भाजपा की राजनीति सिर्फ धर्म तक सीमित: कांग्रेस सांसद तनुज पुनिया का योगी की नमाज टिप्पणी पर पलटवार
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस सांसद तनुज पुनिया ने 19 मई को लखनऊ में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सड़कों पर नमाज पढ़ने से जुड़ी टिप्पणियों पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) की राजनीति केवल धर्म के इर्द-गिर्द केंद्रित रहती है। पुनिया ने यह भी स्पष्ट किया कि सड़कों पर नियमित धार्मिक सभाओं की अनुमति किसी भी धर्म के लिए नहीं होनी चाहिए।
पुनिया का BJP पर सीधा हमला
तनुज पुनिया ने कहा, 'उनकी राजनीति सिर्फ धर्म के इर्द-गिर्द घूमती है। वे धर्म के नाम पर कुछ भी कह सकते हैं।' उन्होंने आगे जोड़ा कि सड़कों पर नियमित धार्मिक सभाओं की अनुमति नहीं होनी चाहिए — चाहे वे हिंदुओं, मुसलमानों या किसी अन्य धर्म से जुड़ी हों। हालाँकि उन्होंने यह भी माना कि किसी विशेष त्योहार या अवसर पर उचित व्यवस्था के साथ कुछ छूट दी जा सकती है।
एनकाउंटर पर उठाए सवाल
राज्य में हो रहे पुलिस एनकाउंटरों पर पुनिया ने सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार को यह भी बताना चाहिए कि किसके एनकाउंटर हो रहे हैं और क्या बेगुनाह लोगों को निशाना बनाया जा रहा है। उनके अनुसार, 'एनकाउंटर से बेहतर है कि अपराधियों के नेटवर्क की जानकारी निकाली जाए।'
अजय कुमार लल्लू की तीखी प्रतिक्रिया
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अजय कुमार लल्लू ने कहा कि उत्तर प्रदेश महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामलों में देश में पहले स्थान पर है। उन्होंने यह भी कहा कि दिहाड़ी मजदूर और व्यापारी कर्ज की वजह से आत्महत्या कर रहे हैं और सरकार को इस गंभीर मुद्दे पर ठोस कदम उठाने चाहिए। लल्लू ने कहा, 'राज्य को सिर्फ फिल्मी डायलॉग्स से नहीं चलाया जा सकता।'
योगी आदित्यनाथ ने क्या कहा था
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को उत्तर प्रदेश की बदली तस्वीर का जिक्र करते हुए कहा था कि पिछली सरकारों में यह राज्य कट्टा-बम, दंगे और माफिया संस्कृति के लिए जाना जाता था, जबकि आज यूपी की पहचान ब्रह्मोस मिसाइल, डिफेंस कॉरिडोर, एक्सप्रेस-वे, अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों और निवेश गंतव्य के रूप में है। उन्होंने सड़क पर नमाज पढ़ने के मुद्दे पर स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा, 'नमाज पढ़नी है तो शिफ्ट में पढ़िए, हम रोकेंगे नहीं, लेकिन सड़क पर इसकी इजाजत नहीं दी जा सकती।'
आगे क्या
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब उत्तर प्रदेश में सार्वजनिक स्थानों पर धार्मिक गतिविधियों को लेकर राजनीतिक तनाव बढ़ रहा है। गौरतलब है कि यह मुद्दा आगामी चुनावी माहौल में और अधिक तूल पकड़ सकता है। विपक्ष की आलोचना और सत्ता पक्ष के कड़े रुख के बीच राज्य में सार्वजनिक व्यवस्था और धार्मिक स्वतंत्रता की बहस तेज होती दिख रही है।