चीन का कार्बन बाजार 5 साल में दुनिया का सबसे बड़ा बना, 91.7 करोड़ टन का कारोबार
सारांश
मुख्य बातें
चीन का राष्ट्रीय कार्बन उत्सर्जन व्यापार बाजार 16 जुलाई 2026 को अपनी स्थापना के 5 वर्ष पूरे कर चुका है और इस अवधि में यह विश्व का सबसे बड़ा कार्बन बाजार बन गया है। चीनी पर्यावरण मंत्रालय के अनुसार, इस बाजार ने उद्योगों में कार्बन कटौती को गति देने और उत्सर्जन में कमी की समग्र लागत को घटाने में निर्णायक भूमिका निभाई है।
बाजार का मौजूदा आकार और व्यापार आंकड़े
पर्यावरण मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, जून 2026 तक राष्ट्रीय कार्बन बाजार में संचयी कोटा व्यापार 91 करोड़ 70 लाख टन से अधिक हो चुका है, जिसका कुल मूल्य 61 अरब 70 करोड़ युआन से ऊपर है। 2026 की पहली छमाही में व्यापार की मात्रा 5 करोड़ 29 लाख 60 हजार टन रही, जो 2025 की पहली छमाही की तुलना में लगभग 37 प्रतिशत अधिक है — यह वृद्धि बाजार की बढ़ती परिपक्वता का संकेत है।
बिजली क्षेत्र में कार्बन कटौती की उपलब्धि
पर्यावरण मंत्रालय के जलवायु परिवर्तन विभाग के उप निदेशक लू शित्से ने बताया कि '14वीं पंचवर्षीय योजना' (2021–2025) के दौरान अकेले बिजली क्षेत्र ने कार्बन बाजार के माध्यम से 53 करोड़ टन कार्बन उत्सर्जन की कटौती की। लगभग 80 प्रतिशत उद्यमों ने अपनी कार्बन तीव्रता में कमी दर्ज की। पिछले तीन वर्षों में 200 से अधिक पुरानी छोटी बिजली इकाइयों को बंद किया गया और सौर तापीय बिजली तथा हरित हाइड्रोजन जैसी नई परियोजनाओं को प्रोत्साहन दिया गया।
बाजार का विस्तार: बिजली से इस्पात और सीमेंट तक
यह बाजार 1 जुलाई 2021 को आधिकारिक रूप से शुरू हुआ था, जब इसमें केवल 2,162 बिजली संयंत्र शामिल थे। पाँच वर्षों में यह संख्या बढ़कर 3,378 उद्यमों तक पहुँच गई है, जिनमें इस्पात, सीमेंट और एल्यूमीनियम गलाने वाले उद्योग भी सम्मिलित हैं। यह बाजार अब लगभग 8 अरब 30 करोड़ टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को कवर करता है, जो चीन के कुल उत्सर्जन का 65 प्रतिशत से अधिक है। गौरतलब है कि यह विस्तार यूरोपीय संघ के कार्बन बाजार से कहीं अधिक व्यापक है, जो इसे वैश्विक जलवायु नीति में एक महत्वपूर्ण मानक बनाता है।
2027 और '15वीं पंचवर्षीय योजना' की रूपरेखा
लू शित्से के अनुसार, वर्ष 2027 तक चीन उद्योग क्षेत्र के सभी प्रमुख उत्सर्जक क्षेत्रों को इस बाजार के अंतर्गत लाने की योजना बना रहा है, ताकि कार्बन मूल्य वास्तविक कटौती लागत को प्रतिबिंबित कर सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि उच्च उत्सर्जन का अर्थ होगा अधिक लागत, जबकि कम कार्बन की दिशा में बदलाव से उद्यमों को आर्थिक लाभ मिलेगा। '15वीं पंचवर्षीय योजना' (2026–2030) के दौरान लक्ष्य है कि कवर किए गए उद्योगों में प्रति उत्पाद इकाई कार्बन उत्सर्जन को 3 प्रतिशत कम किया जाए।
वैश्विक जलवायु लक्ष्यों के लिए क्या मायने रखता है
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक समुदाय पेरिस समझौते के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए दबाव में है। चीन, जो दुनिया का सबसे बड़ा कार्बन उत्सर्जक देश है, का यह कार्बन बाजार मॉडल अन्य विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक संभावित संदर्भ बिंदु बन सकता है। आलोचकों का कहना है कि कार्बन मूल्य की वास्तविक प्रभावशीलता तभी सिद्ध होगी जब इसे स्वतंत्र सत्यापन तंत्र से जोड़ा जाए।