18 सितंबर 2026
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आईडीपीआईसी अभी 8 बैंकों में पायलट पर: RBI डिप्टी गवर्नर मुर्मू ने बताया साइबर सुरक्षा का रोडमैप

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आईडीपीआईसी अभी 8 बैंकों में पायलट पर: RBI डिप्टी गवर्नर मुर्मू ने बताया साइबर सुरक्षा का रोडमैप

सारांश

RBI की साइबर सुरक्षा महत्वाकांक्षा ज़मीन पर उतरने लगी है — IDPIC अब 8 बैंकों में पायलट पर है। AI और ML से लैस यह प्लेटफ़ॉर्म रियल-टाइम फ्रॉड अलर्ट साझा करेगा। सवाल यह है कि पायलट से राष्ट्रव्यापी रोलआउट तक की राह कितनी तेज़ होगी।

मुख्य बातें

RBI डिप्टी गवर्नर शिरीष चंद्र मुर्मू ने 18 सितंबर 2026 को मुंबई में IDPIC की ताज़ा स्थिति की जानकारी दी।
IDPIC फिलहाल 8 बैंकों के साथ पायलट आधार पर संचालित हो रहा है; व्यापक रोलआउट में तेज़ी लाई जा रही है।
प्रणाली में AI, ML और बिग डेटा एनालिटिक्स के ज़रिये रियल-टाइम फ्रॉड इंटेलिजेंस साझा की जाएगी।
मुर्मू के अनुसार डिजिटल लेनदेन बढ़ने के बावजूद नकदी का स्टोर ऑफ वैल्यू के रूप में उपयोग कम नहीं हुआ।
पिछले एक वर्ष में RBI ने 600 से अधिक मसौदा व अंतिम सर्कुलर जारी किए; विनियमित संस्थाओं को 11 श्रेणियों में पुनर्वर्गीकृत किया।

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के डिप्टी गवर्नर शिरीष चंद्र मुर्मू ने 18 सितंबर 2026 को मुंबई में एक कार्यक्रम के दौरान खुलासा किया कि इंडिया डिजिटल पेमेंट इंटेलिजेंस कॉरपोरेशन (IDPIC) फिलहाल 8 बैंकों के साथ पायलट आधार पर संचालित हो रहा है। उन्होंने कहा कि RBI इस पहल के व्यापक क्रियान्वयन को तेज़ करने पर सक्रिय रूप से काम कर रहा है, ताकि डिजिटल भुगतान प्रणाली को साइबर वित्तीय धोखाधड़ी से बचाया जा सके।

आईडीपीआईसी क्या है और यह कैसे काम करेगा

IDPIC को RBI के परामर्श से स्थापित किया जा रहा है। इसका मूल उद्देश्य बैंकों और वित्तीय संस्थानों के बीच रियल-टाइम फ्रॉड इंटेलिजेंस और चेतावनियाँ साझा करने का एक सुदृढ़ तंत्र विकसित करना है। इस प्रणाली में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग (ML) और बिग डेटा एनालिटिक्स जैसी उन्नत तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। यह ऐसे समय में आया है जब देश में डिजिटल लेनदेन की मात्रा तेज़ी से बढ़ रही है और साथ ही साइबर धोखाधड़ी की घटनाएँ भी।

पायलट की स्थिति और आगे की योजना

मुर्मू ने स्पष्ट किया, 'यह पहले से ही 8 बैंकों में पायलट आधार पर चल रहा है। हम इसे तेज़ी से आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।' हालाँकि उन्होंने उन बैंकों के नाम या व्यापक रोलआउट की तिथि का उल्लेख नहीं किया। गौरतलब है कि सरकार और RBI पिछले कुछ समय से डिजिटल भुगतान के सुरक्षा ढाँचे को मज़बूत करने के लिए कई समानांतर कदम उठा रहे हैं।

नकदी और डिजिटल भुगतान का सह-अस्तित्व

मुर्मू ने भुगतान प्रणाली में हो रहे बुनियादी बदलाव पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि डिजिटल भुगतान में तेज़ वृद्धि के बावजूद नकदी का महत्व पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। उनके अनुसार, लेनदेन के माध्यम के रूप में नकदी का उपयोग धीरे-धीरे डिजिटल विकल्पों से प्रतिस्थापित हो रहा है, किंतु मूल्य संचय (स्टोर ऑफ वैल्यू) के रूप में नकदी की भूमिका अभी भी बनी हुई है।

मुर्मू ने कहा, 'हम प्रचलन में मौजूद नकदी को देखते हैं। जब डिजिटल ट्रांजैक्शन बढ़ते हैं, तो उसी अनुपात में नकदी कम होनी चाहिए, लेकिन हम ऐसा बहुत अधिक नहीं देख रहे हैं।' उन्होंने यह भी बताया कि घरों और व्यक्तियों के पास मौजूद नकदी की मात्रा देश की समग्र आर्थिक स्थिति से जुड़ी होती है।

