10 अगस्त 2026
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जयशंकर की मंगोलिया विदेश मंत्री से मुलाकात, खनन-स्वच्छ ऊर्जा समेत कई क्षेत्रों में सहयोग पर सहमति

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जयशंकर की मंगोलिया विदेश मंत्री से मुलाकात, खनन-स्वच्छ ऊर्जा समेत कई क्षेत्रों में सहयोग पर सहमति

सारांश

विदेश मंत्री जयशंकर की उलानबातर यात्रा महज़ एक शिष्टाचार भेंट नहीं — यह भारत की 'एक्ट ईस्ट' नीति में मंगोलिया को केंद्रीय स्थान देने का संकेत है। खनन, स्वच्छ ऊर्जा और कृषि प्रसंस्करण में सहयोग की बात उस समय हो रही है जब भारत अपनी आपूर्ति श्रृंखला विविधीकरण को तेज़ कर रहा है।

मुख्य बातें

जयशंकर 22 जून 2026 को दो दिवसीय यात्रा पर उलानबातर पहुँचे।
मंगोलिया की विदेश मंत्री बत्सेत्सेग बटमुंख से विकास, शिक्षा, सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा और खनन में सहयोग पर चर्चा हुई।
भारत-मंगोलिया के राजनयिक संबंध 24 दिसंबर 1955 से स्थापित हैं; भारत का रेज़िडेंट मिशन 22 फरवरी 1971 को खुला।
यात्रा 13 अक्टूबर 2025 को मंगोलियाई राष्ट्रपति खुरेलसुख उखना की भारत यात्रा के बाद हो रही है।
जयशंकर 24-25 जून को दक्षिण कोरिया जाएँगे; जेजू फोरम में मुख्य भाषण देंगे और विदेश मंत्री चो ह्युन से मिलेंगे।

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर 22 जून 2026 को दो दिवसीय यात्रा पर उलानबातर पहुँचे और मंगोलिया की विदेश मंत्री बत्सेत्सेग बटमुंख से द्विपक्षीय वार्ता की। इस बैठक में विकास परियोजनाओं, शिक्षा, सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा और खनन सहित कई रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग विस्तार पर सहमति बनी। यह यात्रा 13 अक्टूबर 2025 को मंगोलियाई राष्ट्रपति खुरेलसुख उखना की भारत यात्रा के बाद द्विपक्षीय संबंधों को और मज़बूत करने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।

मुख्य घटनाक्रम

जयशंकर ने बैठक के बाद एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, 'उलानबातर में विदेश मंत्री बत्सेत्सेग बटमुंख से मिलकर बहुत खुशी हुई। हमारी बातचीत में भारत और मंगोलिया की रणनीतिक साझेदारी की गर्मजोशी, मज़बूती और भविष्य की संभावनाएँ साफ़ दिखाई दीं।' उन्होंने यह भी बताया कि दोनों पक्षों ने क्षमता निर्माण, संस्कृति, बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग की प्रगति की समीक्षा की तथा खनन, स्वच्छ ऊर्जा और कृषि प्रसंस्करण में नए अवसर तलाशे।

भारत-मंगोलिया संबंधों की पृष्ठभूमि

भारत और मंगोलिया के बीच राजनयिक संबंध 24 दिसंबर 1955 को स्थापित हुए थे। मंगोलिया ने अगले वर्ष नई दिल्ली में अपना दूतावास खोला, जबकि भारत ने 22 फरवरी 1971 को उलानबातर में अपना रेज़िडेंट मिशन स्थापित किया। दोनों देश सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और लोकतांत्रिक मूल्यों की साझी विरासत से जुड़े हैं। गौरतलब है कि भारत मंगोलिया को 'तीसरे पड़ोसी' की नीति के तहत एक महत्वपूर्ण साझेदार मानता है।

दक्षिण कोरिया दौरे की तैयारी

विदेश मंत्रालय के अनुसार, जयशंकर 22 और 23 जून को मंगोलिया में रहने के बाद 24 और 25 जून को दक्षिण कोरिया की यात्रा करेंगे। वहाँ वे दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्युन से वार्ता करेंगे। इसके अलावा 25 जून को जेजू में आयोजित जेजू फोरम फॉर पीस एंड प्रॉस्पेरिटी में मुख्य भाषण देंगे। उल्लेखनीय है कि अप्रैल 2026 में दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग भारत का दौरा कर चुके हैं, और इस यात्रा में भारत-कोरिया संयुक्त रणनीतिक दृष्टिकोण के रोडमैप को आगे बढ़ाने पर चर्चा होने की उम्मीद है।

