भारत-यूके एफटीए लागू: 99% निर्यात पर जीरो ड्यूटी, नैसकॉम और फिक्की ने बताया 'विकसित भारत' की दिशा में बड़ा कदम
सारांश
मुख्य बातें
भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) और सामाजिक सुरक्षा समझौता औपचारिक रूप से लागू हो चुके हैं, जिसके तहत भारत के लगभग 99 प्रतिशत निर्यात को ब्रिटेन में शून्य शुल्क पर बाज़ार पहुँच मिलेगी — यह व्यवस्था दोनों देशों के करीब 100 प्रतिशत व्यापार मूल्य को कवर करती है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बुधवार, 15 जुलाई को यह जानकारी दी। सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग संगठन नैसकॉम और उद्योग मंडल फिक्की (FICCI) ने इस समझौते को 'विकसित भारत' के लक्ष्य की दिशा में निर्णायक कदम बताते हुए इसका स्वागत किया है।
समझौते में क्या है खास
इस व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (सीईटीए) के साथ-साथ डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन (डीसीसी) भी लागू हुआ है। डीसीसी के तहत ब्रिटेन में अल्पकालिक नियुक्ति पर जाने वाले भारतीय पेशेवरों को अब पाँच वर्ष तक यूके में सामाजिक सुरक्षा अंशदान देने की आवश्यकता नहीं होगी। वे इस पूरी अवधि में भारत में ही अपना सामाजिक सुरक्षा योगदान जारी रख सकेंगे, जिससे उनकी कुल लागत में उल्लेखनीय कमी आएगी।
नैसकॉम के अनुसार, डीसीसी को भारत सरकार के सहयोग से अंतिम रूप दिया गया है। यह व्यवस्था विशेष रूप से आईटी और प्रौद्योगिकी क्षेत्र के उन पेशेवरों के लिए महत्वपूर्ण है जो परियोजना-आधारित कार्य के लिए ब्रिटेन जाते हैं।
नैसकॉम की भूमिका और यूके फोरम
नैसकॉम ने इस सहयोग को संस्थागत रूप देने के लिए नवंबर 2025 में नैसकॉम यूके फोरम की स्थापना की थी, जिसमें ब्रिटेन में महत्वपूर्ण निवेश करने वाली प्रमुख भारतीय प्रौद्योगिकी कंपनियों को एक मंच पर लाया गया। यह फोरम इंडिया-यूके टेक्नोलॉजी सिक्योरिटी इनिशिएटिव और विजन 2035 रोडमैप को आगे बढ़ाने के साथ-साथ दोनों देशों की सरकारों, नीति-निर्माताओं और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र के बीच सहयोग बढ़ाने का काम करेगा।
नैसकॉम यूके फोरम के चेयरमैन मनीष मल्होत्रा ने बताया कि केवल प्रमुख भारतीय प्रौद्योगिकी कंपनियों का एक समूह ब्रिटेन में 35,000 से अधिक नौकरियों का समर्थन करता है। उन्होंने कहा कि इनमें से लगभग 62 प्रतिशत कर्मचारी लंदन के बाहर कार्यरत हैं, जिससे क्षेत्रीय विकास, स्थानीय प्रतिभा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) क्षमता निर्माण को भी बल मिल रहा है।
उद्योग जगत की प्रतिक्रिया
नैसकॉम के अध्यक्ष राजेश नांबियार ने कहा कि प्रौद्योगिकी आर्थिक विकास की प्रमुख ताकत बनती जा रही है। उन्होंने कहा कि नैसकॉम दोनों देशों की सरकारों और उद्योग जगत के साथ मिलकर इस समझौते को व्यापार, निवेश, नवाचार और प्रतिभा सहयोग के ठोस परिणामों में बदलने के लिए प्रतिबद्ध है।
फिक्की के अध्यक्ष अनंत गोयनका ने इस समझौते को 'ऐतिहासिक' बताते हुए कहा कि यह 'विकसित भारत' के विजन को मजबूती देता है और देश की सतत आर्थिक वृद्धि, वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता तथा अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों के साथ गहरे आर्थिक जुड़ाव की आकांक्षाओं को नई दिशा देगा। गौरतलब है कि यह समझौता ऐसे समय में लागू हुआ है जब भारत अपनी अर्थव्यवस्था को वैश्विक स्तर पर और अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।
डिजिटल व्यापार और नवाचार पर असर
नैसकॉम यूके फोरम का मुख्य ध्यान भारत और ब्रिटेन के बीच डिजिटल व्यापार को मज़बूत करने पर रहेगा। मल्होत्रा ने कहा कि भारत और ब्रिटेन के बीच प्रौद्योगिकी साझेदारी अब विकास के नए चरण में प्रवेश कर रही है और यह फोरम उद्योग व सरकार को मिलकर इस रणनीतिक साझेदारी का भविष्य तय करने के लिए दीर्घकालिक मंच उपलब्ध कराएगा। फिक्की के अनुसार, यह समझौता आर्थिक सहयोग के दूरदर्शी दृष्टिकोण को दर्शाता है और भारत की समृद्धि, नवाचार तथा आर्थिक परिवर्तन की यात्रा को नई गति प्रदान करेगा।
आगे क्या होगा
समझौते के लागू होने के बाद अब क्रियान्वयन की प्रक्रिया शुरू होगी, जिसमें दोनों देशों के नीति-निर्माताओं और उद्योग संगठनों की सक्रिय भूमिका अपेक्षित है। नैसकॉम यूके फोरम इस दिशा में उद्योग और सरकार के बीच सेतु का काम करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि डीसीसी और एफटीए के प्रावधानों को प्रभावी ढंग से लागू किया गया, तो भारतीय आईटी और प्रौद्योगिकी क्षेत्र को ब्रिटेन में अपनी उपस्थिति और विस्तार करने का सुनहरा अवसर मिलेगा।