11 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

हनुमानगढ़ी नमाज विवाद: योगी के बयान पर विपक्ष का पलटवार, सपा-कांग्रेस बोली — भ्रष्टाचार पर जवाब दो

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
हनुमानगढ़ी नमाज विवाद: योगी के बयान पर विपक्ष का पलटवार, सपा-कांग्रेस बोली — भ्रष्टाचार पर जवाब दो

सारांश

हनुमानगढ़ी पर नमाज़ के बयान के बाद सीएम योगी पर विपक्ष का दोहरा हमला — सपा ने बुलडोजर की माँग की तो कांग्रेस ने पूछा: जिस अयोध्या में आप महीने में चार-पाँच बार जाते हैं, वहाँ कथित चोरी कैसे हुई? असली मुद्दा मंदिर-मस्जिद नहीं, जवाबदेही है।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हनुमानगढ़ी पर नमाज़ से जुड़े बयान पर 10 जुलाई को तीखी राजनीतिक प्रतिक्रिया आई।
सपा सांसद रुचि वीरा ने माँग की कि राम मंदिर मामले में दोषियों पर बुलडोजर कार्रवाई हो और जाँच सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में हो।
युवा कांग्रेस उपाध्यक्ष शरद शुक्ला ने आरोप लगाया कि BJP जवाबदेही से बचने के लिए मंदिर-मस्जिद के मुद्दे उठाती है।
विपक्ष का कहना है कि युवाओं की नौकरी, स्वास्थ्य और सड़कों जैसे असली मुद्दों पर सरकार को जवाब देना चाहिए।
सत्तारूढ़ दल की ओर से अभी तक विपक्ष की माँगों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा अयोध्या की हनुमानगढ़ी पर नमाज़ पढ़े जाने से जुड़े बयान ने 10 जुलाई को तीखी राजनीतिक बहस छेड़ दी। जहाँ एक ओर उनके समर्थकों ने इस बयान की सराहना की, वहीं समाजवादी पार्टी (सपा) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के नेताओं ने मुख्यमंत्री पर असली मुद्दों से ध्यान भटकाने का आरोप लगाया।

सपा का पलटवार: विकास की बात करो

समाजवादी पार्टी की सांसद रुचि वीरा ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी को हिंदू-मुस्लिम और जाति-धर्म के मुद्दों से ऊपर उठकर सोचना चाहिए। उन्होंने कहा, 'युवाओं की नौकरी, मरीजों के इलाज, टूटी सड़कों को ठीक करने और विकास पर बात करनी चाहिए।' उनके अनुसार, सीएम योगी का यह बयान जनता का ध्यान बुनियादी समस्याओं से भटकाने की कोशिश है।

सांसद वीरा ने राम मंदिर में कथित अनियमितताओं का भी ज़िक्र किया और माँग की कि इस मामले में शामिल लोगों पर 'सख्त से सख्त कार्रवाई' होनी चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि यदि अन्य मामलों में बुलडोजर कार्रवाई होती है, तो राम मंदिर से जुड़े कथित दोषियों पर भी समान कार्रवाई होनी चाहिए।

जाँच पर सवाल: सुप्रीम कोर्ट की निगरानी की माँग

सांसद रुचि वीरा ने राम मंदिर मामले की जाँच पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि इस जाँच में केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारी शामिल थे, इसलिए उनसे निष्पक्षता की उम्मीद नहीं की जा सकती। उन्होंने माँग की कि सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश इस जाँच की निगरानी करें, तभी सच्चाई सामने आ सकेगी।

कांग्रेस का निशाना: जवाबदेही से बचने का आरोप

उत्तर प्रदेश युवा कांग्रेस के उपाध्यक्ष शरद शुक्ला ने कहा कि अयोध्या के लोग राम मंदिर प्रकरण से काफी दुखी हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जिस जनपद में मुख्यमंत्री खुद हर महीने चार-पाँच बार आते हैं और दर्शन भी करते हैं, वहाँ इतनी बड़ी कथित चोरी कैसे हो गई।

