16 जुलाई 2026
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मौलाना जर्जिस अंसारी के भगवान कृष्ण पर विवादित बयान की विपक्ष ने भी निंदा की, सख्त कार्रवाई की मांग

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मौलाना जर्जिस अंसारी के भगवान कृष्ण पर विवादित बयान की विपक्ष ने भी निंदा की, सख्त कार्रवाई की मांग

सारांश

भगवान श्रीकृष्ण को मुस्लिम बताने के मौलाना जर्जिस अंसारी के कथित बयान ने BJP के साथ-साथ कांग्रेस, सपा और शिवसेना (यूबीटी) को भी एकजुट कर दिया। सभी दलों ने सख्त कार्रवाई की माँग की, लेकिन आरोप-प्रत्यारोप में BJP पर भी निशाना साधा गया।

मुख्य बातें

मौलाना जर्जिस अंसारी ने एक वायरल वीडियो में कथित तौर पर दावा किया कि भगवान श्रीकृष्ण मुस्लिम थे और नमाज पढ़ते थे।
कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने बयान को निंदनीय बताते हुए सख्त कानूनी कार्रवाई की माँग की।
कांग्रेस नेता राकेश सिन्हा ने आरोप लगाया कि ऐसे तत्वों को BJP का संरक्षण प्राप्त है।
शिवसेना (यूबीटी) नेता किशोरी पेडनेकर ने बयान को निंदनीय करार दिया और कहा कि ऐसे दावे बेबुनियाद हैं।
सपा नेता पवन पांडे ने कहा कि सस्ती लोकप्रियता के लिए विवादित बयान देना अनुचित है और सभी को अपनी आस्था की सीमाओं में रहना चाहिए।

नई दिल्ली, 16 जुलाई को मौलाना जर्जिस अंसारी के उस कथित बयान पर विपक्षी दलों ने भी तीखी आपत्ति दर्ज कराई, जिसमें उन्होंने एक वायरल वीडियो में कथित तौर पर दावा किया था कि भगवान श्रीकृष्ण मुस्लिम थे और नमाज पढ़ते थे। इस बयान के सामने आने के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) और साधु-संतों ने समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव को निशाने पर लिया, जिसके बाद सपा ने कहा कि ऐसे लोग सस्ती लोकप्रियता के लिए विवादास्पद बयान देते हैं।

कांग्रेस की प्रतिक्रिया

कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने कहा कि ऐसे बयानों पर टिप्पणी करना भी उचित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि जैसे-जैसे चुनाव नज़दीक आते हैं, BJP समर्थक — चाहे वे स्वयंभू धार्मिक गुरु हों या कट्टरपंथी मौलाना — सामाजिक माहौल बिगाड़ने के लिए ऐसे बयान देते हैं। राजपूत ने माँग की कि ऐसे लोगों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।

कांग्रेस नेता राकेश सिन्हा ने कहा कि जो लोग इस तरह के बयान देते हैं, वे वास्तविक मौलाना नहीं हो सकते। उनके अनुसार, BJP ने कुछ ऐसे तत्वों को संरक्षण दिया है जो पार्टी के एजेंडे को आगे बढ़ाते हुए समाज में विघटन की स्थिति पैदा करते हैं।

शिवसेना (यूबीटी) का कड़ा रुख

शिवसेना (यूबीटी) नेता किशोरी पेडनेकर ने मौलाना के बयान को निंदनीय करार दिया। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इससे पहले एक अन्य व्यक्ति ने दावा किया था कि झाँसी की रानी जैन थीं — उस बयान की भी उन्होंने आलोचना की। पेडनेकर ने कहा कि जब भी कोई विवाद शांत होता है, एक नया मुद्दा सामने आ जाता है, और ऐसे बेबुनियाद दावे करने से पहले लोगों को सोचना चाहिए।

सपा का पक्ष

समाजवादी पार्टी नेता पवन पांडे ने कहा कि मौलाना के बयान को अनावश्यक महत्व नहीं दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने धर्म और आस्था की सीमाओं में रहना चाहिए और सस्ती लोकप्रियता के लिए विवादित बयान देना किसी के लिए भी उचित नहीं है।

राजनीतिक संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में धार्मिक-राजनीतिक ध्रुवीकरण की घटनाएँ लगातार सुर्खियाँ बन रही हैं। गौरतलब है कि इस प्रकार के बयान प्रायः चुनावी माहौल में अधिक सक्रिय होते हैं और सभी प्रमुख दलों को अपनी स्थिति स्पष्ट करने पर मजबूर करते हैं। BJP की ओर से अभी तक इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, हालाँकि पार्टी नेताओं ने सपा को घेरने का प्रयास किया है। आने वाले दिनों में यह विवाद और राजनीतिक आयाम ले सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

ऐसे बयान सुर्खियाँ बनते रहेंगे।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मौलाना जर्जिस अंसारी ने भगवान कृष्ण के बारे में क्या कहा था?
एक वायरल वीडियो में मौलाना जर्जिस अंसारी ने कथित तौर पर दावा किया कि भगवान श्रीकृष्ण मुस्लिम थे और नमाज पढ़ते थे। यह बयान 16 जुलाई को सामने आने के बाद व्यापक राजनीतिक विवाद का कारण बना।
विपक्षी दलों ने इस बयान पर क्या प्रतिक्रिया दी?
कांग्रेस, शिवसेना (यूबीटी) और समाजवादी पार्टी — तीनों ने बयान की निंदा की और सख्त कार्रवाई की माँग उठाई। हालाँकि, कांग्रेस ने BJP पर ऐसे तत्वों को संरक्षण देने का आरोप भी लगाया।
सपा ने मौलाना के बयान पर क्या कहा?
सपा नेता पवन पांडे ने कहा कि ऐसे बयान सस्ती लोकप्रियता के लिए दिए जाते हैं और प्रत्येक व्यक्ति को अपने धर्म व आस्था की सीमाओं में रहना चाहिए। इससे पहले सपा की ओर से भी पार्टी को BJP के निशाने से बचाने के लिए इसी तर्ज पर सफाई दी गई थी।
इस विवाद का राजनीतिक असर क्या हो सकता है?
BJP ने इस बयान को लेकर सपा प्रमुख अखिलेश यादव को घेरने की कोशिश की है। चुनावी माहौल में इस तरह के धार्मिक विवाद ध्रुवीकरण को बढ़ावा दे सकते हैं, और सभी प्रमुख दलों पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने का दबाव बना है।
क्या मौलाना जर्जिस अंसारी के खिलाफ कोई कार्रवाई हुई है?
16 जुलाई तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार, विपक्षी दलों ने सख्त कार्रवाई की माँग की है, लेकिन किसी आधिकारिक कानूनी कदम की पुष्टि नहीं हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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