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मौलाना जर्जिस अंसारी के श्रीकृष्ण विवाद पर साधु-संतों का अखिलेश यादव से सवाल — 'चुप्पी क्यों?'

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मौलाना जर्जिस अंसारी के श्रीकृष्ण विवाद पर साधु-संतों का अखिलेश यादव से सवाल — 'चुप्पी क्यों?'

सारांश

मौलाना जर्जिस अंसारी के उस कथित दावे — कि भगवान श्रीकृष्ण मुसलमान थे और दिन में पाँच बार नमाज पढ़ते थे — ने हिंदू संत-समाज को एकजुट कर दिया है। निशाने पर हैं सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव, जिनसे पूछा जा रहा है कि राम मंदिर विवाद पर बोलने वाले वे इस बार मौन क्यों हैं।

मुख्य बातें

मौलाना जर्जिस अंसारी ने कथित तौर पर एक वायरल वीडियो में दावा किया कि भगवान श्रीकृष्ण मुसलमान थे और दिन में पाँच बार नमाज पढ़ते थे।
अखिल भारतीय हिंदू महासभा , अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद सहित देशभर के साधु-संतों ने बयान की कड़ी निंदा की और एफआईआर की माँग की।
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से संत-समाज ने पूछा कि राम मंदिर चंदा विवाद पर मुखर रहने वाले वे इस मामले में चुप क्यों हैं।
ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने भी बयान को 'गैर-जिम्मेदाराना' करार देते हुए आपत्ति जताई।
महंत रवींद्र पुरी ने उत्तर प्रदेश सरकार से तत्काल कार्रवाई की अपील की; मौलाना की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं।

देशभर के हिंदू साधु-संतों ने मौलाना जर्जिस अंसारी के उस कथित बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर दावा किया कि भगवान श्रीकृष्ण मुसलमान थे और दिन में पाँच बार नमाज पढ़ते थे। 16 जुलाई को यह विवाद तब और गहराया जब संत-समाज ने समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव से सीधे पूछा कि राम मंदिर चंदा विवाद पर मुखर रहने वाले वे इस मामले में मौन क्यों हैं।

विवादित बयान का मूल

एक वायरल वीडियो में मौलाना जर्जिस अंसारी ने कथित तौर पर कहा कि भगवान कृष्ण मुसलमान थे और दिन में पाँच बार नमाज अदा करते थे। इस दावे को हिंदू धर्माचार्यों ने न केवल तथ्यात्मक रूप से गलत बताया, बल्कि इसे सनातन धर्म की भावनाओं पर सीधा आघात करार दिया। वीडियो के वायरल होने के बाद से धार्मिक और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर प्रतिक्रियाएँ तेज हो गई हैं।

हिंदू संतों की प्रतिक्रिया

अखिल भारतीय हिंदू महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शिशिर चतुर्वेदी ने कहा, 'अब वे दावा कर रहे हैं कि भगवान कृष्ण सच्चे मुसलमान थे, जो दिन में पाँच बार नमाज पढ़ते थे। किसी की हिम्मत नहीं होती कि कुरान या पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ कुछ बोले, क्योंकि तुरंत 'सिर तन से जुदा' के नारे लगने लगते हैं।' उन्होंने उत्तर प्रदेश की योगी सरकार को भी आगाह किया कि यदि इस मामले में कार्रवाई नहीं हुई तो सरकार कमज़ोर दिखेगी।

चतुर्वेदी ने अखिलेश यादव को सीधे संबोधित करते हुए कहा, 'आपके वंश के अनुसार भगवान कृष्ण आपके पूर्वज हैं। तुष्टिकरण की राजनीति छोड़िए। आपके जिले का मौलाना है — कम से कम एफआईआर तो दर्ज करवा दीजिए।'

आगरा के कैलाश मंदिर के महंत निर्मल गिरी ने कहा कि मौलाना जहाँ भी भाषण देते हैं, विशेषकर मुस्लिम समुदाय के बीच, ऐसी बेतुकी बातें करते हैं और सनातन धर्म पर हमले के लिए प्रोपेगेंडा तैयार किया है।

अयोध्या के आर्य संत वरुण दास महाराज ने ऐतिहासिक तथ्यों का हवाला देते हुए कहा कि इस्लाम का उदय लगभग 1,400 वर्ष पूर्व मक्का और मदीना में हुआ, जबकि श्रीकृष्ण का काल उससे हजारों वर्ष पुराना है। उन्होंने माँग की कि मौलवी पर कार्रवाई होनी चाहिए।

