कोलकाता पूर्व डीसीपी शांतनु सिन्हा बिस्वास पर ईडी की पूरक चार्जशीट, ₹2.89 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के कोलकाता क्षेत्रीय कार्यालय ने कोलकाता पुलिस के पूर्व उपायुक्त (डीसीपी) शांतनु सिन्हा बिस्वास के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत प्रथम पूरक अभियोग शिकायत दर्ज की है। यह शिकायत 10 जुलाई 2026 को कोलकाता नगर सत्र न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष दायर की गई, जो बिस्वजीत पोद्दर उर्फ सोना पप्पू और अन्य से जुड़े व्यापक धन शोधन मामले की जांच का हिस्सा है। जांच में खुलासा हुआ है कि पूर्व डीसीपी ने आपराधिक गतिविधियों से कम से कम ₹2.89 करोड़ का अवैध लाभ अर्जित किया।
मामले की पृष्ठभूमि
ईडी ने यह जांच पश्चिम बंगाल पुलिस और कोलकाता पुलिस द्वारा दर्ज कई प्राथमिकियों (एफआईआर) के आधार पर शुरू की थी। बिस्वजीत पोद्दर उर्फ सोना पप्पू और उनके सहयोगियों पर दंगा, हत्या का प्रयास, आपराधिक साजिश तथा शस्त्र अधिनियम के उल्लंघन में संलिप्तता के आरोप हैं। जांच एजेंसी के अनुसार, ये आरोपी पश्चिम बंगाल में संगठित आपराधिक गिरोह की गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल थे और गिरोह के संचालन के ज़रिये भारी मात्रा में अवैध धन जुटाते थे।
पूर्व डीसीपी की कथित भूमिका
पीएमएलए जांच में ईडी ने आरोप लगाया है कि शांतनु सिन्हा बिस्वास ने जय एस. कामदार को एक प्रभावशाली बिचौलिए के रूप में इस्तेमाल किया। कामदार ने कथित तौर पर उनकी ओर से पुलिस विभाग में तबादलों और नियुक्तियों के प्रस्ताव हासिल करने में मदद की। जांच के अनुसार, पूर्व डीसीपी ने पुलिस जांचों में सक्रिय रूप से हस्तक्षेप किया और कानून प्रवर्तन मामलों में अपना प्रभाव अनुचित तरीके से इस्तेमाल किया। एफआईआर दर्ज करने सहित पुलिस मामलों में अवैध सहायता के बदले उन्होंने जय कामदार और उनके परिवार से महंगे उपहार प्राप्त किए — जिससे उन्होंने स्वयं और अपने परिवार के सदस्यों को समृद्ध किया।
संपत्तियों का खुलासा
ईडी की जांच में यह भी सामने आया है कि शांतनु सिन्हा बिस्वास ने मुर्शिदाबाद जिले के कंडी में स्थित एक संपत्ति का महंगा निर्माण और नवीनीकरण अपराध से अर्जित धन से कराया। इसके अतिरिक्त, कोलकाता और उसके आसपास कई आवासीय संपत्तियाँ विभिन्न व्यक्तियों और कंपनियों के नाम पर अधिग्रहित की गईं, जिनका वास्तविक स्वामित्व जांच एजेंसी के अनुसार पूर्व डीसीपी और उनके परिजनों के पास है।
गिरफ्तारी और न्यायिक हिरासत
शांतनु सिन्हा बिस्वास को 14 मई 2026 को गिरफ्तार किया गया था और 14 दिनों के लिए ईडी की हिरासत में भेजा गया था। वर्तमान में वे न्यायिक हिरासत में हैं। यह मामला पश्चिम बंगाल में पुलिस-अपराध गठजोड़ की जांच की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आगे क्या होगा
पूरक चार्जशीट दाखिल होने के बाद अब कोलकाता नगर सत्र न्यायालय में सुनवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। ईडी की जांच अभी जारी है और आने वाले समय में और आरोपियों के नाम सामने आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।