अर्थव्यवस्था में बढ़ती औपचारिकता

डिप्टी गवर्नर ने कहा कि अर्थव्यवस्था में लगातार बढ़ती औपचारिकता (Formalisation) डिजिटल भुगतान को तेज़ी से बढ़ावा दे रही है। उन्होंने कहा, 'अर्थव्यवस्था में लगातार औपचारिकता बढ़ रही है। इसलिए हमें दिशा के लिहाज़ से काफी उम्मीद है। डिजिटल भुगतान बहुत अच्छी तरह आगे बढ़ रहा है।'

नियामकीय बदलावों की रफ़्तार

नियामकीय गतिविधियों पर बोलते हुए मुर्मू ने बताया कि पिछले एक वर्ष में RBI ने 600 से अधिक मसौदा और अंतिम संशोधन सर्कुलर जारी किए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्रीय बैंक ने विनियमित संस्थाओं को लगभग 11 अलग-अलग श्रेणियों में पुनर्वर्गीकृत किया है, जिसके कारण कई सर्कुलरों को विभिन्न श्रेणियों के अनुरूप अलग-अलग रूप में जारी करना पड़ा और इससे उनकी संख्या अधिक दिखाई देती है। IDPIC के पूर्ण क्रियान्वयन के बाद भारत की डिजिटल भुगतान सुरक्षा वास्तुकला एक नए स्तर पर पहुँचने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बिना किसी सार्वजनिक टाइमलाइन के, उस पैमाने की तात्कालिकता से मेल नहीं खाता जिस पर साइबर धोखाधड़ी की घटनाएँ बढ़ रही हैं। यह पहली बार नहीं है कि RBI ने किसी बड़ी तकनीकी पहल को पायलट में वर्षों तक रखा हो — असली परीक्षा स्केल-अप की गति और छोटे सहकारी व ग्रामीण बैंकों तक पहुँच की होगी, जो साइबर धोखाधड़ी के सबसे आसान निशाने हैं।
RashtraPress
18 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आईडीपीआईसी (IDPIC) क्या है और इसे क्यों बनाया जा रहा है?
IDPIC यानी इंडिया डिजिटल पेमेंट इंटेलिजेंस कॉरपोरेशन एक ऐसा तंत्र है जिसे RBI के परामर्श से बैंकों और वित्तीय संस्थानों के बीच रियल-टाइम फ्रॉड इंटेलिजेंस और चेतावनियाँ साझा करने के लिए स्थापित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य AI, ML और बिग डेटा एनालिटिक्स की मदद से डिजिटल भुगतान को साइबर वित्तीय धोखाधड़ी से सुरक्षित बनाना है।
अभी कितने बैंकों में IDPIC का पायलट चल रहा है?
RBI डिप्टी गवर्नर शिरीष चंद्र मुर्मू के अनुसार, 18 सितंबर 2026 तक IDPIC 8 बैंकों में पायलट आधार पर संचालित हो रहा है। RBI इस पायलट को तेज़ी से आगे बढ़ाने पर काम कर रहा है, हालाँकि व्यापक रोलआउट की कोई निश्चित तिथि सार्वजनिक नहीं की गई है।
क्या डिजिटल भुगतान बढ़ने से नकदी का उपयोग खत्म हो रहा है?
मुर्मू के अनुसार, नकदी का लेनदेन माध्यम के रूप में उपयोग धीरे-धीरे कम हो रहा है, लेकिन मूल्य संचय (स्टोर ऑफ वैल्यू) के रूप में नकदी की भूमिका अभी भी बरकरार है। डिजिटल ट्रांजैक्शन बढ़ने के बावजूद प्रचलन में मौजूद नकदी में उतनी गिरावट नहीं देखी जा रही जितनी अपेक्षित थी।
RBI ने पिछले एक साल में कितने सर्कुलर जारी किए हैं?
मुर्मू ने बताया कि पिछले एक वर्ष में RBI ने 600 से अधिक मसौदा और अंतिम संशोधन सर्कुलर जारी किए हैं। इनकी संख्या इसलिए अधिक दिखती है क्योंकि RBI ने विनियमित संस्थाओं को लगभग 11 अलग-अलग श्रेणियों में पुनर्वर्गीकृत किया है, जिससे एक ही सर्कुलर को विभिन्न श्रेणियों के लिए अलग-अलग जारी करना पड़ा।
IDPIC से आम बैंक ग्राहकों को क्या फायदा होगा?
IDPIC के पूरी तरह लागू होने पर बैंक एक-दूसरे के साथ रियल-टाइम में संदिग्ध लेनदेन की जानकारी साझा कर सकेंगे, जिससे साइबर धोखाधड़ी की पहचान और रोकथाम तेज़ होगी। इसका सीधा लाभ डिजिटल भुगतान करने वाले आम नागरिकों को मिलेगा, जो साइबर ठगी के सबसे अधिक शिकार होते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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