कोलकाता पुलिस के डीसीपी शांतनु सिन्हा बिस्वास गिरफ्तार: ईडी ने साढ़े 10 घंटे की पूछताछ के बाद की कार्रवाई

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कोलकाता पुलिस के डीसीपी शांतनु सिन्हा बिस्वास गिरफ्तार: ईडी ने साढ़े 10 घंटे की पूछताछ के बाद की कार्रवाई

सारांश

कोलकाता पुलिस के उपायुक्त शांतनु सिन्हा बिस्वास की गिरफ्तारी महज एक अधिकारी की नहीं — यह पश्चिम बंगाल में पुलिस और आपराधिक सिंडिकेट के कथित गठजोड़ की जांच का नया अध्याय है। बार-बार समन की अनदेखी और लुकआउट नोटिस के बाद ईडी की यह कार्रवाई संकेत देती है कि जांच का दायरा और गहरा होने वाला है।

मुख्य बातें

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 14 मई 2026 को कोलकाता पुलिस के डीसीपी शांतनु सिन्हा बिस्वास को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया।
सीजीओ कॉम्प्लेक्स, कोलकाता में साढ़े 10 घंटे से अधिक की पूछताछ के बाद रात 9:30 बजे गिरफ्तारी हुई।
मामला कथित आपराधिक सिंडिकेट संचालक सोना पप्पू उर्फ बिस्वजीत पोद्दार से जुड़ा है; शांतनु कालीघाट पुलिस स्टेशन के पूर्व इंचार्ज रहे हैं।
शांतनु ने ईडी के कई समन नज़रअंदाज़ किए थे; एजेंसी ने उनके खिलाफ लुकआउट नोटिस भी जारी किया था।
कारोबारी जॉय कामदार से बरामद दस्तावेज़ों में शांतनु का नाम जुड़ा; कामदार इसी मामले में पहले गिरफ्तार हो चुके हैं।
शांतनु को शुक्रवार को न्यायालय में पेश किया जाएगा।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 14 मई 2026 को कोलकाता पुलिस के उपायुक्त (डीसीपी) शांतनु सिन्हा बिस्वास को मनी लॉन्ड्रिंग के एक बड़े मामले में गिरफ्तार किया। कोलकाता के सीजीओ कॉम्प्लेक्स में सुबह से शुरू हुई पूछताछ साढ़े 10 घंटे से अधिक चली, जिसके बाद रात करीब 9:30 बजे IST उन्हें हिरासत में लिया गया। उन्हें शुक्रवार को न्यायालय में पेश किया जाएगा।

मामले की पृष्ठभूमि

यह गिरफ्तारी कथित आपराधिक सिंडिकेट संचालक सोना पप्पू उर्फ बिस्वजीत पोद्दार से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के तहत हुई है। शांतनु सिन्हा बिस्वास कालीघाट पुलिस स्टेशन के पूर्व इंचार्ज रह चुके हैं। जांचकर्ताओं के अनुसार, उनसे जुड़े कुछ वित्तीय लेन-देन में सोना पप्पू और उसके करीबी सहयोगियों का हाथ होने के संकेत मिले हैं।

बार-बार समन की अनदेखी

ईडी ने इससे पहले शांतनु बिस्वास को कई बार समन भेजे थे, जिन्हें उन्होंने बार-बार नज़रअंदाज़ किया। एजेंसी ने उनके खिलाफ लुकआउट नोटिस भी जारी किया था ताकि वे देश छोड़कर न जा सकें। सूत्रों के अनुसार, उन्होंने सरकारी कामों में व्यस्तता का हवाला देते हुए केंद्रीय एजेंसी से अतिरिक्त समय माँगा था। अंततः वे गुरुवार को ईडी कार्यालय में उपस्थित हुए।

