ईडी की गिरफ्तारी के बाद कोलकाता पुलिस के डिप्टी कमिश्नर शांतनु सिन्हा बिस्वास बर्खास्त, 12 और पुलिसकर्मी जांच के घेरे में

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ईडी की गिरफ्तारी के बाद कोलकाता पुलिस के डिप्टी कमिश्नर शांतनु सिन्हा बिस्वास बर्खास्त, 12 और पुलिसकर्मी जांच के घेरे में

सारांश

कोलकाता पुलिस के डिप्टी कमिश्नर शांतनु सिन्हा बिस्वास की ईडी द्वारा गिरफ्तारी के बाद पश्चिम बंगाल की नई BJP सरकार ने उन्हें बिना इस्तीफे का मौका दिए सीधे बर्खास्त कर दिया। मनी लॉन्ड्रिंग और जमीन सिंडिकेट मामले में अब 12 और पुलिसकर्मी ईडी के रडार पर हैं।

मुख्य बातें

पश्चिम बंगाल सरकार ने 16 मई 2026 को कोलकाता पुलिस के डिप्टी कमिश्नर शांतनु सिन्हा बिस्वास का सेवा विस्तार तत्काल प्रभाव से समाप्त किया।
सिन्हा बिस्वास को इस्तीफे का अवसर नहीं दिया गया — राज्य सचिवालय 'नबन्ना' के सूत्रों के अनुसार यह असामान्य कदम है।
ईडी ने गिरफ्तारी से पहले करीब 10 घंटे पूछताछ की; पहले लुकआउट नोटिस भी जारी हो चुका था।
आरोप: बिस्वजीत पोद्दार उर्फ 'सोना पप्पू' और जॉय कामदार के साथ मिलकर कोलकाता में जमीन सिंडिकेट चलाया; फर्जी एफआईआर से मालिकों पर दबाव बनाया जाता था।
कोलकाता पुलिस के 12 अन्य पुलिसकर्मी (अधिकांश इंस्पेक्टर व सब-इंस्पेक्टर रैंक) अब ईडी की जांच के दायरे में।

पश्चिम बंगाल की नई सरकार ने 16 मई 2026 को कोलकाता पुलिस के डिप्टी कमिश्नर शांतनु सिन्हा बिस्वास का सेवा विस्तार तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया — यह कदम प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा मनी लॉन्ड्रिंग और जमीन सिंडिकेट मामले में उनकी गिरफ्तारी के ठीक बाद उठाया गया। राज्य सचिवालय 'नबन्ना' के सूत्रों के अनुसार, सिन्हा बिस्वास को अन्य अधिकारियों की तरह इस्तीफा देने का अवसर नहीं दिया गया — सरकार ने सीधे उनकी सेवाएं समाप्त कर दीं।

मामले की पृष्ठभूमि

शांतनु सिन्हा बिस्वास उन अधिकारियों में शामिल थे, जिन्हें पूर्ववर्ती ममता बनर्जी सरकार ने दो वर्ष का सेवा विस्तार दिया था। पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) की नई सरकार ने उनके खिलाफ कार्रवाई में तेजी लाई। ईडी ने कई नोटिस जारी किए, लेकिन सिन्हा बिस्वास फरार हो गए, जिसके बाद एजेंसी ने उनके विरुद्ध लुकआउट नोटिस जारी किया था।

गुरुवार रात गिरफ्तारी से पहले ईडी अधिकारियों ने उनसे करीब 10 घंटे तक पूछताछ की। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में पुलिस-अपराध गठजोड़ की जांच केंद्रीय एजेंसियों की प्राथमिकता बन चुकी है।

सिंडिकेट का कथित तंत्र

जांच के अनुसार, शांतनु सिन्हा बिस्वास, कुख्यात और फिलहाल फरार 'हिस्ट्री-शीटर' बिस्वजीत पोद्दार उर्फ 'सोना पप्पू' और गिरफ्तार रियल एस्टेट कारोबारी जॉय कामदार के बीच एक कथित गठजोड़ संचालित था। आरोप है कि यह गिरोह कोलकाता और आसपास के इलाकों में विवादित जमीनों व संपत्तियों को बेहद कम कीमत पर हासिल करता था और बाद में उन्हें मुनाफे वाले रियल एस्टेट कारोबार में खपाता था।

