चीन की नवीकरणीय ऊर्जा स्थापित क्षमता 2.4 अरब किलोवाट के पार, पवन-सौर ऊर्जा में ऐतिहासिक उछाल
सारांश
मुख्य बातें
चीन के राष्ट्रीय ऊर्जा प्रशासन के अधिकारियों के अनुसार, मार्च 2026 के अंत तक देश की कुल नवीकरणीय ऊर्जा स्थापित क्षमता लगभग 2.4 अरब किलोवाट तक पहुँच गई है, जो देश की कुल ऊर्जा स्थापना का 60 प्रतिशत से अधिक है। पवन और सौर ऊर्जा की संयुक्त स्थापित क्षमता अकेले लगभग 1.9 अरब किलोवाट दर्ज की गई है, जो कुल ऊर्जा क्षमता का करीब आधा हिस्सा है।
पहली तिमाही में नवीन ऊर्जा विस्तार
2026 की पहली तिमाही (जनवरी-मार्च) में चीन भर में नवीकरणीय ऊर्जा की नई स्थापना क्षमता 589.3 लाख किलोवाट रही, जो इस अवधि में हुई कुल ऊर्जा स्थापना का 70 प्रतिशत है। यह आँकड़ा दर्शाता है कि चीन अपनी ऊर्जा संरचना को जीवाश्म ईंधन से दूर और हरित स्रोतों की ओर तेज़ी से स्थानांतरित कर रहा है।
राष्ट्रीय ऊर्जा प्रशासन के नवीन ऊर्जा विभाग की उप निदेशक फान हुईमिन ने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा की स्थापित क्षमता में लगातार वृद्धि से ऊर्जा संरचना के अनुकूलन को निरंतर बढ़ावा मिल रहा है।
ग्रीन पावर सप्लाई में मज़बूती
अधिकारियों के अनुसार, इस वर्ष ऊर्जा स्थापना का आकार और बिजली उत्पादन दोनों लगातार बढ़ रहे हैं, और हरित बिजली आपूर्ति की क्षमता भी मज़बूत होती जा रही है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर कार्बन उत्सर्जन घटाने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा की माँग तेज़ी से बढ़ रही है।
गौरतलब है कि चीन पहले से ही दुनिया का सबसे बड़ा नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादक देश है। 2.4 अरब किलोवाट की यह क्षमता कई बड़े देशों की कुल ऊर्जा क्षमता से कहीं अधिक है, जो वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य में चीन की निर्णायक भूमिका को रेखांकित करती है।
ऊर्जा संरचना में बदलाव का महत्व
नवीकरणीय ऊर्जा की कुल स्थापित क्षमता का 60 प्रतिशत से अधिक होना यह संकेत देता है कि चीन की ऊर्जा प्रणाली में हरित स्रोत अब बहुमत में आ चुके हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, पवन और सौर ऊर्जा की 1.9 अरब किलोवाट की संयुक्त क्षमता भविष्य में ऊर्जा सुरक्षा और जलवायु लक्ष्यों दोनों के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी।
आगे की राह
राष्ट्रीय ऊर्जा प्रशासन के अधिकारियों ने संकेत दिया है कि यह वृद्धि दर आने वाली तिमाहियों में भी बनी रहने की उम्मीद है। चीन के ऊर्जा क्षेत्र में यह बदलाव न केवल घरेलू ऊर्जा सुरक्षा को मज़बूत करेगा, बल्कि वैश्विक जलवायु परिवर्तन से निपटने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।