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी ने बयान की घोर निंदा करते हुए कहा, 'यह बहुत निंदनीय और दुखद है। मौलाना को माफी माँगनी चाहिए। उन्होंने गीता के श्लोकों का भी सही अध्ययन नहीं किया है। दूसरे धर्मों पर टिप्पणी करने से द्वेष बढ़ेगा।' उन्होंने सरकार से तत्काल कार्रवाई की अपील की।

मुस्लिम धर्मगुरुओं की आपत्ति

उल्लेखनीय है कि मुस्लिम धर्मगुरुओं ने भी मौलाना के बयान से खुद को अलग किया। ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने स्पष्ट किया कि भगवान कृष्ण मुसलमान नहीं थे और नमाज पढ़ने का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने कहा, 'सनातन हजारों साल पुराना है, जबकि इस्लाम लगभग 1,400 साल पहले आया। ऐसे बेबुनियाद दावे गैर-जिम्मेदाराना हैं और धार्मिक भावनाओं को आहत करते हैं।'

अखिलेश यादव पर राजनीतिक दबाव

संत-समाज का निशाना मुख्य रूप से सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर रहा। आलोचकों का कहना है कि जिस तत्परता से उन्होंने राम मंदिर चंदा विवाद पर बयान दिए, उसी तत्परता से उन्हें अपने जिले के मौलाना के बयान पर भी प्रतिक्रिया देनी चाहिए थी। यह प्रकरण ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावों को देखते हुए धार्मिक संवेदनशीलता का मुद्दा राजनीतिक रूप से अत्यंत महत्त्वपूर्ण हो गया है।

आगे क्या होगा

अब तक मौलाना जर्जिस अंसारी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हिंदू संगठनों ने उत्तर प्रदेश पुलिस से एफआईआर दर्ज करने और मौलाना के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करने की माँग की है। यह देखना होगा कि योगी सरकार और सपा — दोनों इस बढ़ते दबाव पर किस तरह प्रतिक्रिया देते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो श्रीकृष्ण को कुलदेवता मानते हैं, और मुस्लिम वोट बैंक — दोनों को एक साथ साधना कठिन होता जा रहा है। उल्लेखनीय यह भी है कि मुस्लिम धर्मगुरुओं ने खुद इस बयान से किनारा किया, जो दर्शाता है कि यह मामला हिंदू-मुस्लिम नहीं, बल्कि जिम्मेदार धार्मिक विमर्श बनाम उकसावे का है। योगी सरकार के लिए भी यह परीक्षा है — कार्रवाई न होने पर 'कानून सबके लिए एक' की उनकी छवि पर सवाल उठेंगे।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मौलाना जर्जिस अंसारी ने भगवान श्रीकृष्ण के बारे में क्या कहा?
एक वायरल वीडियो में मौलाना जर्जिस अंसारी ने कथित तौर पर दावा किया कि भगवान श्रीकृष्ण मुसलमान थे और दिन में पाँच बार नमाज पढ़ते थे। इस बयान को हिंदू धर्माचार्यों और मुस्लिम धर्मगुरुओं दोनों ने तथ्यात्मक रूप से गलत और धार्मिक भावनाओं के विरुद्ध बताया है।
साधु-संत अखिलेश यादव से सवाल क्यों पूछ रहे हैं?
संत-समाज का कहना है कि अखिलेश यादव राम मंदिर चंदा विवाद पर तो सक्रिय रूप से बोले, लेकिन अपने जिले के मौलाना के श्रीकृष्ण संबंधी विवादित बयान पर चुप हैं। आलोचकों का कहना है कि यह चुनावी तुष्टिकरण की राजनीति को दर्शाता है।
मुस्लिम धर्मगुरुओं ने इस बयान पर क्या कहा?
ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने स्पष्ट किया कि भगवान कृष्ण मुसलमान नहीं थे और नमाज का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने इस दावे को 'गैर-जिम्मेदाराना' बताया और कहा कि ऐसे बयान धार्मिक भावनाओं को आहत करते हैं।
हिंदू संगठनों ने सरकार से क्या माँग की है?
अखिल भारतीय हिंदू महासभा, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद और अन्य संगठनों ने उत्तर प्रदेश पुलिस से मौलाना जर्जिस अंसारी के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने और योगी सरकार से तत्काल कार्रवाई करने की माँग की है।
क्या मौलाना जर्जिस अंसारी ने इस विवाद पर कोई सफाई दी है?
16 जुलाई तक मौलाना जर्जिस अंसारी की ओर से इस विवादित बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या सफाई सामने नहीं आई है। मामला उत्तर प्रदेश में राजनीतिक और धार्मिक दोनों स्तरों पर तूल पकड़ता जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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