16 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

कोलकाता पूर्व डीसीपी शांतनु सिन्हा बिस्वास पर ईडी की पूरक चार्जशीट, ₹2.89 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
कोलकाता पूर्व डीसीपी शांतनु सिन्हा बिस्वास पर ईडी की पूरक चार्जशीट, ₹2.89 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप

सारांश

कोलकाता पुलिस के पूर्व डीसीपी शांतनु सिन्हा बिस्वास पर ईडी ने पूरक चार्जशीट दाखिल की है। आरोप है कि उन्होंने संगठित अपराध गिरोह से जुड़े मामलों में हस्तक्षेप कर ₹2.89 करोड़ का अवैध लाभ लिया और बिचौलिए के ज़रिये पुलिस तबादलों में दलाली की।

मुख्य बातें

ईडी ने 10 जुलाई 2026 को कोलकाता नगर सत्र न्यायालय में पूर्व डीसीपी शांतनु सिन्हा बिस्वास के खिलाफ पीएमएलए के तहत प्रथम पूरक अभियोग शिकायत दर्ज की।
पूर्व डीसीपी ने कथित तौर पर ₹2.89 करोड़ का अवैध आर्थिक लाभ अपराध से प्राप्त किया।
कामदार के ज़रिये पुलिस तबादलों और नियुक्तियों में दलाली तथा पुलिस जांचों में हस्तक्षेप का आरोप।
मुर्शिदाबाद के कंडी में संपत्ति निर्माण और कोलकाता में बेनामी आवासीय संपत्तियाँ जांच में उजागर।
शांतनु सिन्हा बिस्वास को 14 मई 2026 को गिरफ्तार किया गया था; वर्तमान में न्यायिक हिरासत में हैं।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के कोलकाता क्षेत्रीय कार्यालय ने कोलकाता पुलिस के पूर्व उपायुक्त (डीसीपी) शांतनु सिन्हा बिस्वास के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत प्रथम पूरक अभियोग शिकायत दर्ज की है। यह शिकायत 10 जुलाई 2026 को कोलकाता नगर सत्र न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष दायर की गई, जो बिस्वजीत पोद्दर उर्फ सोना पप्पू और अन्य से जुड़े व्यापक धन शोधन मामले की जांच का हिस्सा है। जांच में खुलासा हुआ है कि पूर्व डीसीपी ने आपराधिक गतिविधियों से कम से कम ₹2.89 करोड़ का अवैध लाभ अर्जित किया।

मामले की पृष्ठभूमि

ईडी ने यह जांच पश्चिम बंगाल पुलिस और कोलकाता पुलिस द्वारा दर्ज कई प्राथमिकियों (एफआईआर) के आधार पर शुरू की थी। बिस्वजीत पोद्दर उर्फ सोना पप्पू और उनके सहयोगियों पर दंगा, हत्या का प्रयास, आपराधिक साजिश तथा शस्त्र अधिनियम के उल्लंघन में संलिप्तता के आरोप हैं। जांच एजेंसी के अनुसार, ये आरोपी पश्चिम बंगाल में संगठित आपराधिक गिरोह की गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल थे और गिरोह के संचालन के ज़रिये भारी मात्रा में अवैध धन जुटाते थे।

पूर्व डीसीपी की कथित भूमिका

पीएमएलए जांच में ईडी ने आरोप लगाया है कि शांतनु सिन्हा बिस्वास ने जय एस. कामदार को एक प्रभावशाली बिचौलिए के रूप में इस्तेमाल किया। कामदार ने कथित तौर पर उनकी ओर से पुलिस विभाग में तबादलों और नियुक्तियों के प्रस्ताव हासिल करने में मदद की। जांच के अनुसार, पूर्व डीसीपी ने पुलिस जांचों में सक्रिय रूप से हस्तक्षेप किया और कानून प्रवर्तन मामलों में अपना प्रभाव अनुचित तरीके से इस्तेमाल किया। एफआईआर दर्ज करने सहित पुलिस मामलों में अवैध सहायता के बदले उन्होंने जय कामदार और उनके परिवार से महंगे उपहार प्राप्त किए — जिससे उन्होंने स्वयं और अपने परिवार के सदस्यों को समृद्ध किया।

