अबू आजमी का बड़ा बयान: हिंदू-मुस्लिम मुद्दे ध्रुवीकरण के लिए उठाए जा रहे, देश के लिए खतरनाक
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रदेश अध्यक्ष और विधायक अबू आजमी ने 19 मई 2025 को मुंबई में तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि देश में हिंदू-मुस्लिम के मुद्दे जानबूझकर ध्रुवीकरण के लिए उठाए जा रहे हैं और यह प्रवृत्ति राष्ट्र के लिए अत्यंत खतरनाक है। उनकी यह टिप्पणी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सार्वजनिक सड़कों पर नमाज न अदा करने संबंधी बयान, बांद्रा में चलाए गए अतिक्रमण-विरोधी अभियान और बकरीद से पूर्व आयोजित प्रशासनिक बैठकों की पृष्ठभूमि में आई।
योगी के नमाज बयान पर प्रतिक्रिया
आजमी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नमाज संबंधी बयान को 'बहस के योग्य मुद्दा' ही नहीं माना। उन्होंने कहा, 'हिंदू-मुस्लिम मुद्दे सिर्फ ध्रुवीकरण करने के लिए उठाए जा रहे हैं, और यह देश के लिए खतरनाक है। आज देश में हालात बहुत खराब हैं। महंगाई लगातार बढ़ रही है, लोगों के पास रोजगार नहीं है, और लोगों से कहा जा रहा है कि डीजल-पेट्रोल बचाइए। ऐसे समय में सड़कों पर नमाज को लेकर बयान दिए जा रहे हैं, जबकि दुनिया तेजी से आगे बढ़ रही है।'
यह ऐसे समय में आया है जब देश में महंगाई और बेरोजगारी को लेकर विपक्षी दल सरकार पर लगातार निशाना साध रहे हैं। आजमी का तर्क है कि इन असली समस्याओं से जनता का ध्यान भटकाने के लिए सांप्रदायिक मुद्दों को हवा दी जा रही है।
बांद्रा अतिक्रमण अभियान पर सवाल
बांद्रा में चलाए गए अतिक्रमण-विरोधी अभियान पर भी आजमी ने सरकार की कार्रवाई पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि यदि लोग इस देश के नागरिक हैं, तो उनके पास रहने के लिए घर होना उनका अधिकार है।
आजमी ने कहा, 'अगर लोगों के पास रहने के लिए सही जगह होती तो कोई फुटपाथ पर नहीं रहता और न ही अवैध घर बनाता। अच्छी सरकार वही होती है जो हर नागरिक को रहने के लिए जगह दे। अगर गरीबों के छोटे-छोटे घर अवैध बताकर तोड़ दिए जाएंगे तो वे आखिर कहां जाएंगे? वे भी इसी देश के नागरिक हैं। सरकार को इस बारे में सोचना चाहिए।'
बुलडोजर कार्रवाई पर तीखा हमला
आजमी ने बुलडोजर कार्रवाई को लेकर भी अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश से शुरू हुई यह कार्रवाई अब 'फैशन' बन गई है और इसे पूरी तरह बंद किया जाना चाहिए। गौरतलब है कि बुलडोजर कार्रवाई को लेकर विपक्षी दल पहले भी कई मौकों पर सरकार को घेर चुके हैं और सर्वोच्च न्यायालय भी इस विषय पर टिप्पणी कर चुका है।
बकरीद से पहले बैठकों का मुद्दा
बकरीद से पूर्व आयोजित प्रशासनिक बैठकों को लेकर भी आजमी ने असंतोष व्यक्त किया। उनके अनुसार, हर साल मुख्यमंत्री, कमिश्नर और सभी विभागों के अधिकारियों के साथ विस्तृत बैठक होती थी, किंतु इस बार बैठक को बहुत संक्षिप्त रखा गया।
उन्होंने यह भी कहा कि हर साल वाहनों और अधिक संख्या में पशुओं के परिवहन को लेकर पुलिस जांच की बात होती है, लेकिन कुछ लोग गौ-रक्षा के नाम पर गुंडागर्दी करते हैं। आलोचकों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंचाती हैं।
आगे क्या
आजमी की इस प्रतिक्रिया से महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर सांप्रदायिक ध्रुवीकरण बनाम विकास के मुद्दे की बहस तेज होने की संभावना है। यह देखना होगा कि सत्तारूढ़ गठबंधन इन आरोपों का किस प्रकार जवाब देता है और बकरीद से पहले प्रशासनिक तैयारियां किस दिशा में आगे बढ़ती हैं।