दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे साहित्य महोत्सव 2026: यूनेस्को विरासत स्थल पर चार दिनी सांस्कृतिक उत्सव संपन्न
सारांश
मुख्य बातें
पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे ने 15 से 18 मई 2026 के बीच दार्जिलिंग और कुर्सियोंग में 'दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे साहित्य महोत्सव 2026' का सफल आयोजन किया, जिसमें यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे (DHR) की औद्योगिक विरासत को हिमालयी क्षेत्र की समृद्ध साहित्यिक और मौखिक परंपराओं से जोड़ा गया। इस चार दिवसीय महोत्सव में लेखकों, कलाकारों, छात्रों और स्थानीय समुदाय की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखी गई।
महोत्सव का स्वरूप और आयोजन
यह महोत्सव दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे द्वारा 'पोएट्स ऑफ कम्युनिटी' नामक रचनात्मक समूह के सहयोग से आयोजित किया गया। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी कपिनजल किशोर शर्मा ने बताया कि महोत्सव का उद्देश्य DHR की विरासत और हिमालयी समुदायों की सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों को एक साझा मंच पर लाना था।
कार्यक्रम कुर्सियोंग और दार्जिलिंग — दोनों स्थानों पर आयोजित हुए, जिनमें क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों से प्रतिभागी शामिल हुए।
मुख्य कार्यक्रम और कार्यशालाएँ
उद्घाटन दिवस पर कुर्सियोंग के विक्टोरिया बॉयज स्कूल में प्रख्यात लेखिका और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, रुड़की की पूर्व छात्रा मेघा मित्तल ने 'कविता उबाऊ क्यों है?' शीर्षक से एक विशेष कार्यशाला का संचालन किया। इस कार्यशाला में छात्रों को कविता को एक समकालीन और अभिव्यंजक कला रूप के रूप में समझने के लिए प्रेरित किया गया।
इसके बाद कुर्सियोंग के कैफे डी सेंट्रल में एक संवादात्मक लोककथा और कहानी-सुनाने का सत्र आयोजित हुआ, जिसमें हिमालयी समुदायों की मौखिक परंपराओं और लोक कथाओं को जीवंत किया गया। यह सत्र विशेष रूप से युवा प्रतिभागियों के बीच लोकप्रिय रहा।
समापन समारोह
18 मई 2026 को भव्य समापन समारोह और प्रमाण पत्र वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें छात्रों, युवाओं, लेखकों, कलाकारों और स्थानीय समुदाय के सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
शर्मा के अनुसार, साहित्य, संगीत, कथावाचन और सामुदायिक सहभागिता के इस जीवंत मिश्रण ने एक सार्थक सांस्कृतिक मंच का निर्माण किया, जिसने क्षेत्र की विविध कलात्मक और साहित्यिक विरासत को प्रभावी ढंग से उजागर किया।
विरासत संरक्षण में रेलवे की भूमिका
गौरतलब है कि दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे को 1999 में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल का दर्जा मिला था। यह महोत्सव इस विरासत को केवल यात्रा और पर्यटन तक सीमित न रखकर, साहित्य और संस्कृति के माध्यम से नई पीढ़ी से जोड़ने का एक उल्लेखनीय प्रयास है। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे का यह कदम रेलवे के बुनियादी ढाँचे को सांस्कृतिक पुनरुद्धार के साधन के रूप में उपयोग करने की दिशा में एक नई मिसाल कायम करता है।
आगे की राह
इस महोत्सव की सफलता को देखते हुए, रेलवे अधिकारियों से आगामी वर्षों में इस आयोजन को और विस्तार देने की उम्मीद की जा रही है। हिमालयी क्षेत्र की बहुभाषिक और बहुसांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने में इस तरह के मंच दीर्घकालिक भूमिका निभा सकते हैं।