इस सिंडिकेट पर आरोप है कि असली जमीन मालिकों को दबाव में लाने के लिए विभिन्न पुलिस थानों में उनके खिलाफ फर्जी एफआईआर दर्ज करवाई जाती थीं, ताकि वे अपनी संपत्ति औने-पौने दाम पर बेचने पर मजबूर हो जाएं।

12 और पुलिसकर्मी ईडी के रडार पर

घटनाक्रम से परिचित सूत्रों के अनुसार, कोलकाता पुलिस के 12 अन्य पुलिसकर्मी — जो सिन्हा बिस्वास के सेवाकाल के दौरान उनके करीबी विश्वासपात्र माने जाते थे — अब ईडी की जांच के दायरे में हैं। इन पर उसी मनी लॉन्ड्रिंग और जमीन सिंडिकेट मामले में शामिल होने का आरोप है। जानकारी के मुताबिक, ये अधिकारी अधिकांशतः इंस्पेक्टर और सब-इंस्पेक्टर रैंक के हैं।

सरकार की प्रतिक्रिया और आगे की राह

नबन्ना सूत्रों के अनुसार, सिन्हा बिस्वास के मामले को अन्य सेवा-विस्तार प्राप्त अधिकारियों से अलग रखा गया — उन्हें इस्तीफे का विकल्प दिए बिना सीधे बर्खास्त किया गया, जो इस मामले की गंभीरता को रेखांकित करता है। गौरतलब है कि यह पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद पुलिस महकमे में की गई सबसे बड़ी प्रत्यक्ष कार्रवाइयों में से एक है। ईडी की जांच का दायरा बढ़ने के संकेतों के बीच आने वाले हफ्तों में और गिरफ्तारियों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि संस्थागत विफलता का मामला है।
RashtraPress
16 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शांतनु सिन्हा बिस्वास कौन हैं और उन्हें क्यों गिरफ्तार किया गया?
शांतनु सिन्हा बिस्वास कोलकाता पुलिस के डिप्टी कमिश्नर थे, जिन्हें प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मनी लॉन्ड्रिंग और जमीन सिंडिकेट मामले में गिरफ्तार किया। आरोप है कि वे 'सोना पप्पू' और रियल एस्टेट कारोबारी जॉय कामदार के साथ मिलकर कोलकाता में जमीन हड़पने का सिंडिकेट चला रहे थे।
पश्चिम बंगाल सरकार ने सिन्हा बिस्वास की सेवाएं कैसे समाप्त कीं?
राज्य सचिवालय 'नबन्ना' के सूत्रों के अनुसार, सरकार ने सिन्हा बिस्वास को इस्तीफा देने का अवसर दिए बिना सीधे उनका सेवा विस्तार समाप्त कर दिया। यह अन्य सेवा-विस्तार प्राप्त अधिकारियों से अलग व्यवहार है।
जमीन सिंडिकेट कैसे काम करता था?
आरोपों के अनुसार, यह गिरोह असली जमीन मालिकों के खिलाफ अलग-अलग पुलिस थानों में फर्जी एफआईआर दर्ज करवाता था ताकि वे दबाव में अपनी संपत्ति बेहद कम कीमत पर बेचने पर मजबूर हों। इन संपत्तियों को बाद में मुनाफे वाले रियल एस्टेट कारोबार में इस्तेमाल किया जाता था।
ईडी की जांच के दायरे में कौन-से 12 पुलिसकर्मी हैं?
सूत्रों के अनुसार, ये 12 पुलिसकर्मी अधिकांशतः इंस्पेक्टर और सब-इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारी हैं, जो सिन्हा बिस्वास के सेवाकाल में उनके करीबी विश्वासपात्र माने जाते थे। इन पर उसी मनी लॉन्ड्रिंग और जमीन सिंडिकेट मामले में संलिप्तता का आरोप है।
इस मामले में 'सोना पप्पू' कौन है?
'सोना पप्पू' कुख्यात हिस्ट्री-शीटर बिस्वजीत पोद्दार का उपनाम है, जो फिलहाल फरार है। ईडी की जांच में वह इस जमीन सिंडिकेट का प्रमुख सूत्रधार बताया जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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