18 सितंबर 2026
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मझगांव डॉक करेगा दुगराजपट्टनम में ₹15,000 करोड़ का ग्रीनफील्ड शिपयार्ड, 45,000 रोज़गार का लक्ष्य

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मझगांव डॉक करेगा दुगराजपट्टनम में ₹15,000 करोड़ का ग्रीनफील्ड शिपयार्ड, 45,000 रोज़गार का लक्ष्य

सारांश

रक्षा मंत्रालय की नवरत्न कंपनी MDL ने आंध्र प्रदेश के दुगराजपट्टनम में ₹15,000 करोड़ के ग्रीनफील्ड शिपयार्ड के लिए MoU साइन किया — 45,000 नौकरियों का वादा और 12 लाख ग्रॉस टनेज की क्षमता। भारत के 2047 तक वैश्विक शिपबिल्डिंग के शीर्ष पाँच में शामिल होने के सपने की यह शायद सबसे ठोस नींव है।

मुख्य बातें

मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स (MDL) ने 18 सितंबर 2026 को दुगराजपट्टनम, आंध्र प्रदेश में ग्रीनफील्ड शिपयार्ड के लिए MoU पर हस्ताक्षर किए।
प्रस्तावित निवेश लगभग ₹15,000 करोड़ , अगले 5 से 7 वर्षों में चरणबद्ध रूप से।
परियोजना से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष मिलाकर लगभग 45,000 रोज़गार सृजित होने की उम्मीद।
शिपयार्ड की वार्षिक डिज़ाइन क्षमता 12 लाख ग्रॉस टनेज ; टैंकर, एलएनजी कैरियर और कंटेनर जहाज़ बनेंगे।
कुल क्लस्टर लागत ₹38,767 करोड़ (शिपयार्ड ₹29,254 करोड़ + बंदरगाह ₹9,513 करोड़); बंदरगाह केंद्र सरकार बनाएगी।
मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने कहा — भारत का लक्ष्य 2047 तक दुनिया के शीर्ष 5 शिपबिल्डिंग देशों में शामिल होना।

मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) ने 18 सितंबर 2026 को आंध्र प्रदेश के दुगराजपट्टनम में एक आधुनिक ग्रीनफील्ड शिपयार्ड विकसित करने की घोषणा की, जिसमें अगले पाँच से सात वर्षों में लगभग ₹15,000 करोड़ का निवेश प्रस्तावित है। रक्षा मंत्रालय के अधीन नवरत्न कंपनी MDL का यह कदम आंध्र प्रदेश को भारत के प्रमुख समुद्री विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक निर्णायक मोड़ माना जा रहा है।

समझौता ज्ञापन और मुख्य पक्ष

MDL के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक कैप्टन जगमोहन (सेवानिवृत्त) और नेशनल शिपबिल्डिंग एंड हेवी इंडस्ट्रीज पार्क-आंध्र प्रदेश (NSHIP-AP) के प्रबंध निदेशक प्रवीण आदित्य के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इस अवसर पर आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू विशेष रूप से उपस्थित रहे।

गौरतलब है कि NSHIP-AP एक विशेष प्रयोजन संस्था है जिसे आंध्र प्रदेश मैरीटाइम बोर्ड और विशाखापत्तनम पोर्ट अथॉरिटी (VPA) ने संयुक्त रूप से गठित किया है। VPA NSHIP-AP में 50 प्रतिशत हिस्सेदारी रखती है।

परियोजना की व्यापकता और क्षमता

टेक्नो-इकोनॉमिक फिजिबिलिटी रिपोर्ट के अनुसार, शिपबिल्डिंग एवं शिप रिपेयर यार्ड की अनुमानित कुल लागत ₹29,254 करोड़ और बंदरगाह की लागत ₹9,513 करोड़ आंकी गई है। प्रस्तावित बंदरगाह का विकास केंद्र सरकार द्वारा किया जाएगा।

प्रस्तावित शिपयार्ड की वार्षिक डिज़ाइन क्षमता 12 लाख ग्रॉस टनेज होगी, जिसे भविष्य में बाज़ार की माँग के अनुसार और बढ़ाया जा सकेगा। यहाँ टैंकर, बल्क कैरियर, कंटेनर जहाज़, एलएनजी कैरियर और अन्य बड़े विशेष जहाज़ों का निर्माण होगा।

रोज़गार और आर्थिक प्रभाव

इस परियोजना से आंध्र प्रदेश में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 45,000 रोज़गार सृजित होने की उम्मीद है। यह क्लस्टर जहाज़ निर्माण, समुद्री इंजीनियरिंग, विनिर्माण, लॉजिस्टिक्स और संबंधित क्षेत्रों में व्यापक अवसर खोलेगा।

यह शिपबिल्डिंग क्लस्टर केंद्र सरकार की शिपबिल्डिंग डेवलपमेंट स्कीम (SDS) के तहत विकसित किया जा रहा है, और NSHIP-AP ने MDL को इस परियोजना के लिए एंकर शिपयार्ड के रूप में चुना है।

