मौलाना जर्जिस अंसारी के श्रीकृष्ण पर विवादित बयान से बवाल, भाजपा-एनडीए नेताओं ने की कार्रवाई की मांग
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, 16 जुलाई — एक वायरल वीडियो में मौलाना जर्जिस अंसारी ने कथित तौर पर दावा किया कि भगवान श्रीकृष्ण मुस्लिम थे, दीन (इस्लाम) का प्रचार करते थे और पाँच वक्त की नमाज़ अदा करते थे। इस बयान के सामने आते ही भाजपा-एनडीए नेताओं ने कड़ी आपत्ति जताई और मौलाना के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की माँग की।
नेताओं की प्रतिक्रिया
शिवसेना के प्रवक्ता संजय निरुपम ने कहा कि जब इस्लाम का जन्म भी नहीं हुआ था, उस समय भगवान श्रीकृष्ण अपनी शिक्षाएँ दे रहे थे। उन्होंने कहा, 'उनकी दिव्य शक्ति को पूरे आर्यावर्त में पूजा जाता था और लोग उनके सामने नतमस्तक होते थे।'
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता बाबूलाल मरांडी ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, 'वह यह बात किसे समझाने की कोशिश कर रहे हैं? हिंदू पहले से ही भगवान कृष्ण की पूजा करते हैं — राधा-कृष्ण का जाप हिंदुओं की ओर से किया जाता है।'
भाजपा नेता मोहसिन रजा ने विपक्ष पर सीधा निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी (SP) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) जैसी विपक्षी पार्टियाँ ऐसे मौलवियों को अपने साथ रखती हैं ताकि वे देवी-देवताओं का अपमान कर सकें और सनातन संस्कृति पर हमला कर सकें। उन्होंने यह भी कहा कि यह मौलवी सपा प्रमुख अखिलेश यादव के जनपद से आता है और इसकी जाँच होनी चाहिए।
याचिकाकर्ता की माँग
श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद मामले के याचिकाकर्ता महेंद्र प्रताप सिंह ने इस बयान को 'अत्यंत निंदनीय और दुर्भाग्यपूर्ण' करार देते हुए माँग की कि मौलाना जर्जिस अंसारी तुरंत सनातन और हिंदू समुदाय से माफी माँगें। उन्होंने कहा, 'इस्लाम लगभग 1,400 साल पहले आया था, जबकि भगवान कृष्ण 5,000 साल से भी पहले हुए थे।'
मुस्लिम धर्मगुरु की भी आलोचना
ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के जनरल सेक्रेटरी मौलाना यासूब अब्बास ने भी मौलाना जर्जिस अंसारी के बयान की आलोचना की। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग सस्ती लोकप्रियता पाने के लिए इस तरह की हरकतें करते हैं और इस्लाम को बदनाम करते हैं। उन्होंने सरकार से माँग की कि ऐसे मौलवियों पर कार्रवाई की जाए।
विवाद की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब देश में धार्मिक संवेदनशीलता से जुड़े बयानों को लेकर राजनीतिक तापमान पहले से ऊँचा है। यह पहली बार नहीं है जब किसी धार्मिक व्यक्तित्व के बयान ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचाई हो। आलोचकों का कहना है कि ऐसे बयान सामाजिक सौहार्द के लिए हानिकारक हैं, चाहे वे किसी भी समुदाय की ओर से आएँ। आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है।