मौलाना जर्जिस अंसारी के श्रीकृष्ण विवाद पर साधु-संतों का अखिलेश यादव से सवाल — 'चुप्पी क्यों?'
सारांश
मुख्य बातें
देशभर के हिंदू साधु-संतों ने मौलाना जर्जिस अंसारी के उस कथित बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर दावा किया कि भगवान श्रीकृष्ण मुसलमान थे और दिन में पाँच बार नमाज पढ़ते थे। 16 जुलाई को यह विवाद तब और गहराया जब संत-समाज ने समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव से सीधे पूछा कि राम मंदिर चंदा विवाद पर मुखर रहने वाले वे इस मामले में मौन क्यों हैं।
विवादित बयान का मूल
एक वायरल वीडियो में मौलाना जर्जिस अंसारी ने कथित तौर पर कहा कि भगवान कृष्ण मुसलमान थे और दिन में पाँच बार नमाज अदा करते थे। इस दावे को हिंदू धर्माचार्यों ने न केवल तथ्यात्मक रूप से गलत बताया, बल्कि इसे सनातन धर्म की भावनाओं पर सीधा आघात करार दिया। वीडियो के वायरल होने के बाद से धार्मिक और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर प्रतिक्रियाएँ तेज हो गई हैं।
हिंदू संतों की प्रतिक्रिया
अखिल भारतीय हिंदू महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शिशिर चतुर्वेदी ने कहा, 'अब वे दावा कर रहे हैं कि भगवान कृष्ण सच्चे मुसलमान थे, जो दिन में पाँच बार नमाज पढ़ते थे। किसी की हिम्मत नहीं होती कि कुरान या पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ कुछ बोले, क्योंकि तुरंत 'सिर तन से जुदा' के नारे लगने लगते हैं।' उन्होंने उत्तर प्रदेश की योगी सरकार को भी आगाह किया कि यदि इस मामले में कार्रवाई नहीं हुई तो सरकार कमज़ोर दिखेगी।
चतुर्वेदी ने अखिलेश यादव को सीधे संबोधित करते हुए कहा, 'आपके वंश के अनुसार भगवान कृष्ण आपके पूर्वज हैं। तुष्टिकरण की राजनीति छोड़िए। आपके जिले का मौलाना है — कम से कम एफआईआर तो दर्ज करवा दीजिए।'
आगरा के कैलाश मंदिर के महंत निर्मल गिरी ने कहा कि मौलाना जहाँ भी भाषण देते हैं, विशेषकर मुस्लिम समुदाय के बीच, ऐसी बेतुकी बातें करते हैं और सनातन धर्म पर हमले के लिए प्रोपेगेंडा तैयार किया है।
अयोध्या के आर्य संत वरुण दास महाराज ने ऐतिहासिक तथ्यों का हवाला देते हुए कहा कि इस्लाम का उदय लगभग 1,400 वर्ष पूर्व मक्का और मदीना में हुआ, जबकि श्रीकृष्ण का काल उससे हजारों वर्ष पुराना है। उन्होंने माँग की कि मौलवी पर कार्रवाई होनी चाहिए।
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी ने बयान की घोर निंदा करते हुए कहा, 'यह बहुत निंदनीय और दुखद है। मौलाना को माफी माँगनी चाहिए। उन्होंने गीता के श्लोकों का भी सही अध्ययन नहीं किया है। दूसरे धर्मों पर टिप्पणी करने से द्वेष बढ़ेगा।' उन्होंने सरकार से तत्काल कार्रवाई की अपील की।
मुस्लिम धर्मगुरुओं की आपत्ति
उल्लेखनीय है कि मुस्लिम धर्मगुरुओं ने भी मौलाना के बयान से खुद को अलग किया। ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने स्पष्ट किया कि भगवान कृष्ण मुसलमान नहीं थे और नमाज पढ़ने का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने कहा, 'सनातन हजारों साल पुराना है, जबकि इस्लाम लगभग 1,400 साल पहले आया। ऐसे बेबुनियाद दावे गैर-जिम्मेदाराना हैं और धार्मिक भावनाओं को आहत करते हैं।'
अखिलेश यादव पर राजनीतिक दबाव
संत-समाज का निशाना मुख्य रूप से सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर रहा। आलोचकों का कहना है कि जिस तत्परता से उन्होंने राम मंदिर चंदा विवाद पर बयान दिए, उसी तत्परता से उन्हें अपने जिले के मौलाना के बयान पर भी प्रतिक्रिया देनी चाहिए थी। यह प्रकरण ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावों को देखते हुए धार्मिक संवेदनशीलता का मुद्दा राजनीतिक रूप से अत्यंत महत्त्वपूर्ण हो गया है।
आगे क्या होगा
अब तक मौलाना जर्जिस अंसारी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हिंदू संगठनों ने उत्तर प्रदेश पुलिस से एफआईआर दर्ज करने और मौलाना के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करने की माँग की है। यह देखना होगा कि योगी सरकार और सपा — दोनों इस बढ़ते दबाव पर किस तरह प्रतिक्रिया देते हैं।