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कूनो नेशनल पार्क में भारत में जन्मी मादा चीता 'केजीपी12' ने दिए 4 शावक, देश में कुल संख्या 56 हुई

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कूनो नेशनल पार्क में भारत में जन्मी मादा चीता 'केजीपी12' ने दिए 4 शावक, देश में कुल संख्या 56 हुई

सारांश

प्रोजेक्ट चीता के चार साल पूरे होते ही एक ऐतिहासिक क्षण आया — भारत में जन्मी मादा चीता 'केजीपी12' ने चार शावकों को जन्म दिया। दूसरी पीढ़ी की माँ से शावकों का जन्म यह साबित करता है कि भारत में चीते अब न केवल जी रहे हैं, बल्कि एक स्थायी आबादी की नींव रख रहे हैं।

मुख्य बातें

कूनो राष्ट्रीय उद्यान में भारत में जन्मी मादा चीता 'केजीपी12' ने चार शावकों को जन्म दिया।
इन जन्मों के बाद भारत में चीतों की कुल संख्या 52 से बढ़कर 56 हो गई; अब तक 36 चीते भारत में जन्म ले चुके हैं।
'केजीपी12' स्वयं 2024 में भारत में जन्मी थी और वह दक्षिण अफ्रीका से लाई गई मादा गामिनी की बेटी है — यह दूसरी पीढ़ी का पहला प्रजनन है।
कूनो नेशनल पार्क में अब 53 और गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य में 3 चीते हैं।
प्रोजेक्ट चीता की शुरुआत 17 सितंबर 2022 को PM नरेंद्र मोदी द्वारा की गई थी; यह उपलब्धि इसके चार वर्ष पूरे होने के ठीक एक दिन बाद आई।
भारत में चीते 1952 में विलुप्त घोषित हुए थे — 70 वर्षों बाद यह प्रजाति अब दूसरी पीढ़ी में प्रवेश कर चुकी है।

कूनो राष्ट्रीय उद्यान, मध्य प्रदेश में प्रोजेक्ट चीता को बड़ी सफलता मिली है — भारत में जन्मी मादा चीता 'केजीपी12' ने चार शावकों को जन्म दिया है, जिससे देश में चीतों की कुल संख्या 52 से बढ़कर 56 हो गई है। यह उपलब्धि उस वक्त सामने आई है जब इस पुनर्वास कार्यक्रम ने ठीक एक दिन पहले, 17 सितंबर 2026 को, अपने चार वर्ष पूरे किए थे।

ऐतिहासिक उपलब्धि का पृष्ठभूमि

प्रोजेक्ट चीता की शुरुआत 17 सितंबर 2022 को हुई थी, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नामीबिया से लाए गए पहले आठ चीतों को कूनो में छोड़ा था। इसके बाद 2023 में दक्षिण अफ्रीका से और 2026 में बोत्सवाना से और चीते भारत लाए गए। चार वर्षों की इस यात्रा में कार्यक्रम शुरुआती ढलने और जीवित रहने की चुनौतियों से आगे बढ़कर अब मज़बूती के चरण में पहुँच गया है।

गौरतलब है कि भारत में चीते 1952 में विलुप्त घोषित कर दिए गए थे। 70 वर्षों से अधिक के अंतराल के बाद इस प्रजाति को देश में पुनः बसाने का यह महत्वाकांक्षी प्रयास अब दूसरी पीढ़ी तक पहुँच चुका है।

'केजीपी12' — दूसरी पीढ़ी की मां

नवजात शावकों की मां 'केजीपी12' स्वयं 2024 में भारत में पैदा हुई थी। वह मादा चीता गामिनी की बेटी है, जिसे फरवरी 2023 में दक्षिण अफ्रीका से भारत लाया गया था। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में जन्मी मादा का सफलतापूर्वक प्रजनन करना इस बात का प्रमाण है कि पुनः लाए गए चीते भारतीय परिस्थितियों में न केवल ढल रहे हैं, बल्कि स्थायी आबादी स्थापित करने में सक्षम भी हो रहे हैं। अब भारत में पैदा हुए चीतों की कुल संख्या 36 हो गई है।

