कूनो नेशनल पार्क में ऐतिहासिक घटना: चीता 'गामिनी' ने 4 शावकों को दिया जन्म
सारांश
Key Takeaways
- गामिनी ने चार शावकों को जन्म दिया, जो पुनर्वास कार्यक्रम की सफलता है।
- यह घटना चीतों के प्राकृतिक प्रजनन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
- कूनो का पर्यावरण चीतों के लिए अनुकूल साबित हो रहा है।
- भारत में यह किसी मादा चीता का पहला सफल प्रजनन है।
- इस उपलब्धि को लेकर वन विभाग की टीम को बधाई मिली है।
नई दिल्ली, 11 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले के कूनो नेशनल पार्क से एक और शानदार समाचार आया है। यहाँ 25 महीने की भारतीय मूल की चीता गामिनी ने शनिवार को चार शावकों को जन्म दिया है। यह घटना भारत में चीतों के पुनर्वास कार्यक्रम के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जा रही है।
इसकी जानकारी स्वयं वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने सोशल मीडिया पर साझा की है।
यह पहली बार नहीं है जब 2022 में शुरू हुए चीता पुनर्वास कार्यक्रम के तहत किसी चीता ने प्राकृतिक जंगल में शावकों को जन्म दिया है। विशेष रूप से, यह किसी भारतीय मूल की मादा चीता द्वारा यह पहली सफल प्रसूति है, जो परियोजना को नई दिशा और मजबूती दे रही है।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, पिछले एक वर्ष से अधिक समय तक यह मादा चीता जंगल में रह रही थी और पूरी तरह से प्राकृतिक परिस्थितियों में ढल चुकी थी। इस तरह से जंगल में शावकों का जन्म होना यह दर्शाता है कि कूनो का पर्यावरण अब चीतों के लिए अनुकूल हो चुका है।
मुख्य वन संरक्षक (सीसीएफ) उत्तम कुमार शर्मा ने इस घटना की पुष्टि करते हुए इसे ऐतिहासिक बताया। उनका कहना है कि यह सफलता परियोजना के मुख्य उद्देश्य के प्रति एक बड़ा कदम है, जिसमें चीतों को प्राकृतिक वातावरण में स्थापित करना और उनका प्रजनन सुनिश्चित करना शामिल है।
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने भी इस उपलब्धि पर खुशी व्यक्त करते हुए सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा की। उन्होंने इसे देश के लिए गर्व का क्षण बताया और वन विभाग की टीम तथा सभी संबंधित कर्मचारियों को बधाई दी।
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने एक्स पर अपनी पोस्ट में लिखा कि कूनो का एक ऐतिहासिक पल है, जहाँ 'गामिनी' नाम की 25 महीने की मादा चीता ने जंगल में चार शावकों को जन्म दिया, जो भारत की चीता संरक्षण यात्रा में एक बड़ी उपलब्धि है।
एक साल से अधिक समय तक जंगल में रहने के बाद, 2022 में चीतों के पुनर्वास की शुरुआत के बाद से यह पहला दर्ज जन्म है, और खास बात यह है कि यह भारत में जन्मी किसी मादा चीता से जुड़ा पहला मामला है।
यह परियोजना के मुख्य लक्ष्यों—प्राकृतिक परिस्थितियों में जीवित रहना और प्रजनन करना—को हासिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह उपलब्धि भारतीय परिस्थितियों के प्रति चीतों के बढ़ते तालमेल को दर्शाती है, और कूनो के प्रबंधकों, पशु चिकित्सकों और फील्ड स्टाफ के समर्पण और प्रयासों का एक जीवंत प्रमाण है।
राष्ट्र के लिए यह एक गर्व का क्षण है। सभी को हार्दिक बधाई।