भारत-न्यूजीलैंड एफटीए: जयशंकर ने 'ऐतिहासिक' बताया, 100%25 वस्तु निर्यात पर जीरो ड्यूटी लागू होगी
सारांश
Key Takeaways
- विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 27 अप्रैल 2026 को भारत-न्यूजीलैंड एफटीए को 'ऐतिहासिक' बताया।
- लागू होते ही भारत के 100%25 वस्तु निर्यात पर शून्य शुल्क (जीरो ड्यूटी) लागू होगी।
- भारतीय कुशल पेशेवरों के लिए 5,000 अस्थायी रोजगार प्रवेश वीजा, वैधता 3 वर्ष तक।
- 118 सेवा क्षेत्रों में बाजार पहुँच और 139 सेवा उप-क्षेत्रों में 'मोस्ट फेवर्ड नेशन' का दर्जा।
- कृषि, टेक्सटाइल, फार्मास्यूटिकल्स, एमएसएमई और आईटी सेवाओं को सबसे अधिक लाभ मिलने की उम्मीद।
- यह भारत का यूएई और ऑस्ट्रेलिया के बाद प्रमुख एफटीए साझेदारों के विस्तार का हिस्सा है।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 27 अप्रैल 2026 को भारत और न्यूजीलैंड के बीच संपन्न हुए मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को द्विपक्षीय संबंधों के लिए 'ऐतिहासिक' करार दिया। इस समझौते के तहत लागू होते ही भारत के 100 प्रतिशत वस्तु निर्यात पर शून्य शुल्क (जीरो ड्यूटी) लागू होगी, जो भारतीय निर्यातकों के लिए एक बड़ी राहत है। जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस समझौते से मिलने वाले लाभों को रेखांकित किया।
समझौते की मुख्य विशेषताएँ
जयशंकर ने कहा, "यह समझौता केवल व्यापारिक लेन-देन तक सीमित नहीं है, बल्कि दोनों देशों के बीच व्यापक आर्थिक सहयोग, रणनीतिक विश्वास और भविष्य की साझेदारी के नए आयाम खोलता है।" समझौते के तहत सभी टैरिफ लाइनों पर शुल्क समाप्त होगी, जिससे व्यापारिक प्रक्रियाएँ अधिक सरल और पारदर्शी बनेंगी। निर्यात को बढ़ावा देने के लिए विदेशी व्यापार नीति के अंतर्गत फास्ट-ट्रैक मैकेनिज्म भी लागू किया जाएगा।
किन क्षेत्रों को मिलेगा लाभ
भारतीय उत्पाद—विशेषकर कृषि, टेक्सटाइल, फार्मास्यूटिकल्स और आईटी सेवाएँ—न्यूजीलैंड के बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति में होंगे। वहीं, न्यूजीलैंड के डेयरी, कृषि और शिक्षा क्षेत्र को भारत में नए अवसर मिलेंगे। श्रम-प्रधान उद्योगों—जैसे टेक्सटाइल, अपैरल, लेदर और फुटवियर—के साथ-साथ ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी और फार्मास्यूटिकल्स क्षेत्र में भी निवेश और उत्पादन बढ़ने की उम्मीद है। गौरतलब है कि कृषि उत्पादों—जैसे फल, सब्जियाँ, कॉफी, मसाले और अनाज—को नए बाजार मिलने से किसानों की आय में वृद्धि की संभावना है।
किसान, एमएसएमई और युवाओं पर असर
यह समझौता किसानों, एमएसएमई, कारीगरों, महिलाओं और युवाओं के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) को वैश्विक सप्लाई चेन से जुड़ने का अवसर मिलेगा। महिला और युवा उद्यमियों के लिए एसएमई सहयोग, इनक्यूबेटर, एक्सेलेरेटर और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से वैश्विक बाजार तक पहुँचने के नए रास्ते खुलेंगे।
सेवा क्षेत्र और रोजगार के अवसर
सेवा क्षेत्र में यह एफटीए नए आयाम खोलेगा। आईटी-आईटीईएस, वित्त, शिक्षा, पर्यटन और ऑडियो-विजुअल सेक्टर में सहयोग बढ़ेगा। समझौते के तहत भारतीय कुशल पेशेवरों के लिए 5,000 'अस्थायी रोजगार प्रवेश वीजा' उपलब्ध होंगे, जिनकी वैधता 3 वर्षों तक हो सकती है। इसके अलावा, 118 सेवा क्षेत्रों में बाजार पहुँच और लगभग 139 सेवा उप-क्षेत्रों में 'मोस्ट फेवर्ड नेशन' का दर्जा भारत के सेवा निर्यात को नई ऊँचाइयों तक ले जा सकता है।
आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपने व्यापारिक साझेदारों के नेटवर्क का विस्तार करने की रणनीति पर काम कर रहा है। भारत पहले ही यूएई और ऑस्ट्रेलिया के साथ एफटीए संपन्न कर चुका है, और न्यूजीलैंड के साथ यह समझौता उस कड़ी में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस समझौते का पूरा लाभ तभी मिलेगा जब क्रियान्वयन तंत्र मजबूत हो और घरेलू उद्योग को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार किया जाए।