शुक्ला ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) और मुख्यमंत्री योगी जवाबदेही से बचने के लिए मंदिर-मस्जिद के मुद्दे उठाते हैं। उन्होंने कहा, 'जिन पर कार्रवाई होनी चाहिए थी, वे आज भी मंदिर में घूम रहे हैं। भाजपा की नीति ही यही है कि जब कोई सवाल उठे, तो मंदिर-मस्जिद करने लग जाओ।'

राजनीतिक पृष्ठभूमि

यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ पृष्ठभूमि में चल रही हैं। गौरतलब है कि अयोध्या और राम मंदिर से जुड़े मुद्दे राज्य की राजनीति में हमेशा से संवेदनशील रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि धार्मिक मुद्दों पर बयानबाज़ी विपक्ष को भी ध्रुवीकरण की राजनीति में खींचती है।

आगे क्या होगा

विपक्षी दलों की माँग है कि राम मंदिर से जुड़े कथित मामले की जाँच सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में हो। सत्तारूढ़ दल की ओर से अभी तक इस माँग पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार, यह बयानबाज़ी आने वाले हफ्तों में और तेज़ हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसके भीतर एक असली सवाल दबा है — राम मंदिर से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं की जाँच कितनी पारदर्शी है? सपा का बुलडोजर वाला तर्क भले ही चुनावी हो, पर सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी की माँग को खारिज करना सरकार के लिए आसान नहीं होगा। दूसरी ओर, विपक्ष भी इस बहस में उलझकर उन्हीं ध्रुवीकरण की पटरियों पर चल रहा है जिनकी वह आलोचना करता है — असली परीक्षा यह है कि क्या वह विकास और जवाबदेही के मुद्दों को लंबे समय तक केंद्र में रख पाएगा।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हनुमानगढ़ी नमाज़ विवाद क्या है?
यह विवाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उस बयान से जुड़ा है जिसमें उन्होंने अयोध्या की हनुमानगढ़ी पर नमाज़ पढ़े जाने की घटना पर प्रतिक्रिया दी। इस बयान के बाद सपा और कांग्रेस ने उन पर असली मुद्दों से ध्यान भटकाने का आरोप लगाया।
सपा सांसद रुचि वीरा ने क्या माँग की?
सपा सांसद रुचि वीरा ने राम मंदिर मामले में शामिल लोगों पर बुलडोजर कार्रवाई की माँग की और कहा कि इस जाँच में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश शामिल हों, तभी सच्चाई सामने आ सकेगी। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारियों से निष्पक्ष जाँच की उम्मीद नहीं है।
युवा कांग्रेस ने योगी सरकार पर क्या आरोप लगाए?
युवा कांग्रेस उपाध्यक्ष शरद शुक्ला ने आरोप लगाया कि BJP और सीएम योगी जवाबदेही से बचने के लिए मंदिर-मस्जिद के मुद्दे उठाते हैं। उन्होंने सवाल किया कि जिस अयोध्या में मुख्यमंत्री हर महीने चार-पाँच बार जाते हैं, वहाँ कथित बड़ी चोरी कैसे हो गई।
विपक्ष के अनुसार सरकार को किन मुद्दों पर बोलना चाहिए?
विपक्षी नेताओं का कहना है कि सरकार को युवाओं की नौकरी, मरीजों के इलाज, टूटी सड़कों की मरम्मत और समग्र विकास पर ध्यान देना चाहिए। उनके अनुसार धार्मिक मुद्दों पर बयानबाज़ी इन बुनियादी समस्याओं से जनता का ध्यान भटकाती है।
राम मंदिर जाँच में सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी की माँग क्यों उठी?
सपा सांसद रुचि वीरा ने कहा कि राम मंदिर मामले की मौजूदा जाँच में केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारी शामिल हैं, इसलिए उनसे निष्पक्षता संभव नहीं। इसीलिए उन्होंने माँग की कि सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश इस जाँच की निगरानी करें।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 5 घंटे पहले
  2. 7 घंटे पहले
  3. 7 घंटे पहले
  4. 11 घंटे पहले
  5. 3 दिन पहले
  6. 3 सप्ताह पहले
  7. 1 महीना पहले
  8. 1 साल पहले