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भारत-यूके एफटीए 15 जुलाई से लागू, कारोबारियों की मदद को 1,000 सलाहकार नियुक्त करेगी सरकार

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भारत-यूके एफटीए 15 जुलाई से लागू, कारोबारियों की मदद को 1,000 सलाहकार नियुक्त करेगी सरकार

सारांश

भारत-यूके एफटीए 15 जुलाई से लागू होगा — और इस बार सरकार ने सिर्फ समझौता नहीं किया, बल्कि 1,000 सलाहकारों का पूरा नेटवर्क खड़ा करने की योजना बनाई है। 25.5 बिलियन पाउंड के अतिरिक्त व्यापार का लक्ष्य और टियर-2 शहरों तक पहुँच — यह भारत के व्यापारिक इतिहास का एक नया अध्याय है।

मुख्य बातें

भारत-यूके एफटीए (सीईटीए) 15 जुलाई 2026 से प्रभावी होगा।
कारोबारियों की सहायता के लिए पूरे देश में 1,000 सलाहकार नियुक्त किए जाएंगे और व्यापार पोर्टल को उन्नत किया जाएगा।
समझौते से दोनों देशों के बीच सालाना 25.5 बिलियन पाउंड के अतिरिक्त व्यापार की उम्मीद।
ब्रिटेन में कार्यरत भारतीय पेशेवरों को 5 वर्ष तक सोशल सिक्योरिटी योगदान से छूट मिलेगी।
व्यापार प्रतिनिधिमंडल में टियर-2 और टियर-3 शहरों की कंपनियाँ व पहली बार निर्यात करने वाले कारोबारी शामिल।
बर्मिंघम-गुजरात और मैनचेस्टर-महाराष्ट्र जैसी शहर-स्तरीय साझेदारियों को प्रोत्साहन।

वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 26 जून 2026 को लंदन में घोषणा की कि भारत-यूके फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) का लाभ देश के हर कारोबारी तक पहुँचाने के लिए पूरे भारत में 1,000 सलाहकार नियुक्त किए जाएंगे। यह ऐतिहासिक व्यापार समझौता 15 जुलाई 2026 से प्रभावी होगा और इससे दोनों देशों के बीच सालाना लगभग 25.5 बिलियन पाउंड के अतिरिक्त कारोबार की उम्मीद है।

समझौते की मुख्य विशेषताएँ

भारत-यूके कॉम्प्रिहेन्सिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट (सीईटीए) के तहत माल, सेवाओं और निवेश के क्षेत्र में नए अवसर खुलेंगे। मंत्रालय के बयान के अनुसार, 1,000 सलाहकारों की नियुक्ति के साथ-साथ व्यापार से जुड़े ऑनलाइन पोर्टल को भी उन्नत किया जाएगा, ताकि छोटे और मध्यम कारोबारी भी इस समझौते का पूरा फायदा उठा सकें।

गोयल ने 10वें वार्षिक यूके-इंडिया वीक के दौरान इंडिया ग्लोबल फोरम (आईजीएफ) कैपिटल फ्रंटियर्स फोरम को संबोधित करते हुए कहा कि भारत-ब्रिटेन साझेदारी अब केवल व्यापार तक सीमित नहीं रही — दोनों देश अब टेक्नोलॉजी, सॉवरेन एआई, महत्वपूर्ण खनिज, रक्षा और स्वच्छ ऊर्जा जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में भी सहयोग कर रहे हैं।

भारतीय पेशेवरों को विशेष लाभ

सीईटीए के तहत ब्रिटेन में कार्यरत योग्य भारतीय पेशेवरों को पाँच वर्ष तक सोशल सिक्योरिटी योगदान से छूट मिलेगी। इस प्रकार बचाई गई राशि वे भारत में अपने टैक्स-फ्री भविष्य निधि (पीएफ) खाते में जमा कर सकेंगे — जो ब्याज-सहित लाभ देता है। यह प्रावधान उन लाखों भारतीय पेशेवरों के लिए सीधी आर्थिक राहत है जो ब्रिटेन में कार्यरत हैं।

टियर-2 और टियर-3 शहरों पर विशेष ध्यान

भारतीय उच्चायोग और फिक्की (FICCI) की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में मंत्री गोयल ने ब्रिटेन पहुँचे भारतीय व्यापार प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया। उन्होंने बताया कि यह अब तक का सबसे बड़ा और सर्वाधिक विविध भारतीय व्यापारिक दल है, जिसमें टियर-2 और टियर-3 शहरों की कंपनियाँ और पहली बार निर्यात करने वाले कारोबारी भी शामिल हैं। यह तथ्य इस बात का संकेत है कि एफटीए का लाभ केवल महानगरों तक नहीं, बल्कि छोटे शहरों तक पहुँचाने की मंशा है।

