10 जुलाई 2026
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हनुमानगढ़ी 'नमाज' विवाद: सपा सांसद का योगी पर पलटवार, BJP रोड शो में हनुमान वेश पर उठाए सवाल

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हनुमानगढ़ी 'नमाज' विवाद: सपा सांसद का योगी पर पलटवार, BJP रोड शो में हनुमान वेश पर उठाए सवाल

सारांश

CM योगी के हनुमानगढ़ी में 'नमाज' पढ़वाने के आरोप पर सपा ने पलटवार किया — और BJP के अपने रोड शो में हनुमान वेशधारी कलाकार के नृत्य का आईना दिखा दिया। यह विवाद उत्तर प्रदेश में धर्म और राजनीति के उलझते तारों की एक और कड़ी है।

मुख्य बातें

CM योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या में दावा किया कि पूर्ववर्ती सरकारों ने हनुमानगढ़ी मंदिर में 'नमाज' पढ़वाई थी।
यह संदर्भ कथित तौर पर नवंबर 2003 की एक घटना से जुड़ा है, जब पुलिस ने मंदिर के बाहर नमाज की अनुमति नहीं दी थी।
सपा सांसद सनातन पांडे ने BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के लखनऊ रोड शो में हनुमान वेश में कलाकार के नृत्य का वीडियो उठाकर पलटवार किया।
सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने आरोप लगाया कि योगी विकास के मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए ऐसे बयान देते हैं।
सपा प्रमुख अखिलेश यादव के 'सनातन = समाजवाद' के बयान का पांडे ने समर्थन किया।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हनुमानगढ़ी मंदिर में 'नमाज' पढ़वाए जाने के आरोप पर 10 जुलाई को सियासी घमासान तेज हो गया, जब समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद सनातन पांडे ने उन पर तीखा पलटवार किया। पांडे ने साथ ही उस वायरल वीडियो पर भी सवाल खड़े किए, जिसमें लखनऊ में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के रोड शो के दौरान हनुमान के वेश में एक कलाकार को नृत्य करते देखा गया था।

मुख्यमंत्री योगी का बयान और उसकी पृष्ठभूमि

अयोध्या दौरे पर एक जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, "अयोध्या आने वाले तीर्थयात्री सरयू का आशीर्वाद नहीं ले पाते थे क्योंकि वहाँ उचित व्यवस्था नहीं थी और गंदगी ही उसकी पहचान बन गई थी। जो लोग आज आस्था की बात करते हैं, उन्होंने हमारे पवित्र हनुमानगढ़ी में 'नमाज' भी पढ़वाई थी। जरा इसके बारे में सोचिए। कल्पना कीजिए। क्या कोई कभी जामा मस्जिद के अंदर हनुमान चालीसा का पाठ कर सकता है? क्या कोई सरकार, सपा या कांग्रेस ऐसा करवा सकती है? अगर नहीं, तो फिर हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर 'नमाज' पढ़ने का पाप क्यों होने दिया गया? इसके लिए कौन जिम्मेदार था?"

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री कथित तौर पर नवंबर 2003 की एक घटना का संदर्भ दे रहे थे, जब हनुमानगढ़ी के बाहर 'नमाज' पढ़ने का प्रयास किया गया था। हालाँकि, स्थानीय पुलिस ने उस समय अनुमति नहीं दी थी।

सपा का पलटवार: BJP रोड शो में हनुमान वेश पर सवाल

सपा सांसद सनातन पांडे ने मुख्यमंत्री के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "ये लोग भगवान राम और हनुमान के खिलाफ हैं। जब भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष लखनऊ आए थे, तो उनके सामने हनुमान से नृत्य करवाया जा रहा था। आरएसएस और भाजपा के ये नेता कौन होते हैं जो यह दावा करते हैं कि वे भगवान राम और हनुमान को समझते हैं?"

पांडे ने आगे कहा, "आरएसएस और भाजपा से जुड़े लोगों ने कभी भी लोगों की आस्था का सच्चा सम्मान नहीं किया। उनका काम झूठ फैलाना, आस्था के नाम पर चंदा इकट्ठा करना और फिर उस चंदे में हेराफेरी करना है। अगर उन्हें हनुमान चालीसा और रामभक्त हनुमान के चरित्र की इतनी समझ है, तो राष्ट्रीय अध्यक्ष के दौरे के दौरान ऐसी हरकतें क्यों होने दी गईं?"

