जयशंकर की भूटान यात्रा: बुमथांग में विदेश मंत्री धुंग्येल से मुलाकात, ऊर्जा व्यापार कनेक्टिविटी पर चर्चा
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 16 सितंबर 2026 को भूटान के ऐतिहासिक और आध्यात्मिक केंद्र बुमथांग में अपने भूटानी समकक्ष ल्योनपो डी.एन. धुंग्येल के साथ द्विपक्षीय वार्ता की और विकास साझेदारी, ऊर्जा, व्यापार, कनेक्टिविटी, संस्कृति तथा लोगों के बीच संपर्क पर बहुआयामी जुड़ाव को आगे बढ़ाने पर ज़ोर दिया। जयशंकर दो दिवसीय यात्रा पर भूटान पहुँचे हैं, जिसका उद्देश्य लंबे समय से चले आ रहे भारत भूटान द्विपक्षीय सहयोग को और गहरा करना है।
बुमथांग में द्विपक्षीय बातचीत
जयशंकर ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर मुलाकात का विवरण साझा करते हुए कहा, "भूटान के विदेश मंत्री ल्योंपो डी.एन. धुंग्येल से मिलकर और व्यापक सहयोग की समीक्षा करके बहुत खुशी हुई। बुमथांग के आध्यात्मिक और ऐतिहासिक केंद्र में मेरी मेहमान नवाजी करने के लिए उनका धन्यवाद।" उन्होंने आगे लिखा कि "हमारी बातचीत विकास साझेदारी, ऊर्जा, व्यापार, कनेक्टिविटी, संस्कृति और लोगों के बीच संबंधों में हमारे बहुआयामी जुड़ाव को आगे बढ़ाने पर केंद्रित थी। चर्चा में हमारे रिश्ते का विश्वास, सद्भावना और अपनापन झलका।"
यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब भारत और भूटान के बीच नियमित उच्च स्तरीय कूटनीतिक आदान प्रदान का सिलसिला लगातार जारी है। गौरतलब है कि इसी सप्ताह मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार भी तीन दिवसीय भूटान यात्रा पर थे और उन्होंने थिंपू में भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक से मुलाकात की।
पारो पहुँचने पर गर्मजोशी से स्वागत
यात्रा की शुरुआत में जयशंकर का पारो हवाई अड्डे पर भूटानी विदेश मंत्री धुंग्येल ने गर्मजोशी से स्वागत किया। इस अवसर पर जयशंकर ने एक्स पर लिखा, "कुजुजांगपो ला भूटान! आज पारो पहुंचकर बहुत खुशी हुई। गर्मजोशी से स्वागत के लिए भूटान के विदेश मंत्री ल्योंपो डी.एन. धुंग्येल का धन्यवाद। दोस्ती के हमारे अनोखे रिश्तों को आगे बढ़ाने के लिए अपनी मुलाकातों का बेसब्री से इंतजार है।"
यह यात्रा भारत और भूटान के बीच राजनयिक, विकासात्मक और लोगों पर केंद्रित पहलों में निरंतर संस्थागत जुड़ाव की पृष्ठभूमि में हो रही है।
राजा और प्रधानमंत्री से भी होगी मुलाकात
विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार, विदेश मंत्री जयशंकर इस यात्रा के दौरान भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक तथा प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे से भी मुलाकात करेंगे। मंत्रालय ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि "यह यात्रा भारत और भूटान के बीच नियमित उच्च स्तरीय आदान प्रदान की परंपरा के अनुरूप है, और इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच दोस्ती और सहयोग के मौजूदा करीबी रिश्तों को और मजबूत करना है।"
चुनाव आयोग का संस्थागत सहयोग
इसी सप्ताह मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने अपनी तीन दिवसीय भूटान यात्रा के तहत थिंपू में भूटानी नरेश से भेंट की। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, इस यात्रा का उद्देश्य भारतीय निर्वाचन आयोग और भूटान के चुनाव आयोग के बीच संस्थागत सहयोग को मज़बूत करना था। यात्रा के दौरान मुख्य आकर्षण राष्ट्रीय मतदाता दिवस रहा, जो मंगलवार को पारो के जिग्मे सिंग्ये वांगचुक स्कूल ऑफ लॉ में मनाया गया।
भारत भूटान संबंधों का महत्व
भारत और भूटान के बीच संबंध परंपरागत रूप से विशेष मित्रता, विश्वास और पारस्परिक सम्मान पर आधारित रहे हैं। ऊर्जा क्षेत्र में जलविद्युत सहयोग दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों की रीढ़ है, जबकि कनेक्टिविटी और व्यापार के नए आयाम इस साझेदारी को और बहुआयामी बना रहे हैं। आने वाले दिनों में उच्च स्तरीय वार्ताओं के नतीजे इस द्विपक्षीय संबंध की अगली दिशा तय करेंगे।