मंत्री ने बर्मिंघम-गुजरात और मैनचेस्टर-महाराष्ट्र जैसी शहर-स्तरीय साझेदारियों का उदाहरण देते हुए कहा कि इस प्रकार के क्षेत्रीय सहयोग दोनों देशों के दीर्घकालिक विकास में अहम भूमिका निभाएंगे।

व्यापार जगत के लिए संदेश

गोयल ने कारोबारियों से अपील की कि वे 'ब्रांड इंडिया' को पूरे आत्मविश्वास के साथ वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करें और भारत की मैन्युफैक्चरिंग, सेवाओं व नवाचार की ताकत का लाभ उठाते हुए ब्रिटेन की कंपनियों के साथ दीर्घकालिक साझेदारियाँ स्थापित करें। उन्होंने कहा कि भारत आज विश्व की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है और यह समझौता उस विकास यात्रा को नई गति देगा।

आगे की राह

समझौते के 15 जुलाई 2026 से लागू होने के साथ ही सलाहकार नेटवर्क और उन्नत ऑनलाइन पोर्टल की तैयारियाँ तेज़ की जा रही हैं। यह ऐसे समय में आया है जब भारत कई देशों के साथ एफटीए वार्ताओं में सक्रिय है और ब्रिटेन के साथ यह समझौता उस कूटनीतिक प्रयास की सबसे बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। आने वाले हफ्तों में क्षेत्रवार क्रियान्वयन दिशानिर्देश जारी होने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन की होगी। 1,000 सलाहकारों की नियुक्ति एक सकारात्मक कदम है, परंतु यह सवाल बना रहेगा कि इन सलाहकारों की गुणवत्ता, प्रशिक्षण और जवाबदेही तय कैसे होगी। टियर-2 और टियर-3 शहरों के कारोबारियों को शामिल करने की मंशा सराहनीय है, किंतु इन शहरों में निर्यात-तैयारी की क्षमता, बुनियादी ढाँचे और जागरूकता की जो खाई है, उसे पाटे बिना 25.5 बिलियन पाउंड का लक्ष्य कागज़ी ही रह सकता है। भारत के पिछले व्यापार समझौतों — जैसे आसियान एफटीए — के अनुभव बताते हैं कि बिना मज़बूत घरेलू तैयारी के ऐसे समझौते अक्सर आयात बढ़ाते हैं, निर्यात नहीं।
RashtraPress
27 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत-यूके एफटीए (सीईटीए) कब से लागू होगा?
भारत-यूके कॉम्प्रिहेन्सिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट (सीईटीए) 15 जुलाई 2026 से प्रभावी होगा। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने 26 जून 2026 को लंदन में इसकी पुष्टि की।
भारत-यूके एफटीए से कारोबारियों को कितना फायदा होगा?
समझौते से दोनों देशों के बीच सालाना लगभग 25.5 बिलियन पाउंड के अतिरिक्त व्यापार की उम्मीद है। इसके अलावा माल, सेवाओं, निवेश और पेशेवरों की आवाजाही में नए अवसर खुलेंगे।
1,000 सलाहकार क्या काम करेंगे?
ये सलाहकार पूरे भारत में कारोबारियों — विशेषकर टियर-2 और टियर-3 शहरों के — को एफटीए के प्रावधानों, निर्यात प्रक्रियाओं और नए बाज़ारों तक पहुँच के बारे में मार्गदर्शन देंगे। साथ ही व्यापार पोर्टल को भी बेहतर बनाया जाएगा।
ब्रिटेन में काम करने वाले भारतीय पेशेवरों को क्या लाभ मिलेगा?
सीईटीए के तहत ब्रिटेन में कार्यरत योग्य भारतीय पेशेवरों को पाँच वर्ष तक सोशल सिक्योरिटी योगदान से छूट मिलेगी। बचाई गई यह राशि वे भारत में अपने टैक्स-फ्री और ब्याज-सहित भविष्य निधि (पीएफ) खाते में जमा कर सकेंगे।
भारत-यूके साझेदारी में व्यापार के अलावा और कौन-से क्षेत्र शामिल हैं?
पीयूष गोयल के अनुसार, दोनों देश अब टेक्नोलॉजी, सॉवरेन एआई, महत्वपूर्ण खनिज, रक्षा और स्वच्छ ऊर्जा जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में भी सहयोग कर रहे हैं। बर्मिंघम-गुजरात और मैनचेस्टर-महाराष्ट्र जैसी शहर-स्तरीय साझेदारियाँ भी इस विस्तारित सहयोग का हिस्सा हैं।
राष्ट्र प्रेस
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