15 जुलाई 2026
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कोलकाता पुलिस के पूर्व डीसीपी शांतनु सिन्हा बिस्वास के खिलाफ ईडी की नई जांच, ट्रांसफर-पोस्टिंग 'फिक्सिंग' से करोड़ों कमाने का आरोप

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कोलकाता पुलिस के पूर्व डीसीपी शांतनु सिन्हा बिस्वास के खिलाफ ईडी की नई जांच, ट्रांसफर-पोस्टिंग 'फिक्सिंग' से करोड़ों कमाने का आरोप

सारांश

कोलकाता पुलिस के पूर्व डीसीपी शांतनु सिन्हा बिस्वास पर ईडी का शिकंजा और कसा — जमीन हड़पने की जांच के साथ-साथ अब ट्रांसफर-पोस्टिंग 'फिक्सिंग' से करोड़ों कमाने का अलग मामला भी सामने आया है। पीएमएलए कोर्ट में सप्लीमेंट्री चार्जशीट दायर, डिजिटल और बैंकिंग साक्ष्यों का विश्लेषण जारी।

मुख्य बातें

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कोलकाता पुलिस के पूर्व डीसीपी शांतनु सिन्हा बिस्वास के खिलाफ ट्रांसफर-पोस्टिंग 'फिक्सिंग' से अवैध कमाई के मामले में नई जांच शुरू की।
यह जांच पहले से चल रही जमीन हड़पने की जांच से अलग और स्वतंत्र है; पीएमएलए की विशेष अदालत में सप्लीमेंट्री चार्जशीट दायर की गई।
आरोप है कि सिन्हा बिस्वास ने सब-इंस्पेक्टर से लेकर असिस्टेंट कमिश्नर स्तर तक के अधिकारियों की तैनाती प्रभावित कर कमीशन वसूला।
ईडी की प्रारंभिक जांच के अनुसार, जमीन हड़पने के मामले में सिन्हा बिस्वास को व्यक्तिगत रूप से लगभग ₹3 करोड़ का लाभ हुआ।
जमीन माफिया बिस्वजीत पोद्दार उर्फ सोना पप्पू और रियल एस्टेट प्रमोटर जय कामदार के खिलाफ भी सप्लीमेंट्री चार्जशीट दायर।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कोलकाता पुलिस के पूर्व डिप्टी कमिश्नर (डीसीपी) शांतनु सिन्हा बिस्वास के विरुद्ध एक नई और अलग जांच शुरू की है, जिसमें आरोप है कि उन्होंने पुलिस बल में ट्रांसफर और पोस्टिंग 'फिक्स' करके करोड़ों रुपये का अवैध कमीशन अर्जित किया। यह जांच 15 जुलाई 2026 को उस समय सामने आई जब केंद्रीय एजेंसी ने पहले से चल रही जमीन हड़पने की जांच के समानांतर इस मामले में प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) की विशेष अदालत, कोलकाता में एक सप्लीमेंट्री चार्जशीट दायर की।

जांच की पृष्ठभूमि और नए आरोप

सूत्रों के अनुसार, ईडी को शिकायतें मिली थीं कि शांतनु सिन्हा बिस्वास ने सब-इंस्पेक्टर, इंस्पेक्टर और असिस्टेंट कमिश्नर स्तर के अधिकारियों की तैनाती और स्थानांतरण को प्रभावित किया। इन शिकायतों की जांच के बाद ईडी ने औपचारिक कार्यवाही शुरू की।

केंद्रीय एजेंसी के सूत्रों ने बताया कि इस मामले में जांच दो प्रमुख पहलुओं पर केंद्रित है। पहला — क्या सिन्हा बिस्वास ने अपने करीबी अधिकारियों को मनचाहे पुलिस थानों और पदों पर तैनात कराकर जमीन हड़पने और रियल एस्टेट सिंडिकेट पर अपनी पकड़ बनाई। दूसरा — इन पसंदीदा पोस्टिंग के बदले उन्होंने अपने जूनियर अधिकारियों से कितना कमीशन वसूला।

मुख्य आरोप और पूर्व जांच से संबंध

गौरतलब है कि पिछले सप्ताह ईडी ने शांतनु सिन्हा बिस्वास, जमीन माफिया बिस्वजीत पोद्दार उर्फ सोना पप्पू और रियल एस्टेट प्रमोटर जय कामदार के खिलाफ अवैध भूमि अधिग्रहण के मामलों में भी सप्लीमेंट्री चार्जशीट दायर की थी। ईडी का कहना है कि सिन्हा बिस्वास पर मुख्य आरोप यह है कि उन्होंने पूर्व डीसीपी के पद और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी होने के प्रभाव का दुरुपयोग करते हुए जमीन मालिकों पर दबाव डाला कि वे अपनी संपत्ति बाज़ार मूल्य से कहीं कम कीमत पर रियल एस्टेट डेवलपर्स को बेच दें।