नेताओं और अधिकारियों की प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि भारत ने वर्ष 2047 तक दुनिया के शीर्ष पाँच जहाज़ निर्माण देशों में शामिल होने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है और आंध्र प्रदेश इस यात्रा में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, 'आंध्र प्रदेश अपनी लंबी समुद्री तटरेखा, रणनीतिक भौगोलिक स्थिति और मज़बूत औद्योगिक इकोसिस्टम का लाभ उठाकर समुद्री क्षेत्र के विकास को गति देगा।'

MDL के सीएमडी कैप्टन जगमोहन (सेवानिवृत्त) ने कहा कि दुगराजपट्टनम में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी शिपयार्ड विकसित करने की क्षमता और समुद्री संसाधन मौजूद हैं, और MDL का लक्ष्य घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों की ज़रूरतों को पूरा करने वाली आधुनिक सुविधा खड़ी करना है।

VPA की अध्यक्ष जसमीत सिंह बिंद्रा ने कहा कि पोर्ट अथॉरिटी इस क्लस्टर के विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और केंद्र सरकार तथा अन्य केंद्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय में सहयोग करेगी। आंध्र प्रदेश के इन्फ्रास्ट्रक्चर एवं निवेश विभाग के सचिव कोना शशिधर ने भी MDL के चयन को राज्य के समुद्री विकास के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया।

आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक शिपबिल्डिंग में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश कर रहा है — फिलहाल देश का वैश्विक ऑर्डर बुक में योगदान नगण्य है, जबकि दक्षिण कोरिया, चीन और जापान इस क्षेत्र पर वर्चस्व रखते हैं। आंध्र प्रदेश मैरीटाइम बोर्ड परियोजना के समयबद्ध विकास के लिए आवश्यक भूमि, बुनियादी ढाँचे और वैधानिक मंज़ूरियों की सुविधा उपलब्ध कराएगा। निवेश आवश्यक अनुमतियों और मंज़ूरियों के अधीन है और अगले पाँच से सात वर्षों में चरणबद्ध रूप से होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन वैश्विक ऑर्डर बुक में भारत की हिस्सेदारी अब भी 1% से कम है। ₹15,000 करोड़ का निवेश प्रभावशाली लगता है, परंतु यह आवश्यक अनुमतियों और मंज़ूरियों पर निर्भर है — और भारत में बड़ी औद्योगिक परियोजनाएँ नियामकीय अड़चनों में वर्षों गँवा चुकी हैं। असली परीक्षण यह होगा कि क्या 45,000 रोज़गार का आँकड़ा सत्यापन-योग्य मानकों से जुड़ा होगा, या यह दक्षिण कोरिया और चीन की प्रतिस्पर्धी बढ़त के सामने महज़ एक महत्वाकांक्षी दावा बनकर रह जाएगा।
RashtraPress
18 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मझगांव डॉक का दुगराजपट्टनम शिपयार्ड प्रोजेक्ट क्या है?
यह आंध्र प्रदेश के दुगराजपट्टनम में विकसित होने वाला एक ग्रीनफील्ड शिपयार्ड है, जिसमें MDL लगभग ₹15,000 करोड़ निवेश करेगा। इसकी वार्षिक क्षमता 12 लाख ग्रॉस टनेज होगी और यह केंद्र सरकार की शिपबिल्डिंग डेवलपमेंट स्कीम (SDS) के तहत विकसित होगा।
इस शिपयार्ड से आंध्र प्रदेश में कितनी नौकरियाँ मिलेंगी?
परियोजना से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 45,000 रोज़गार सृजित होने की उम्मीद है। यह अवसर जहाज़ निर्माण, समुद्री इंजीनियरिंग, विनिर्माण और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में होंगे।
NSHIP-AP क्या है और इसमें कौन-कौन शामिल है?
NSHIP-AP (नेशनल शिपबिल्डिंग एंड हेवी इंडस्ट्रीज पार्क-आंध्र प्रदेश) एक विशेष प्रयोजन संस्था है, जिसे आंध्र प्रदेश मैरीटाइम बोर्ड और विशाखापत्तनम पोर्ट अथॉरिटी (VPA) ने संयुक्त रूप से गठित किया है। VPA इसमें 50 प्रतिशत हिस्सेदारी रखती है और MDL को इसी संस्था ने एंकर शिपयार्ड के रूप में चुना है।
पूरे दुगराजपट्टनम शिपबिल्डिंग क्लस्टर की कुल अनुमानित लागत कितनी है?
टेक्नो-इकोनॉमिक फिजिबिलिटी रिपोर्ट के अनुसार, शिपबिल्डिंग और शिप रिपेयर यार्ड की लागत ₹29,254 करोड़ और बंदरगाह की लागत ₹9,513 करोड़ आंकी गई है। बंदरगाह का विकास केंद्र सरकार द्वारा किया जाएगा, जबकि MDL का हिस्सा ₹15,000 करोड़ है।
यह परियोजना भारत के शिपबिल्डिंग लक्ष्य से कैसे जुड़ी है?
भारत ने 2047 तक दुनिया के शीर्ष पाँच जहाज़ निर्माण देशों में शामिल होने का लक्ष्य रखा है। मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के अनुसार, आंध्र प्रदेश अपनी लंबी तटरेखा और रणनीतिक भौगोलिक स्थिति के कारण इस राष्ट्रीय लक्ष्य में अग्रणी भूमिका निभा सकता है।
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