सनातन धर्म और समाजवाद पर सपा का रुख

सपा प्रमुख अखिलेश यादव के इस कथन का समर्थन करते हुए कि 'सनातन, समाजवाद के बराबर है', पांडे ने कहा कि यह देश सिर्फ हिंदुओं या मुसलमानों का नहीं, बल्कि सनातन धर्म की धरती है, जिसने सदैव एकता और सामाजिक सद्भाव के लिए काम किया है। उन्होंने यह भी कहा कि 'सनातन धर्म' ने जातिगत भेदभाव मिटाने और मिल-जुलकर रहने की भावना को बढ़ावा दिया है। पांडे के अनुसार, "अगर कोई सच में समाजवादी है, तो वे सनातन धर्म को मानने वाले लोग हैं और इसमें ब्राह्मण समुदाय ने अहम भूमिका निभाई है।"

अवधेश प्रसाद की आलोचना: विकास से ध्यान भटकाने का आरोप

सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने भी मुख्यमंत्री के बयान पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा, "उन्होंने विकास, सड़कों या अस्पतालों के बारे में कोई बात नहीं की। ऐसा लगता है कि उन्हें बस इस बात की चिंता है कि एक नेता के तौर पर उन्होंने जो छवि बनाई है, वह कमजोर न पड़ जाए। इसीलिए मुख्यमंत्री योगी ऐसे बेबुनियाद बयान देते हैं।"

आगे क्या

यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब उत्तर प्रदेश में धार्मिक और राजनीतिक ध्रुवीकरण की बहस तेज है। सपा और BJP के बीच यह वाकयुद्ध आने वाले दिनों में और गहराने की संभावना है, खासकर तब जब दोनों दल अयोध्या और धार्मिक आस्था को अपने-अपने राजनीतिक आख्यान का केंद्र बनाने में जुटे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बाहर की थी, और पुलिस ने उसे रोका भी था। फिर भी इसे 'पाप' के रूप में प्रस्तुत करना स्पष्ट रूप से एक चुनावी आख्यान है। सपा का पलटवार भी उतना ही प्रतीकात्मक है — हनुमान वेश वाला वीडियो असल में एक सांस्कृतिक कार्यक्रम था, न कि धार्मिक अपमान। दोनों पक्ष धर्म को ढाल बनाकर जनता का ध्यान शासन के सवालों से हटा रहे हैं। उत्तर प्रदेश में जब रोजगार, कानून-व्यवस्था और किसान संकट जैसे मुद्दे प्रासंगिक हों, तब यह 'मंदिर बनाम मस्जिद' का फ्रेम मुख्यधारा की राजनीतिक बहस को उथला बनाता है।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

CM योगी ने हनुमानगढ़ी में 'नमाज' को लेकर क्या कहा?
CM योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या में एक सभा में दावा किया कि पूर्ववर्ती सरकारों ने हनुमानगढ़ी मंदिर में 'नमाज' पढ़वाई थी। वे कथित तौर पर नवंबर 2003 की एक घटना का संदर्भ दे रहे थे, जब मंदिर के बाहर नमाज पढ़ने का प्रयास हुआ था, लेकिन पुलिस ने अनुमति नहीं दी थी।
सपा ने BJP के रोड शो में हनुमान वेश पर क्यों सवाल उठाए?
सपा सांसद सनातन पांडे ने एक वायरल वीडियो का हवाला दिया, जिसमें लखनऊ में BJP राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के रोड शो के दौरान हनुमान के वेश में एक कलाकार नृत्य कर रहा था। पांडे ने इसे धार्मिक आस्था के प्रति BJP के असली रवैये का प्रमाण बताया।
सनातन पांडे ने 'सनातन धर्म और समाजवाद' पर क्या कहा?
सपा सांसद सनातन पांडे ने अखिलेश यादव के 'सनातन, समाजवाद के बराबर है' वाले बयान का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि यह देश सनातन धर्म की धरती है, जिसने हमेशा एकता और सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा दिया है।
सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने योगी के बयान पर क्या कहा?
अवधेश प्रसाद ने आरोप लगाया कि CM योगी ने अपनी सभा में विकास, सड़क या अस्पताल जैसे मुद्दों पर कुछ नहीं कहा। उनके अनुसार, योगी केवल अपनी राजनीतिक छवि बचाने के लिए ऐसे बेबुनियाद बयान देते हैं।
नवंबर 2003 की हनुमानगढ़ी घटना क्या थी?
नवंबर 2003 में हनुमानगढ़ी मंदिर के बाहर कथित तौर पर नमाज पढ़ने का प्रयास किया गया था। हालाँकि, स्थानीय पुलिस ने उस समय इसकी अनुमति नहीं दी थी। CM योगी के हालिया बयान में इसी घटना का संदर्भ माना जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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