रमेश पोवार: 'फ्लाइटेड' गेंदबाजी के उस्ताद, 148 फर्स्ट क्लास मैचों में 470 विकेट का सफर
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय क्रिकेट के पूर्व ऑफ स्पिनर रमेश राजाराम पोवार ने अपनी विशिष्ट 'फ्लाइटेड' गेंदबाजी से अंतरराष्ट्रीय और घरेलू क्रिकेट दोनों में बल्लेबाजों को लंबे समय तक परेशान किया। 148 फर्स्ट क्लास मुकाबलों में 470 विकेट और भारतीय महिला क्रिकेट टीम के हेड कोच का दायित्व — पोवार की यात्रा संघर्ष, आलोचना और जीत की कहानी है।
शुरुआती जीवन और घरेलू करियर की नींव
20 मई 1978 को महाराष्ट्र में जन्मे रमेश पोवार ने 1999 में फर्स्ट क्लास क्रिकेट में कदम रखा। मुंबई की ओर से खेलते हुए उन्होंने जल्द ही अपनी पहचान बनाई। 2002-03 के रणजी सीजन में उन्होंने मुंबई को रणजी ट्रॉफी दिलाने में अहम भूमिका निभाई।
उस सीजन की एक उल्लेखनीय बात यह रही कि पोवार ने कभी भी नंबर-7 से ऊपर बल्लेबाजी नहीं की, फिर भी टूर्नामेंट में मुंबई के लिए सर्वाधिक रन बनाने के मामले में वे दूसरे स्थान पर रहे और 418 रन बनाए — यह उनकी बहुआयामी प्रतिभा का प्रमाण था।
अंतरराष्ट्रीय करियर: उतार-चढ़ाव का सफर
घरेलू क्रिकेट में लगातार प्रभावशाली प्रदर्शन के बाद मार्च 2004 में पोवार को पाकिस्तान दौरे के लिए भारतीय वनडे टीम में शामिल किया गया। हालाँकि उस सीरीज में वे कोई विकेट हासिल नहीं कर सके और उन्हें टीम से बाहर कर दिया गया।
इसके बाद 2005-06 के घरेलू सीजन में पोवार ने 63 विकेट लेकर चयनकर्ताओं को फिर से अपनी ओर देखने पर मजबूर किया। इस दौरान उनके वजन को लेकर आलोचनाएँ भी हुईं, लेकिन उन्होंने अपने प्रदर्शन से उन आलोचनाओं का जवाब दिया।
2006 में पोवार ने भारतीय टीम में वापसी की और पाकिस्तान तथा इंग्लैंड के विरुद्ध प्रभावशाली प्रदर्शन किया। मई 2006 में उन्हें वेस्टइंडीज के खिलाफ भी अवसर मिला।
टेस्ट डेब्यू और वनडे आँकड़े
2007 में पोवार को बांग्लादेश के विरुद्ध टेस्ट डेब्यू का मौका मिला, जिसमें उन्होंने 6 विकेट हासिल किए। बावजूद इसके, उन्हें दोबारा टेस्ट टीम में स्थान नहीं मिला — यह भारतीय चयन प्रक्रिया की एक विडंबना रही।
वनडे करियर में पोवार ने कुल 31 मुकाबले खेले और 35.02 की औसत से 34 विकेट अपने नाम किए। उनका अंतिम वनडे मैच भी 2007 में ही आया।
आईपीएल और कोचिंग करियर
इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में पोवार ने 27 मैच खेले और 13 विकेट हासिल किए। वे किंग्स इलेवन पंजाब और कोच्चि टस्कर्स केरल की ओर से मैदान में उतरे।
खेल से संन्यास के बाद पोवार ने कोचिंग में अपना नया अध्याय शुरू किया और भारतीय महिला क्रिकेट टीम के हेड कोच की भूमिका निभाई। 113 लिस्ट-ए मुकाबलों में 142 विकेट के साथ उनका घरेलू रिकॉर्ड उनकी दीर्घकालिक सफलता का प्रमाण है।
विरासत और योगदान
रमेश पोवार उन भारतीय क्रिकेटरों में से हैं जिन्होंने सीमित अंतरराष्ट्रीय अवसरों के बावजूद घरेलू क्रिकेट में अपनी अमिट छाप छोड़ी। 31.31 की औसत से 470 फर्स्ट क्लास विकेट उन्हें मुंबई क्रिकेट के इतिहास के प्रमुख स्पिनरों में स्थान दिलाते हैं। आने वाली पीढ़ियों के लिए उनकी 'फ्लाइटेड' गेंदबाजी की विरासत और कोचिंग का अनुभव भारतीय क्रिकेट को समृद्ध करता रहेगा।