संपत्तियों का खुलासा

ईडी की जांच में यह भी सामने आया है कि शांतनु सिन्हा बिस्वास ने मुर्शिदाबाद जिले के कंडी में स्थित एक संपत्ति का महंगा निर्माण और नवीनीकरण अपराध से अर्जित धन से कराया। इसके अतिरिक्त, कोलकाता और उसके आसपास कई आवासीय संपत्तियाँ विभिन्न व्यक्तियों और कंपनियों के नाम पर अधिग्रहित की गईं, जिनका वास्तविक स्वामित्व जांच एजेंसी के अनुसार पूर्व डीसीपी और उनके परिजनों के पास है।

गिरफ्तारी और न्यायिक हिरासत

शांतनु सिन्हा बिस्वास को 14 मई 2026 को गिरफ्तार किया गया था और 14 दिनों के लिए ईडी की हिरासत में भेजा गया था। वर्तमान में वे न्यायिक हिरासत में हैं। यह मामला पश्चिम बंगाल में पुलिस-अपराध गठजोड़ की जांच की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

आगे क्या होगा

पूरक चार्जशीट दाखिल होने के बाद अब कोलकाता नगर सत्र न्यायालय में सुनवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। ईडी की जांच अभी जारी है और आने वाले समय में और आरोपियों के नाम सामने आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि संगठित अपराध गिरोह को सक्रिय संरक्षण देने तक जाते हैं। पश्चिम बंगाल में पुलिस-अपराध गठजोड़ की जांच का यह पहला मामला नहीं है, लेकिन ₹2.89 करोड़ की बेनामी संपत्तियों और बिचौलिए नेटवर्क का खुलासा संस्थागत जवाबदेही पर गंभीर सवाल उठाता है। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूकती है वह यह है कि तबादला-दलाली का यह तंत्र अकेले नहीं चलता — यह एक बड़े पारिस्थितिकी तंत्र की ओर इशारा करता है जिसकी जांच अभी बाकी है।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईडी ने कोलकाता के पूर्व डीसीपी शांतनु सिन्हा बिस्वास के खिलाफ क्या कार्रवाई की है?
ईडी ने 10 जुलाई 2026 को कोलकाता नगर सत्र न्यायालय में शांतनु सिन्हा बिस्वास के खिलाफ पीएमएलए, 2002 के तहत प्रथम पूरक अभियोग शिकायत दर्ज की है। जांच में उन पर ₹2.89 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगाया गया है।
शांतनु सिन्हा बिस्वास को कब गिरफ्तार किया गया और अभी उनकी स्थिति क्या है?
शांतनु सिन्हा बिस्वास को 14 मई 2026 को गिरफ्तार किया गया था और 14 दिनों के लिए ईडी की हिरासत में भेजा गया था। वर्तमान में वे न्यायिक हिरासत में हैं।
बिस्वजीत पोद्दर उर्फ सोना पप्पू का इस मामले से क्या संबंध है?
बिस्वजीत पोद्दर उर्फ सोना पप्पू इस मनी लॉन्ड्रिंग मामले के मुख्य आरोपियों में से एक हैं, जिन पर दंगा, हत्या के प्रयास, आपराधिक साजिश और शस्त्र अधिनियम उल्लंघन के आरोप हैं। ईडी की जांच उनके और अन्य के खिलाफ दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी।
पूर्व डीसीपी पर बिचौलिए जय कामदार के ज़रिये क्या आरोप हैं?
जांच के अनुसार, शांतनु सिन्हा बिस्वास ने जय एस. कामदार को बिचौलिए के रूप में इस्तेमाल कर पुलिस तबादलों और नियुक्तियों में दलाली की। इसके बदले उन्होंने कामदार और उनके परिवार से महंगे उपहार प्राप्त किए और पुलिस जांचों में हस्तक्षेप किया।
ईडी की जांच में कौन-सी संपत्तियाँ उजागर हुई हैं?
जांच में मुर्शिदाबाद के कंडी में अपराध से अर्जित धन से बनाई गई संपत्ति और कोलकाता व आसपास की कई बेनामी आवासीय संपत्तियाँ सामने आई हैं। ये संपत्तियाँ अन्य व्यक्तियों या कंपनियों के नाम पर हैं, लेकिन वास्तविक स्वामित्व पूर्व डीसीपी और उनके परिजनों का बताया गया है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम कल
  2. 3 सप्ताह पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 2 महीने पहले
    ईडी ने कोलकाता पुलिस के डिप्टी कमिश्नर शांतनु सिन्हा बिस्वास के खिलाफ जारी किया लुकआउट नोटिस, मनी लॉन्ड्रिंग मामले में फरार होने की आशंका
  7. 2 महीने पहले
  8. 2 महीने पहले