18 सितंबर 2026
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जयशंकर की भूटान यात्रा संपन्न: ₹4000 करोड़ की ऊर्जा ऋण सुविधा और पुनातसांगचू परियोजनाओं पर बड़ी प्रगति

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जयशंकर की भूटान यात्रा संपन्न: ₹4000 करोड़ की ऊर्जा ऋण सुविधा और पुनातसांगचू परियोजनाओं पर बड़ी प्रगति

सारांश

विदेश मंत्री जयशंकर की भूटान यात्रा सिर्फ शिष्टाचार भेंट नहीं थी — ₹4000 करोड़ की ऊर्जा ऋण सुविधा, पुनातसांगचू-I के बांध निर्माण की पुनः शुरुआत और GMC पर ठोस सहमति के साथ यह यात्रा भारत-भूटान साझेदारी को एक नई ऊर्जा देती है।

मुख्य बातें

जयशंकर ने 18 सितंबर 2026 को थिम्पू में भूटान की आधिकारिक यात्रा पूरी की।
भूटान की ऊर्जा परियोजनाओं के लिए ₹4000 करोड़ की रियायती ऋण सुविधा के समझौते पर हस्ताक्षर।
1020 मेगावाट की पुनातसांगचू-II HEP का उद्घाटन और 1200 मेगावाट की पुनातसांगचू-I HEP के बांध निर्माण की पुनः शुरुआत।
भूटान की 13वीं पंचवर्षीय योजना (2024-29) के लिए भारत के समर्थन की पुनः पुष्टि।
गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी (GMC) पर सहयोग जारी रखने पर दोनों पक्षों में सहमति।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 18 सितंबर 2026 को थिम्पू में भूटान की आधिकारिक यात्रा सफलतापूर्वक पूरी की, जिसमें दोनों देशों ने ऊर्जा साझेदारी, द्विपक्षीय विकास सहयोग और गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी (GMC) परियोजना सहित कई अहम मुद्दों पर ठोस प्रगति दर्ज की। यह यात्रा भूटान के विदेश और एक्सटर्नल व्यापार मंत्री ल्योंपो डी. एन. ढुंग्येल के आमंत्रण पर संपन्न हुई।

यात्रा की मुख्य उपलब्धियाँ

यात्रा के समापन पर जारी संयुक्त बयान में दोनों पक्षों ने भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में भारत-भूटान की बहुआयामी साझेदारी को मजबूत करने में हुई प्रगति का स्वागत किया। विदेश मंत्री जयशंकर ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी यात्रा के अनुभव साझा करते हुए लिखा, 'भूटान की एक सफल यात्रा पूरी हुई। हमारी दोस्ती के अनोखे रिश्तों की गर्माहट ने दिल छू लिया।'

द्विपक्षीय विकास सहयोग की समीक्षा के साथ ही विदेश मंत्री ने भूटान की 13वीं पंचवर्षीय योजना (2024-29) के अंतर्गत विभिन्न कार्यक्रमों में भारत की सक्रिय भागीदारी जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई। भूटान ने भी इस समर्थन की सराहना की।

ऊर्जा सहयोग में नई गति

इस यात्रा का सबसे उल्लेखनीय पहलू ऊर्जा क्षेत्र में हुई प्रगति रही। दोनों पक्षों ने भूटान में ऊर्जा परियोजनाओं के लिए ₹4000 करोड़ की रियायती ऋण सुविधा (लाइन ऑफ क्रेडिट) के समझौते पर हस्ताक्षर का स्वागत किया।

उल्लेखनीय उपलब्धियों में 1020 मेगावाट की पुनातसांगचू-II जलविद्युत परियोजना (HEP) का उद्घाटन, उसके टैरिफ प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर और 1200 मेगावाट की पुनातसांगचू-I HEP के बांध निर्माण कार्य को फिर से शुरू करना शामिल है। संयुक्त बयान में मार्च 2024 की ऊर्जा साझेदारी पर संयुक्त विजन के कार्यान्वयन पर संतोष व्यक्त किया गया।

बयान के अनुसार, दोनों पक्षों ने भूटान की जलविद्युत परियोजनाओं में भारतीय कंपनियों की सक्रिय भागीदारी का स्वागत किया, जिससे मौजूदा ऊर्जा सहयोग में नई ऊर्जा आई है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को तेजी से बढ़ा रहा है।

गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी पर भारत की प्रतिबद्धता

विदेश मंत्री जयशंकर ने गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी (GMC) के लिए भूटान के राजा की महत्वाकांक्षी परिकल्पना के प्रति भारत सरकार के समर्थन को पुनः दोहराया। दोनों पक्षों ने GMC पर गठित संयुक्त कार्य समूह के माध्यम से चल रही बातचीत को स्वीकार किया और GMC से जुड़े मुद्दों पर सहयोग को आगे बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की।

गौरतलब है कि GMC भूटान की आर्थिक विविधीकरण की दिशा में एक महत्वाकांक्षी परियोजना है जिसमें भारत की रणनीतिक भागीदारी भविष्य के सहयोग की रूपरेखा तय करेगी।

भारत-भूटान संबंधों का संदर्भ

भारत और भूटान के बीच संबंध पारंपरिक रूप से मित्रता संधि और आर्थिक सहयोग पर आधारित रहे हैं। भूटान की पंचवर्षीय योजनाओं में भारत का योगदान महत्वपूर्ण रहा है और जलविद्युत क्षेत्र में दोनों देशों की साझेदारी न केवल भूटान की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, बल्कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए भी अहम है। यह यात्रा उस दीर्घकालिक ढाँचे को और मजबूत करने की दिशा में एक ठोस कदम मानी जा रही है।

आगे की राह

दोनों देशों ने GMC तथा ऊर्जा परियोजनाओं पर सहयोग को निरंतर आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई है। ₹4000 करोड़ की ऋण सुविधा से भूटान में नई परियोजनाओं को गति मिलने की उम्मीद है, जबकि पुनातसांगचू-I के बांध निर्माण की पुनः शुरुआत दोनों देशों के ऊर्जा सहयोग में एक नया अध्याय जोड़ती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

न कि घोषणाओं की संख्या।
RashtraPress
18 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विदेश मंत्री जयशंकर की भूटान यात्रा का मुख्य उद्देश्य क्या था?
यह यात्रा भूटान के विदेश मंत्री ल्योंपो डी. एन. ढुंग्येल के निमंत्रण पर हुई और इसका उद्देश्य द्विपक्षीय सहयोग, ऊर्जा साझेदारी और गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी जैसे अहम मुद्दों पर विचार-विमर्श करना था। दोनों देशों ने भारत-भूटान की बहुआयामी साझेदारी को मजबूत करने में हुई प्रगति का संयुक्त बयान में स्वागत किया।
भूटान में ऊर्जा परियोजनाओं के लिए ₹4000 करोड़ की ऋण सुविधा क्या है?
भारत ने भूटान की ऊर्जा परियोजनाओं के लिए ₹4000 करोड़ की रियायती लाइन ऑफ क्रेडिट (ऋण सुविधा) प्रदान की है, जिसके समझौते पर इस यात्रा के दौरान हस्ताक्षर हुए। इसका उद्देश्य भूटान में जलविद्युत परियोजनाओं को गति देना और भारतीय कंपनियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना है।
पुनातसांगचू जलविद्युत परियोजनाओं की ताज़ा स्थिति क्या है?
1020 मेगावाट की पुनातसांगचू-II HEP का उद्घाटन हो चुका है और उसके टैरिफ प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर भी हो गए हैं। वहीं, 1200 मेगावाट की पुनातसांगचू-I HEP के बांध निर्माण कार्य को फिर से शुरू किया गया है, जो वर्षों की देरी के बाद एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी क्या है और भारत की क्या भूमिका है?
गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी (GMC) भूटान के राजा की एक महत्वाकांक्षी परियोजना है जो देश के आर्थिक विविधीकरण के लिए एक विशेष आर्थिक क्षेत्र के रूप में परिकल्पित है। भारत ने इस परियोजना के प्रति अपना समर्थन दोहराया है और GMC पर एक संयुक्त कार्य समूह के माध्यम से सहयोग जारी रखने पर सहमति व्यक्त की है।
भारत-भूटान संबंधों में इस यात्रा का क्या महत्व है?
यह यात्रा मार्च 2024 की ऊर्जा साझेदारी पर संयुक्त विजन के कार्यान्वयन को आगे बढ़ाने तथा भूटान की 13वीं पंचवर्षीय योजना (2024-29) में भारत के सहयोग को सुदृढ़ करने के लिहाज से अहम मानी जा रही है। दोनों देशों के बीच जलविद्युत और विकास सहयोग की यह प्रगति द्विपक्षीय संबंधों को एक नई दिशा देती है।
राष्ट्र प्रेस
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