वर्तमान में चीतों की स्थिति

इन चार नए शावकों के जन्म के बाद कूनो नेशनल पार्क में अब 53 चीते हैं, जबकि तीन चीते मध्य प्रदेश के गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य में हैं। कूनो की वन टीम शावकों पर दूर से निगरानी रख रही है और उनकी व उनकी मां की भलाई सुनिश्चित करने के लिए सघन निगरानी एवं आवास प्रबंधन जारी है।

सरकार की प्रतिक्रिया

केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने इस घटनाक्रम की घोषणा की और इसे 'प्रोजेक्ट चीता के लिए सचमुच एक ऐतिहासिक और खुशी का पल' बताया। उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, 'चार वर्ष, चार नई ज़िंदगियाँ... उम्मीद, हिम्मत और भारत में चीता संरक्षण की बढ़ती सफलता का एक सुंदर प्रतीक।' यादव ने संपूर्ण कूनो और प्रोजेक्ट चीता टीम को बधाई दी।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

इस प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों और वन्यजीव संरक्षणवादियों ने इस खबर का स्वागत करते हुए इसे प्राकृतिक आबादी वृद्धि का सकारात्मक संकेत बताया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह ऐसे समय में आया है जब प्रोजेक्ट को लेकर शुरुआती वर्षों में कुछ चीतों की मृत्यु के बाद सवाल उठाए जा रहे थे। भारत में जन्मी मां से चार शावकों का जन्म देश में एक स्व-निर्वाह करने वाली चीता आबादी की उम्मीदों को मज़बूत करता है।

कूनो टीम नए शावकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आने वाले हफ्तों में कड़ी निगरानी जारी रखेगी — यह प्रोजेक्ट चीता के लिए एक निर्णायक कड़ी साबित हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

उपलब्ध आवास की वहन क्षमता, और गांधी सागर जैसे दूसरे स्थलों तक विस्तार की गति — ये सब मिलकर तय करेंगे कि 56 की यह संख्या एक स्थायी आबादी की दिशा में असली कदम है या महज़ एक आँकड़ा।
RashtraPress
18 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत में जन्मी मादा चीता 'केजीपी12' कौन है?
'केजीपी12' एक मादा चीता है जो 2024 में भारत में पैदा हुई थी। वह दक्षिण अफ्रीका से फरवरी 2023 में लाई गई मादा चीता 'गामिनी' की बेटी है और प्रोजेक्ट चीता की दूसरी पीढ़ी का हिस्सा है।
प्रोजेक्ट चीता के तहत अब भारत में चीतों की कुल संख्या कितनी है?
चार नए शावकों के जन्म के बाद भारत में चीतों की कुल संख्या 56 हो गई है। इनमें से 53 कूनो नेशनल पार्क में और 3 गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य, मध्य प्रदेश में हैं। अब तक 36 चीते भारत में जन्म ले चुके हैं।
प्रोजेक्ट चीता की शुरुआत कब और कैसे हुई थी?
प्रोजेक्ट चीता की शुरुआत 17 सितंबर 2022 को हुई थी, जब PM नरेंद्र मोदी ने नामीबिया से लाए गए पहले आठ चीतों को कूनो राष्ट्रीय उद्यान में छोड़ा था। इसके बाद 2023 में दक्षिण अफ्रीका से और 2026 में बोत्सवाना से और चीते भारत लाए गए।
यह उपलब्धि महत्वपूर्ण क्यों मानी जा रही है?
भारत में जन्मी मादा चीता का सफलतापूर्वक प्रजनन करना दर्शाता है कि पुनः लाए गए चीते अब भारतीय परिस्थितियों में न सिर्फ ढल रहे हैं, बल्कि स्वाभाविक रूप से प्रजनन भी कर रहे हैं। गौरतलब है कि भारत में चीते 1952 में विलुप्त घोषित हो गए थे और यह दूसरी पीढ़ी का पहला सफल प्रजनन है।
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने इस पर क्या कहा?
केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने इसे 'प्रोजेक्ट चीता के लिए ऐतिहासिक और खुशी का पल' बताया। उन्होंने कहा, 'चार वर्ष, चार नई ज़िंदगियाँ... उम्मीद, हिम्मत और भारत में चीता संरक्षण की बढ़ती सफलता का एक सुंदर प्रतीक।'
राष्ट्र प्रेस
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