हनुमानगढ़ी 'नमाज' विवाद: सपा सांसद का योगी पर पलटवार, BJP रोड शो में हनुमान वेश पर उठाए सवाल
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हनुमानगढ़ी मंदिर में 'नमाज' पढ़वाए जाने के आरोप पर 10 जुलाई को सियासी घमासान तेज हो गया, जब समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद सनातन पांडे ने उन पर तीखा पलटवार किया। पांडे ने साथ ही उस वायरल वीडियो पर भी सवाल खड़े किए, जिसमें लखनऊ में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के रोड शो के दौरान हनुमान के वेश में एक कलाकार को नृत्य करते देखा गया था।
मुख्यमंत्री योगी का बयान और उसकी पृष्ठभूमि
अयोध्या दौरे पर एक जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, "अयोध्या आने वाले तीर्थयात्री सरयू का आशीर्वाद नहीं ले पाते थे क्योंकि वहाँ उचित व्यवस्था नहीं थी और गंदगी ही उसकी पहचान बन गई थी। जो लोग आज आस्था की बात करते हैं, उन्होंने हमारे पवित्र हनुमानगढ़ी में 'नमाज' भी पढ़वाई थी। जरा इसके बारे में सोचिए। कल्पना कीजिए। क्या कोई कभी जामा मस्जिद के अंदर हनुमान चालीसा का पाठ कर सकता है? क्या कोई सरकार, सपा या कांग्रेस ऐसा करवा सकती है? अगर नहीं, तो फिर हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर 'नमाज' पढ़ने का पाप क्यों होने दिया गया? इसके लिए कौन जिम्मेदार था?"
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री कथित तौर पर नवंबर 2003 की एक घटना का संदर्भ दे रहे थे, जब हनुमानगढ़ी के बाहर 'नमाज' पढ़ने का प्रयास किया गया था। हालाँकि, स्थानीय पुलिस ने उस समय अनुमति नहीं दी थी।
सपा का पलटवार: BJP रोड शो में हनुमान वेश पर सवाल
सपा सांसद सनातन पांडे ने मुख्यमंत्री के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "ये लोग भगवान राम और हनुमान के खिलाफ हैं। जब भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष लखनऊ आए थे, तो उनके सामने हनुमान से नृत्य करवाया जा रहा था। आरएसएस और भाजपा के ये नेता कौन होते हैं जो यह दावा करते हैं कि वे भगवान राम और हनुमान को समझते हैं?"
पांडे ने आगे कहा, "आरएसएस और भाजपा से जुड़े लोगों ने कभी भी लोगों की आस्था का सच्चा सम्मान नहीं किया। उनका काम झूठ फैलाना, आस्था के नाम पर चंदा इकट्ठा करना और फिर उस चंदे में हेराफेरी करना है। अगर उन्हें हनुमान चालीसा और रामभक्त हनुमान के चरित्र की इतनी समझ है, तो राष्ट्रीय अध्यक्ष के दौरे के दौरान ऐसी हरकतें क्यों होने दी गईं?"
सनातन धर्म और समाजवाद पर सपा का रुख
सपा प्रमुख अखिलेश यादव के इस कथन का समर्थन करते हुए कि 'सनातन, समाजवाद के बराबर है', पांडे ने कहा कि यह देश सिर्फ हिंदुओं या मुसलमानों का नहीं, बल्कि सनातन धर्म की धरती है, जिसने सदैव एकता और सामाजिक सद्भाव के लिए काम किया है। उन्होंने यह भी कहा कि 'सनातन धर्म' ने जातिगत भेदभाव मिटाने और मिल-जुलकर रहने की भावना को बढ़ावा दिया है। पांडे के अनुसार, "अगर कोई सच में समाजवादी है, तो वे सनातन धर्म को मानने वाले लोग हैं और इसमें ब्राह्मण समुदाय ने अहम भूमिका निभाई है।"
अवधेश प्रसाद की आलोचना: विकास से ध्यान भटकाने का आरोप
सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने भी मुख्यमंत्री के बयान पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा, "उन्होंने विकास, सड़कों या अस्पतालों के बारे में कोई बात नहीं की। ऐसा लगता है कि उन्हें बस इस बात की चिंता है कि एक नेता के तौर पर उन्होंने जो छवि बनाई है, वह कमजोर न पड़ जाए। इसीलिए मुख्यमंत्री योगी ऐसे बेबुनियाद बयान देते हैं।"
आगे क्या
यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब उत्तर प्रदेश में धार्मिक और राजनीतिक ध्रुवीकरण की बहस तेज है। सपा और BJP के बीच यह वाकयुद्ध आने वाले दिनों में और गहराने की संभावना है, खासकर तब जब दोनों दल अयोध्या और धार्मिक आस्था को अपने-अपने राजनीतिक आख्यान का केंद्र बनाने में जुटे हैं।