कूनो नेशनल पार्क में भारत में जन्मी मादा चीता 'केजीपी12' ने दिए 4 शावक, देश में कुल संख्या 56 हुई
सारांश
मुख्य बातें
कूनो राष्ट्रीय उद्यान, मध्य प्रदेश में प्रोजेक्ट चीता को बड़ी सफलता मिली है — भारत में जन्मी मादा चीता 'केजीपी12' ने चार शावकों को जन्म दिया है, जिससे देश में चीतों की कुल संख्या 52 से बढ़कर 56 हो गई है। यह उपलब्धि उस वक्त सामने आई है जब इस पुनर्वास कार्यक्रम ने ठीक एक दिन पहले, 17 सितंबर 2026 को, अपने चार वर्ष पूरे किए थे।
ऐतिहासिक उपलब्धि का पृष्ठभूमि
प्रोजेक्ट चीता की शुरुआत 17 सितंबर 2022 को हुई थी, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नामीबिया से लाए गए पहले आठ चीतों को कूनो में छोड़ा था। इसके बाद 2023 में दक्षिण अफ्रीका से और 2026 में बोत्सवाना से और चीते भारत लाए गए। चार वर्षों की इस यात्रा में कार्यक्रम शुरुआती ढलने और जीवित रहने की चुनौतियों से आगे बढ़कर अब मज़बूती के चरण में पहुँच गया है।
गौरतलब है कि भारत में चीते 1952 में विलुप्त घोषित कर दिए गए थे। 70 वर्षों से अधिक के अंतराल के बाद इस प्रजाति को देश में पुनः बसाने का यह महत्वाकांक्षी प्रयास अब दूसरी पीढ़ी तक पहुँच चुका है।
'केजीपी12' — दूसरी पीढ़ी की मां
नवजात शावकों की मां 'केजीपी12' स्वयं 2024 में भारत में पैदा हुई थी। वह मादा चीता गामिनी की बेटी है, जिसे फरवरी 2023 में दक्षिण अफ्रीका से भारत लाया गया था। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में जन्मी मादा का सफलतापूर्वक प्रजनन करना इस बात का प्रमाण है कि पुनः लाए गए चीते भारतीय परिस्थितियों में न केवल ढल रहे हैं, बल्कि स्थायी आबादी स्थापित करने में सक्षम भी हो रहे हैं। अब भारत में पैदा हुए चीतों की कुल संख्या 36 हो गई है।
वर्तमान में चीतों की स्थिति
इन चार नए शावकों के जन्म के बाद कूनो नेशनल पार्क में अब 53 चीते हैं, जबकि तीन चीते मध्य प्रदेश के गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य में हैं। कूनो की वन टीम शावकों पर दूर से निगरानी रख रही है और उनकी व उनकी मां की भलाई सुनिश्चित करने के लिए सघन निगरानी एवं आवास प्रबंधन जारी है।
सरकार की प्रतिक्रिया
केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने इस घटनाक्रम की घोषणा की और इसे 'प्रोजेक्ट चीता के लिए सचमुच एक ऐतिहासिक और खुशी का पल' बताया। उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, 'चार वर्ष, चार नई ज़िंदगियाँ... उम्मीद, हिम्मत और भारत में चीता संरक्षण की बढ़ती सफलता का एक सुंदर प्रतीक।' यादव ने संपूर्ण कूनो और प्रोजेक्ट चीता टीम को बधाई दी।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
इस प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों और वन्यजीव संरक्षणवादियों ने इस खबर का स्वागत करते हुए इसे प्राकृतिक आबादी वृद्धि का सकारात्मक संकेत बताया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह ऐसे समय में आया है जब प्रोजेक्ट को लेकर शुरुआती वर्षों में कुछ चीतों की मृत्यु के बाद सवाल उठाए जा रहे थे। भारत में जन्मी मां से चार शावकों का जन्म देश में एक स्व-निर्वाह करने वाली चीता आबादी की उम्मीदों को मज़बूत करता है।
कूनो टीम नए शावकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आने वाले हफ्तों में कड़ी निगरानी जारी रखेगी — यह प्रोजेक्ट चीता के लिए एक निर्णायक कड़ी साबित हो सकती है।