ईडी की प्रारंभिक जांच के अनुसार, इस अवैध भूमि अधिग्रहण नेटवर्क से शांतनु सिन्हा बिस्वास को व्यक्तिगत रूप से लगभग ₹3 करोड़ का आर्थिक लाभ हुआ। सप्लीमेंट्री चार्जशीट में यह भी दावा किया गया है कि सोना पप्पू, जय कामदार और सिन्हा बिस्वास मिलकर भूमि हड़पने की साजिश रचते थे।

डिजिटल और दस्तावेज़ी साक्ष्य

ईडी के जांच अधिकारियों ने अब तक कई दस्तावेज़, बैंक लेनदेन के विवरण, डिजिटल साक्ष्य और बयान एकत्र कर लिए हैं। सूत्रों के अनुसार, इन साक्ष्यों का विश्लेषण कर पूरे नेटवर्क की कार्यप्रणाली को उजागर करने का प्रयास किया जा रहा है।

केंद्रीय एजेंसी के सूत्रों ने स्पष्ट किया कि इस मामले में केवल आर्थिक भ्रष्टाचार ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक अधिकार के दुरुपयोग का पहलू भी जांच के दायरे में है — जो इसे पुलिस व्यवस्था में संस्थागत भ्रष्टाचार का एक गंभीर मामला बनाता है।

आगे क्या होगा

यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में पुलिस प्रशासन और राजनीतिक संरक्षण के बीच संबंधों पर पहले से सवाल उठ रहे हैं। ईडी की दोहरी जांच — जमीन हड़पने और ट्रांसफर-पोस्टिंग भ्रष्टाचार, दोनों मोर्चों पर — यह संकेत देती है कि एजेंसी पूरे नेटवर्क को एक साथ उजागर करने की रणनीति पर काम कर रही है। आने वाले हफ्तों में अदालत में अगली सुनवाई और संभावित गिरफ्तारी पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

राजनीतिक संरक्षण और रियल एस्टेट माफिया एक-दूसरे के हित साधते हैं। असली सवाल यह है कि क्या ईडी की जांच केवल एक अधिकारी तक सीमित रहेगी, या यह उस पूरे तंत्र को उजागर करेगी जिसने वर्षों तक इस सिंडिकेट को संरक्षण दिया। पश्चिम बंगाल में पुलिस-राजनीति-माफिया के गठजोड़ पर पहले भी सवाल उठते रहे हैं, लेकिन जवाबदेही शायद ही कभी ऊपर तक पहुँची हो। बिना व्यापक संस्थागत सुधार के, इस तरह की जांचें महज़ व्यक्तिगत दंड तक सिमटकर रह जाती हैं।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शांतनु सिन्हा बिस्वास के खिलाफ ईडी की नई जांच किस बारे में है?
ईडी ने कोलकाता पुलिस के पूर्व डीसीपी शांतनु सिन्हा बिस्वास के खिलाफ ट्रांसफर और पोस्टिंग 'फिक्स' करके अवैध कमीशन अर्जित करने के आरोप में एक अलग जांच शुरू की है। यह जांच पहले से चल रही जमीन हड़पने की जांच के अतिरिक्त है।
ईडी ने इस मामले में क्या कार्रवाई की है?
ईडी ने कोलकाता में पीएमएलए की विशेष अदालत में शांतनु सिन्हा बिस्वास, बिस्वजीत पोद्दार उर्फ सोना पप्पू और जय कामदार के खिलाफ सप्लीमेंट्री चार्जशीट दायर की है। एजेंसी ने दस्तावेज़, बैंक लेनदेन विवरण और डिजिटल साक्ष्य भी एकत्र कर लिए हैं।
जमीन हड़पने के मामले में शांतनु सिन्हा बिस्वास पर क्या आरोप है?
ईडी के अनुसार, सिन्हा बिस्वास ने अपने पद और राजनीतिक प्रभाव का दुरुपयोग कर संपत्ति मालिकों पर दबाव डाला कि वे अपनी जमीन बाज़ार मूल्य से कम कीमत पर रियल एस्टेट डेवलपर्स को बेचें। प्रारंभिक जांच में उन्हें इस नेटवर्क से व्यक्तिगत रूप से लगभग ₹3 करोड़ का लाभ हुआ बताया गया है।
ट्रांसफर-पोस्टिंग 'फिक्सिंग' जांच के दो प्रमुख पहलू क्या हैं?
ईडी दो कोणों से जांच कर रही है — पहला, क्या पसंदीदा पोस्टिंग देकर सिन्हा बिस्वास ने जमीन हड़पने के सिंडिकेट पर नियंत्रण बनाए रखा; दूसरा, जूनियर अधिकारियों को फायदेमंद तैनाती दिलाने के बदले उन्होंने कितना कमीशन वसूला।
इस मामले में ममता बनर्जी का नाम क्यों आया है?
ईडी के अनुसार, सिन्हा बिस्वास पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी माने जाते थे और कथित तौर पर इस राजनीतिक निकटता का उपयोग अपने प्रभाव को बढ़ाने के लिए किया गया। हालांकि, ईडी ने अभी तक ममता बनर्जी को सीधे आरोपी नहीं बनाया है।
राष्ट्र प्रेस
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