सीएम योगी के नमाज बयान पर कांग्रेस का पलटवार: 'BJP जनता को गुमराह कर रही है, महंगाई-बेरोजगारी से ध्यान भटका रहे'
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा सड़क पर नमाज को लेकर दिए गए बयान पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। 19 मई को लखनऊ में कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) असल मुद्दों — महंगाई, बेरोजगारी और पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों — से जनता का ध्यान भटकाने के लिए विवादित बयानों का सहारा ले रही है।
तनुज पुनिया की प्रतिक्रिया
कांग्रेस सांसद तनुज पुनिया ने कहा कि योगी आदित्यनाथ की राजनीति सिर्फ धर्म के इर्द-गिर्द घूमती है। उन्होंने कहा, 'सड़कों पर नियमित धार्मिक सभाओं की अनुमति नहीं होनी चाहिए — चाहे वे हिंदुओं, मुसलमानों या किसी अन्य धर्म से संबंधित हों। लेकिन किसी विशेष पर्व या अवसर पर उचित व्यवस्था के साथ कुछ छूट दी जा सकती है।'
राज्य में हो रहे एनकाउंटरों पर भी पुनिया ने सवाल उठाए और कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि किसके एनकाउंटर हो रहे हैं और क्या निर्दोष लोगों को निशाना बनाया जा रहा है।
अजय कुमार लल्लू का हमला
कांग्रेस नेता अजय कुमार लल्लू ने कहा कि BJP नेता देश और प्रदेश को गुमराह करने में लगे हैं। उन्होंने कहा कि पेट्रोल-डीजल, खाद और रसोई गैस के लिए जनता लाइनों में खड़ी है, हर वर्ग महंगाई की मार झेल रहा है। लल्लू के अनुसार, 'देश का ध्यान भटकाने के लिए इस तरह के विवादित बयान दिए जा रहे हैं।'
उन्होंने पेट्रोल-डीजल की हालिया मूल्यवृद्धि को BJP की नाकामी बताते हुए कहा कि यूपी की जनता बेरोजगारी, महंगाई और खाद की किल्लत से जूझ रही है, जबकि सरकार असल मुद्दों पर चर्चा करने से बच रही है।
अखिलेश प्रताप सिंह के सवाल
कांग्रेस नेता अखिलेश प्रताप सिंह ने सरकार से पूछा कि वह नौकरियों, शिक्षक भर्ती, पेपर लीक-मुक्त परीक्षाओं और कानून-व्यवस्था सुधार पर बात क्यों नहीं करती। उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश अपराध के मामलों में और महिलाओं के विरुद्ध अपराध में देश में पहले स्थान पर आ चुका है।
सिंह ने नीट पेपर लीक मामले का भी उल्लेख किया और कहा कि BJP सरकार में तीसरी बार नीट का पेपर लीक हुआ है, और कोई भी परीक्षा ठीक से सम्पन्न नहीं हो पा रही।
राजनीतिक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावों को लेकर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ रही है। आलोचकों का कहना है कि धार्मिक मुद्दों पर बयानबाजी अक्सर चुनावी मौसम में तेज होती है। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से इस विषय पर अभी तक कोई आधिकारिक विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।