ईडी की बड़ी कार्रवाई: सोना पप्पू सिंडिकेट मामले में कोलकाता के दो कारोबारियों के घरों पर छापेमारी
सारांश
Key Takeaways
- ईडी ने 26 अप्रैल 2026 को कोलकाता के आनंदपुर और अलीपुर में दो कारोबारियों के घरों समेत तीन ठिकानों पर छापे मारे।
- यह कार्रवाई सोना पप्पू उर्फ बिस्वजीत पोद्दार से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के तहत की गई।
- नए ठिकानों का सुराग जॉय कामदार की पूछताछ से मिला, जो फिलहाल ईडी हिरासत में है।
- कोलकाता पुलिस के डिप्टी कमिश्नर शांतनु सिन्हा विश्वास के घर पर भी इस महीने छापेमारी हो चुकी है।
- सोना पप्पू गोलपार्क हिंसा (फरवरी 2026) का मुख्य आरोपी है और अभी भी फरार है।
- यह कार्रवाई बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के बीच हुई, जिससे TMC और केंद्र के बीच सियासी विवाद और गहरा हो गया।
कोलकाता, 26 अप्रैल: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने रविवार को 'सोना पप्पू सिंडिकेट' से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कोलकाता के आनंदपुर और अलीपुर इलाकों में दो कारोबारियों के घरों समेत कुल तीन ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। यह कार्रवाई बिस्वजीत पोद्दार उर्फ सोना पप्पू से जुड़े आपराधिक नेटवर्क की जांच के तहत की गई है।
जॉय कामदार की पूछताछ से मिला सुराग
ईडी सूत्रों के अनुसार, जिन दो कारोबारियों के घरों पर तलाशी ली जा रही है, उनके नाम और पते जॉय कामदार की पूछताछ के दौरान सामने आए। जॉय कामदार सोना पप्पू का करीबी कारोबारी बताया जाता है, जिसे ईडी पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है और वह फिलहाल ईडी की हिरासत में है।
रविवार सुबह ईडी की कई टीमें केंद्रीय सशस्त्र बलों के साथ साल्ट लेक स्थित सीजीओ कॉम्प्लेक्स से रवाना हुईं और अलग-अलग स्थानों पर एक साथ जांच शुरू की। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इन कारोबारियों का जॉय कामदार के निवेश से कोई सीधा संबंध है या नहीं।
सोना पप्पू पर गंभीर आरोप, अभी भी फरार
सोना पप्पू उर्फ बिस्वजीत पोद्दार पर हत्या की कोशिश, उगाही और संगठित अपराध जैसे कई संगीन आरोप हैं। वह दक्षिण कोलकाता के कस्बा और बालीगंज इलाकों में सिंडिकेट चलाता है। फरवरी 2026 में हुई गोलपार्क हिंसा में भी वह मुख्य आरोपी है।
फिलहाल सोना पप्पू फरार है, लेकिन वह समय-समय पर सोशल मीडिया पर सक्रिय होकर जांच एजेंसियों पर अपने परिवार को परेशान करने का आरोप लगाता रहता है। यह रवैया जांच एजेंसियों के लिए एक चुनौती बना हुआ है।
पुलिस अधिकारी का नाम भी जांच के दायरे में
इस मामले में कोलकाता पुलिस के डिप्टी कमिश्नर शांतनु सिन्हा विश्वास का नाम भी सामने आया है। आरोप है कि उनके और जॉय कामदार के बीच वित्तीय लेन-देन हुए थे। ईडी इस महीने की शुरुआत में उनके आवास पर भी छापेमारी कर चुकी है। यह घटनाक्रम दर्शाता है कि यह सिंडिकेट कितने गहरे तक जड़ें जमाए हुए था।
चुनावी माहौल में केंद्रीय एजेंसियों की सक्रियता पर विवाद
यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 का दूसरा चरण जारी है। पहले चरण में 152 सीटों पर मतदान हो चुका है, जबकि शेष 142 सीटों पर 29 अप्रैल को वोटिंग होनी है।
इसी दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कोलकाता पहुंचे और उन्होंने नॉर्थ कोलकाता में रोड शो किया। वहीं, सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने चुनाव के दौरान केंद्रीय एजेंसियों की बढ़ती सक्रियता पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि केंद्र सरकार इन एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए कर रही है।
गहरा विश्लेषण: सिंडिकेट, सत्ता और चुनाव का त्रिकोण
यह पहला मौका नहीं है जब पश्चिम बंगाल में चुनाव के दौरान ईडी की कार्रवाई विवाद का केंद्र बनी हो। 2021 के विधानसभा चुनाव में भी कई बड़े नामों पर छापे पड़े थे। विशेषज्ञों का मानना है कि संगठित अपराध और राजनीतिक संरक्षण का यह गठजोड़ बंगाल की एक पुरानी समस्या रही है, जो अलग-अलग सरकारों के दौर में अलग-अलग रूपों में सामने आती रही है।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी का नाम इस मामले में आना यह भी इंगित करता है कि मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क कितने व्यापक स्तर पर फैला हुआ है। अब देखना यह होगा कि ईडी की यह छापेमारी किस हद तक अभियोजन योग्य साक्ष्य जुटा पाती है और क्या सोना पप्पू को जल्द गिरफ्तार किया जा सकेगा।