतिक संदेश भी देती है — लेकिन ज़मीनी विस्तार की गति पर नज़र रखना ज़रूरी है।
RashtraPress
19 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत में अभी कितने चीते हैं और वे कहाँ हैं?
19 मई 2026 तक भारत में कुल 53 चीते हैं, जिनमें से 33 भारतीय मूल के हैं। इनमें से अधिकांश मध्य प्रदेश के कुनो राष्ट्रीय उद्यान में हैं, जो इस परियोजना का प्राथमिक आवास स्थल है।
प्रोजेक्ट चीता में सर्वाइवल रेट कैसी है?
पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव के अनुसार, प्रवेशित चीतों और उनके शावकों की सर्वाइवल रेट वैश्विक मानकों के अनुरूप या कुछ मामलों में उनसे बेहतर पाई गई है। यह वैज्ञानिक प्रबंधन और निगरानी प्रोटोकॉल की सफलता को दर्शाता है।
गांधीसागर वन्यजीव अभयारण्य में चीते कब आएंगे?
गांधीसागर वन्यजीव अभयारण्य को अतिरिक्त आवास के रूप में तैयार किया जा रहा है, लेकिन स्थानांतरण की कोई निश्चित तारीख अभी घोषित नहीं की गई है। आवास की तैयारी और शिकार संवर्धन के उपाय जारी हैं।
बन्नी घास के मैदानों में चीता परियोजना का विस्तार क्यों हो रहा है?
गुजरात के बन्नी घास के मैदानों में आवास की तैयारी और शिकार संवर्धन के उपाय संतोषजनक स्तर पर पहुँच गए हैं। यह विस्तार चीतों की बढ़ती आबादी के लिए अतिरिक्त भूमि और आनुवंशिक विविधता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से किया जा रहा है।
भारत में चीते कब विलुप्त हुए थे और उन्हें कब वापस लाया गया?
भारत में चीतों को 1952 में विलुप्त घोषित किया गया था। सितंबर 2022 में नामीबिया से पहले चीते कुनो राष्ट्रीय उद्यान में लाए गए, इसके बाद दक्षिण अफ्रीका से भी चीते भारत पहुँचे। यह दुनिया का पहला अंतर-महाद्वीपीय चीता पुनर्वास प्रयोग है।
राष्ट्र प्रेस
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