छापेमारी और दस्तावेज़ी सुराग

पिछले महीने ईडी ने फर्न रोड स्थित शांतनु बिस्वास के आवास पर छापा मारा था। यह तलाशी अभियान सुबह-सुबह शुरू होकर रात करीब 2 बजे तक चला। छापेमारी के दौरान शांतनु सार्वजनिक रूप से कहीं नज़र नहीं आए। तलाशी के एक दिन बाद ईडी ने शांतनु बिस्वास और उनके दोनों बेटों — सायंतान और मनीष — को सीजीओ कॉम्प्लेक्स में तलब किया, लेकिन उस दिन उनमें से कोई भी एजेंसी के सामने पेश नहीं हुआ।

जॉय कामदार से संबंध

जांचकर्ताओं को शांतनु बिस्वास का संबंध उन दस्तावेज़ों से भी मिला जो कारोबारी जॉय कामदार से बरामद हुए थे। जॉय कामदार को इसी मामले में वित्तीय लेन-देन से जुड़े आरोपों में पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका था। इसके अलावा, अप्रैल में ईडी ने रेत तस्करी की जांच के सिलसिले में भी शांतनु को तलब किया था, जिसमें उनके वकील एजेंसी दफ्तर पहुँचे, लेकिन वे स्वयं नहीं आए।

आगे की कार्रवाई

गिरफ्तारी के बाद शांतनु सिन्हा बिस्वास को शुक्रवार को सक्षम न्यायालय के समक्ष पेश किया जाएगा, जहाँ ईडी उनकी हिरासत की माँग कर सकती है। यह मामला पश्चिम बंगाल में पुलिस-अपराध सिंडिकेट गठजोड़ की जांच का एक अहम पड़ाव माना जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो यह जांच केवल एक अधिकारी तक सीमित नहीं रहेगी।
RashtraPress
15 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शांतनु सिन्हा बिस्वास को किस मामले में गिरफ्तार किया गया?
शांतनु सिन्हा बिस्वास को कथित आपराधिक सिंडिकेट संचालक सोना पप्पू उर्फ बिस्वजीत पोद्दार से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया गया है। ईडी के अनुसार, उनसे जुड़े वित्तीय लेन-देन में सोना पप्पू और उसके सहयोगियों का हाथ होने के संकेत मिले हैं।
ईडी ने शांतनु बिस्वास को कब और कहाँ गिरफ्तार किया?
ईडी ने 14 मई 2026 को रात करीब 9:30 बजे कोलकाता के सीजीओ कॉम्प्लेक्स में साढ़े 10 घंटे से अधिक की पूछताछ के बाद शांतनु बिस्वास को गिरफ्तार किया। वे गुरुवार को स्वयं ईडी कार्यालय में पेश हुए थे।
जॉय कामदार का इस मामले से क्या संबंध है?
कारोबारी जॉय कामदार को इसी मनी लॉन्ड्रिंग मामले में वित्तीय लेन-देन से जुड़े आरोपों में पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। जांचकर्ताओं के अनुसार, जॉय कामदार से बरामद दस्तावेज़ों में शांतनु बिस्वास का नाम भी सामने आया।
शांतनु बिस्वास ने ईडी के समन का जवाब क्यों नहीं दिया?
सूत्रों के अनुसार, शांतनु बिस्वास ने सरकारी कामों में व्यस्तता का हवाला देते हुए केंद्रीय एजेंसी से बार-बार अतिरिक्त समय माँगा। उनके वकील कुछ मौकों पर एजेंसी दफ्तर पहुँचे, लेकिन शांतनु स्वयं पेश नहीं हुए, जिसके बाद ईडी ने लुकआउट नोटिस जारी किया।
गिरफ्तारी के बाद आगे क्या होगा?
शांतनु सिन्हा बिस्वास को शुक्रवार को सक्षम न्यायालय में पेश किया जाएगा, जहाँ ईडी उनकी हिरासत की माँग कर सकती है। मामले में रेत तस्करी जांच का एक अलग पहलू भी है, जिसके तहत उन्हें अप्रैल में भी तलब किया गया था।
राष्ट्र प्रेस
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