पूर्व कोलकाता डीसीपी शांतनु सिन्हा बिस्वास पर ₹2.80 करोड़ भ्रष्टाचार का नया मामला, गरियाहाट थाने में शिकायत दर्ज
सारांश
मुख्य बातें
कोलकाता पुलिस के पूर्व डिप्टी कमिश्नर (डीसीपी) शांतनु सिन्हा बिस्वास के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत 16 सितंबर को दक्षिण कोलकाता के गरियाहाट थाने में एक नई शिकायत दर्ज की गई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि बिस्वास ने अपने पद का दुरुपयोग कर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से नकद व उपहारों के रूप में कुल ₹2.80 करोड़ का आर्थिक लाभ अर्जित किया। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब बिस्वास पहले से ही प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जाँच के तहत न्यायिक हिरासत में हैं।
शिकायत में लगाए गए प्रमुख आरोप
पुलिस के अनुसार, शिकायत में कई विशिष्ट आर्थिक अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है। आरोप है कि बिस्वास की पत्नी को एक निजी कंपनी से वेतन के रूप में ₹74.36 लाख प्राप्त हुए। इसके अतिरिक्त, उन्होंने कथित तौर पर गुप्त रूप से ₹82 लाख मूल्य के दो फ्लैट खरीदे।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि बिस्वास ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर अपने बेटे की कॉलेज फीस के लिए ₹20.27 लाख की निकासी करवाई। मुर्शिदाबाद जिले के कांदी क्षेत्र में एक मकान की मरम्मत के नाम पर कथित तौर पर ₹61 लाख प्राप्त किए गए।
इसके अलावा, विभिन्न संगठनों को लाभ पहुँचाने के बदले बिस्वास ने एक बार ₹10 लाख और दूसरी बार ₹15 लाख वसूले — ऐसा शिकायत में कहा गया है।
कारोबारी जॉय कामदार से जुड़े आरोप
नई शिकायत में गिरफ्तार कारोबारी जॉय कामदार का विशेष उल्लेख है। आरोप है कि बिस्वास ने कामदार से नकद और उपहारों के रूप में ₹13 लाख लिए। इसके अतिरिक्त, पत्नी के लिए उपहार खरीदने के नाम पर ₹2 लाख और वसूले जाने का आरोप शिकायत में दर्ज है।
गौरतलब है कि जॉय कामदार को भी इस मामले में आरोपी बनाया गया है और वह फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।
ईडी की पूर्व कार्रवाई और वर्तमान हिरासत
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इससे पहले बिस्वास को जमीन कब्जाने के एक अलग मामले में गिरफ्तार किया था। ईडी ने पिछले जुलाई में उनके खिलाफ ₹3 करोड़ के गबन का आरोप लगाते हुए आरोपपत्र दाखिल किया था। वर्तमान में बिस्वास पश्चिम मेदिनीपुर जिले के मिदनापुर केंद्रीय सुधारगृह में न्यायिक हिरासत में बंद हैं।
बिस्वास का नाम सोना पप्पू उर्फ बिश्वजीत पोद्दार के खिलाफ चल रही जमीन कब्जाने की जाँच के दौरान सामने आया था। ईडी सूत्रों के मुताबिक, इन तीनों — बिस्वास, कामदार और पोद्दार — ने कथित तौर पर अवैध तरीकों से जमीनों पर कब्जा किया और जमीन मालिकों को परेशान करने के लिए अपने प्रभाव का इस्तेमाल किया।
मामले का व्यापक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में पुलिस अधिकारियों से जुड़े भ्रष्टाचार के मामलों की जाँच कई एजेंसियों द्वारा एक साथ चल रही है। विभिन्न थानों में इस मामले से संबंधित शिकायतें पहले भी दर्ज कराई गई थीं, जो इस नेटवर्क की व्यापकता को दर्शाती हैं।
गरियाहाट थाने में दर्ज यह नई शिकायत मौजूदा ईडी मामले से अलग, स्थानीय पुलिस स्तर पर दर्ज की गई है — जो संकेत देती है कि बिस्वास के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कई मोर्चों पर एक साथ आगे बढ़ रही है।
आगे क्या होगा
गरियाहाट थाने में दर्ज शिकायत के आधार पर जाँच की दिशा तय होगी। तीनों आरोपी — शांतनु सिन्हा बिस्वास, जॉय कामदार, और बिश्वजीत पोद्दार — फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। ईडी की जाँच और अब स्थानीय पुलिस की शिकायत के साथ, मामला कानूनी रूप से और जटिल होने की संभावना है।