आम जनता और कूटनीति पर असर

खनन और स्वच्छ ऊर्जा में सहयोग के संभावित विस्तार से भारतीय कंपनियों को मंगोलिया के प्रचुर खनिज संसाधनों तक पहुँच मिल सकती है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी आपूर्ति श्रृंखला को विविध बनाने की कोशिश कर रहा है। कृषि प्रसंस्करण क्षेत्र में सहयोग दोनों देशों के किसानों और उद्यमियों के लिए नए बाज़ार खोल सकता है।

आगे की राह

इस यात्रा को द्विपक्षीय संबंधों में एक नई गति देने वाला कदम माना जा रहा है। दोनों देशों के बीच बहुपक्षीय मंचों पर समन्वय बढ़ाने की प्रतिबद्धता से संकेत मिलता है कि भारत की 'एक्ट ईस्ट' नीति में मंगोलिया की भूमिका आने वाले समय में और महत्वपूर्ण होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

तांबा व दुर्लभ खनिजों का विशाल भंडार है। लेकिन यात्रा की वास्तविक परीक्षा इरादों की घोषणाओं से नहीं, बल्कि ठोस निवेश समझौतों और परियोजना क्रियान्वयन की गति से होगी। भारत-मंगोलिया संबंध दशकों पुराने हैं, फिर भी व्यापार का आयतन उस क्षमता से बहुत कम है जो दोनों देश साझा करते हैं — यही वह अंतर है जिसे इस दौरे को पाटना होगा।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जयशंकर की मंगोलिया यात्रा का उद्देश्य क्या है?
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर 22-23 जून 2026 को उलानबातर में दो दिवसीय यात्रा पर हैं, जिसका मुख्य उद्देश्य भारत-मंगोलिया रणनीतिक साझेदारी को मज़बूत करना है। इस दौरान खनन, स्वच्छ ऊर्जा, शिक्षा और सुरक्षा क्षेत्रों में सहयोग के नए अवसरों पर चर्चा हुई।
जयशंकर ने मंगोलिया की विदेश मंत्री से किन विषयों पर बात की?
जयशंकर और मंगोलिया की विदेश मंत्री बत्सेत्सेग बटमुंख की बातचीत में विकास परियोजनाएँ, क्षमता निर्माण, संस्कृति, शिक्षा, सुरक्षा, बहुपक्षीय मंचों पर समन्वय तथा खनन, स्वच्छ ऊर्जा और कृषि प्रसंस्करण में नए अवसर शामिल रहे।
भारत और मंगोलिया के बीच राजनयिक संबंध कब शुरू हुए?
भारत और मंगोलिया के बीच राजनयिक संबंध 24 दिसंबर 1955 को स्थापित हुए। भारत ने 22 फरवरी 1971 को उलानबातर में अपना रेज़िडेंट मिशन खोला और दोनों देश सांस्कृतिक, आध्यात्मिक व लोकतांत्रिक मूल्यों की साझी विरासत से जुड़े हैं।
जयशंकर मंगोलिया के बाद कहाँ जाएँगे?
मंगोलिया यात्रा के बाद जयशंकर 24-25 जून 2026 को दक्षिण कोरिया जाएँगे। वहाँ वे दक्षिण कोरियाई विदेश मंत्री चो ह्युन से मिलेंगे और जेजू में आयोजित जेजू फोरम फॉर पीस एंड प्रॉस्पेरिटी में मुख्य भाषण देंगे।
यह यात्रा भारत-मंगोलिया संबंधों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
यह यात्रा 13 अक्टूबर 2025 को मंगोलियाई राष्ट्रपति खुरेलसुख उखना की भारत यात्रा के बाद हो रही है, जो दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संवाद की निरंतरता दर्शाती है। खनन और स्वच्छ ऊर्जा में सहयोग की संभावनाएँ भारत की आपूर्ति श्रृंखला विविधीकरण रणनीति के लिए रणनीतिक महत्व रखती हैं।
राष्ट्र प्रेस
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