मौलाना जर्जिस अंसारी के श्रीकृष्ण पर विवादित बयान के बाद लखनऊ में FIR दर्ज, BNS की धारा 302 व 66 लागू
सारांश
मुख्य बातें
लखनऊ के हजरतगंज थाने में 16 जुलाई 2026 को मौलाना जर्जिस अंसारी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 302 और धारा 66 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। यह मामला हिंदूवादी नेता शिशिर चतुर्वेदी की शिकायत पर थाना प्रभारी विक्रम सिंह ने दर्ज किया। विवाद की जड़ में मौलाना का एक वीडियो है जो सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हुआ था।
वायरल वीडियो और विवादित बयान
वायरल वीडियो में मौलाना जर्जिस अंसारी ने कथित तौर पर कहा कि 'कृष्ण मुस्लिम थे और पाँच वक्त की नमाज़ पढ़ते थे।' इस बयान के सामने आते ही विभिन्न हिंदू संगठनों में तीव्र आक्रोश फैल गया और उन्होंने तत्काल कानूनी कार्रवाई की माँग की। यह बयान धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला बताया जा रहा है।
विश्व हिंदू परिषद की कड़ी प्रतिक्रिया
विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के नेता विनोद बंसल ने इस बयान पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा, 'मौलाना जर्जिस जैसे लोगों को शर्म नहीं आती। ऐसे लोग लगातार बेहूदा बयान देते रहते हैं। शासन-प्रशासन को इनके खिलाफ सख्त व्यवस्था करनी चाहिए।'
बंसल ने यह भी आरोप लगाया कि यह कोई पहली घटना नहीं है। उनके अनुसार, इससे पहले मौलाना अरशद मदनी ने भी दिल्ली की एक सभा में भगवान शिव को लेकर विवादित टिप्पणी की थी।
भाजपा और हिंदू संगठनों की निंदा
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कई नेताओं सहित अनेक हिंदूवादी संगठनों ने इस बयान की कड़ी निंदा की है और मौलाना जर्जिस अंसारी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की माँग की है। विनोद बंसल ने आरोप लगाया कि कुछ तत्व लगातार हिंदू आस्था और धार्मिक विश्वासों को आहत करने का प्रयास कर रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि अन्य धर्मों के बारे में इस प्रकार की टिप्पणी की जाए तो तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिलती है, किंतु हिंदू देवी-देवताओं पर आपत्तिजनक टिप्पणियाँ की जाती हैं — जो उनके अनुसार पूरी तरह अस्वीकार्य हैं।
आगे क्या होगा
मामला दर्ज होने के बाद हजरतगंज पुलिस जाँच में जुट गई है। BNS की धारा 302 और 66 के तहत दर्ज यह मुकदमा धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने से संबंधित है। आने वाले दिनों में मौलाना के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ने की संभावना है।