भगवान कृष्ण पर मौलाना जर्जिस अंसारी के विवादित बयान पर सपा नेता पवन पांडे का पलटवार
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री पवन पांडे ने 16 जुलाई 2025 को अयोध्या में मौलाना जर्जिस अंसारी के भगवान श्रीकृष्ण संबंधी विवादित बयान की कड़ी निंदा की। पांडे ने इसे 'सस्ती लोकप्रियता' पाने की कोशिश करार दिया और कहा कि हर व्यक्ति को अपने धर्म और आस्था की सीमाओं में रहना चाहिए।
मौलाना का विवादित दावा
मौलाना जर्जिस अंसारी ने कथित तौर पर दावा किया था कि भगवान कृष्ण मुस्लिम थे और नमाज पढ़ते थे। इस बयान ने धार्मिक और राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया उत्पन्न की।
पवन पांडे की प्रतिक्रिया
पवन पांडे ने कहा, 'लोग सस्ती लोकप्रियता पाने के लिए ऐसी विवादित हरकतें करते हैं। मैं बस इतना कहना चाहता हूं कि हर व्यक्ति को अपने धर्म और आस्था की सीमाओं में रहना चाहिए। सभी को अपनी-अपनी सीमाओं में रहना चाहिए। सस्ती लोकप्रियता पाने के लिए किसी को भी जरूरत से ज्यादा ज्ञान दिखाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।'
उन्होंने आगे कहा कि हिंदू भाई-बहन मंदिरों में पूजा-अर्चना करें और मुसलमान मस्जिदों में नमाज अदा करें। उनका स्पष्ट संदेश था कि सभी को संविधान और मर्यादा के दायरे में रहकर अपना काम करना चाहिए।
विधानसभा अध्यक्ष के बयान पर भी निशाना
इसी बीच उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने श्रीराम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में एक विवादित टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जिसे लगता है कि उसका दान चोरी हुआ, संभव है उसने सच्ची श्रद्धा से दान न दिया हो। इस बयान पर भी राजनीतिक विवाद गहरा गया।
पवन पांडे ने राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की कविता की पंक्ति — 'जब नाश मनुज पर छाता है, पहले विवेक मर जाता है' — का संदर्भ देते हुए विधानसभा अध्यक्ष पर करारा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि चोरी करने वाले भारतीय जनता पार्टी (BJP) के ही लोग हैं और पूरी भाजपा के ऐसे ही अनर्गल बयान आ रहे हैं।
आगामी धार्मिक आयोजन
पवन पांडे ने बताया कि 17 जुलाई को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती उनके आवास पर पधारेंगे। अयोध्या की पावन धरती पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु उनके विचार सुनेंगे और आशीर्वाद लेंगे। इस अवसर पर भंडारे और भजन संध्या का भी आयोजन किया गया है, जिसमें क्षेत्रवासी बड़ी संख्या में भाग लेंगे।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब उत्तर प्रदेश में धार्मिक और राजनीतिक बयानबाजी तेज है और विभिन्न दलों के नेता एक-दूसरे पर हमलावर हैं।