हिंदू-मुस्लिम मुद्दे ध्रुवीकरण का हथियार, देश के लिए खतरनाक: अबू आजमी का योगी के बयान पर पलटवार
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और विधायक अबू आजमी ने 19 मई 2026 को मुंबई में कहा कि देश में हिंदू-मुस्लिम के मुद्दे जानबूझकर ध्रुवीकरण के लिए उठाए जा रहे हैं और यह प्रवृत्ति देश के लिए गंभीर खतरा है। उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सार्वजनिक सड़कों पर नमाज को लेकर दिए गए बयान, बांद्रा में चले अतिक्रमण-विरोधी अभियान और बकरीद से पहले होने वाली प्रशासनिक बैठकों की प्रकृति पर एक साथ निशाना साधा।
योगी के नमाज बयान पर आजमी की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा सार्वजनिक सड़कों पर नमाज न पढ़ने संबंधी बयान को अबू आजमी ने बहस के योग्य भी नहीं माना। उन्होंने कहा, 'हिंदू-मुस्लिम मुद्दे सिर्फ ध्रुवीकरण करने के लिए उठाए जा रहे हैं, और यह देश के लिए खतरनाक है।' आजमी ने तर्क दिया कि जब देश महंगाई और बेरोज़गारी जैसी बुनियादी समस्याओं से जूझ रहा है, तब इस तरह के बयान असली मुद्दों से ध्यान भटकाने का काम करते हैं। उन्होंने कहा, 'आज देश में हालात बहुत खराब हैं। महंगाई लगातार बढ़ रही है, लोगों के पास रोज़गार नहीं है, और लोगों से कहा जा रहा है कि डीजल-पेट्रोल बचाइए। ऐसे समय में सड़कों पर नमाज को लेकर बयान दिए जा रहे हैं, जबकि दुनिया तेज़ी से आगे बढ़ रही है।'
बांद्रा अतिक्रमण अभियान पर सवाल
बांद्रा में चलाए गए अतिक्रमण-विरोधी अभियान पर आजमी ने कहा कि यदि नागरिकों के पास रहने के लिए उचित व्यवस्था होती, तो वे फुटपाथ या अवैध बस्तियों में नहीं रहते। उन्होंने कहा, 'अच्छी सरकार वही होती है जो हर नागरिक को रहने के लिए जगह दे। अगर गरीबों के छोटे-छोटे घर अवैध बताकर तोड़ दिए जाएंगे तो वे आखिर कहाँ जाएंगे? वे भी इसी देश के नागरिक हैं।' आजमी ने सरकार से इस विषय पर गंभीरता से विचार करने की माँग की।
बुलडोजर कार्रवाई पर तीखा हमला
आजमी ने बुलडोजर कार्रवाई को लेकर भी आलोचना की। उनका कहना था कि उत्तर प्रदेश से शुरू हुई यह कार्रवाई अब एक 'फैशन' बन चुकी है और इसे पूरी तरह बंद होना चाहिए। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में बुलडोजर कार्रवाइयों को लेकर न्यायिक और राजनीतिक बहस तेज़ हो रही है।
बकरीद बैठक पर नाराज़गी
बकरीद से पहले होने वाली प्रशासनिक बैठकों को लेकर भी अबू आजमी ने असंतोष जताया। उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में मुख्यमंत्री, पुलिस कमिश्नर और विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ विस्तृत बैठक होती थी, लेकिन इस बार बैठक बहुत संक्षिप्त रखी गई। उन्होंने यह भी कहा कि पशु परिवहन और वाहन जाँच के नाम पर कुछ लोग गौ-रक्षा की आड़ में गुंडागर्दी करते हैं, जो स्वीकार्य नहीं है।
व्यापक राजनीतिक संदर्भ
गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण और अल्पसंख्यक अधिकारों को लेकर राजनीतिक बहस तेज़ है। आलोचकों का कहना है कि धार्मिक मुद्दों को चुनावी मौसम में बार-बार उठाया जाता है। आजमी के बयान को महाराष्ट्र की राजनीति में विपक्ष की उस व्यापक रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है जो सत्तारूढ़ गठबंधन पर 'असली मुद्दों से भटकाव' का आरोप लगाती है। आने वाले दिनों में इस बयान पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ और तेज़ होने की संभावना है।