सनातन धर्म सबका नहीं: CM योगी के बयान पर कांग्रेस नेता हुसैन दलवाई की तीखी प्रतिक्रिया
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस नेता हुसैन दलवाई ने 6 मई को मुंबई में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की 'सनातन धर्म' संबंधी टिप्पणी पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सनातन धर्म देश के सभी लोगों का धर्म नहीं है। यह बयान उस समय आया जब पश्चिम बंगाल चुनाव परिणामों के बाद राजनीतिक माहौल पहले से ही गर्म था।
योगी आदित्यनाथ का मूल बयान
पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की जीत के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दावा किया था कि सनातन धर्म का अपमान करने वालों की हार हुई है। उन्होंने कहा था कि "सनातन का अपमान करने वालों का सूपड़ा-साफ होगा।" इसी बयान पर कांग्रेस नेता दलवाई ने तीखी प्रतिक्रिया दी।
दलवाई की दलील: हिंदू धर्म और सनातन धर्म अलग
राष्ट्र प्रेस से बातचीत में हुसैन दलवाई ने कहा, "सनातन धर्म देश के सभी लोगों का धर्म नहीं है। हिंदू धर्म अलग है, सनातन धर्म अलग है। हिंदू धर्म में साधु-संत बड़े पैमाने पर होते हैं। महाराष्ट्र में तो बड़ी परंपरा है। हिंदू धर्म उदार धर्म है। सनातन धर्म में जाति व्यवस्था है और जाति व्यवस्था मानने वाले सनातन धर्म की बात करते हैं।" उनका यह बयान उस व्यापक राजनीतिक बहस का हिस्सा है जो 'सनातन' शब्द की परिभाषा और उसके राजनीतिक इस्तेमाल को लेकर देशभर में चल रही है।
ममता बनर्जी के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया
कांग्रेस नेता ने पश्चिम बंगाल में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से इनकार पर भी प्रतिक्रिया दी। दलवाई ने कहा, "कानूनी तौर पर उन्हें इस्तीफा देना चाहिए। अगर वह इस्तीफा नहीं देती हैं तो आगे क्या करेंगी, यह स्पष्ट नहीं है।" हालाँकि, उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा ममता को दिए गए समर्थन की सराहना करते हुए कहा कि 'इंडिया' गठबंधन को मज़बूत बनाने के लिए सभी विपक्षी दलों को एकजुट होकर संघर्ष करना होगा।
चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप
दलवाई ने ममता बनर्जी की हार को लेकर चुनाव आयोग पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा, "ऐसा नहीं कि वह हारी हैं, उन्हें हर तरीके का घपला करके हराया गया है। चुनाव आयोग इसका जिम्मेदार है। मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाकर उनके खिलाफ जांच कराई जानी चाहिए।" गौरतलब है कि विपक्षी दल पहले भी भारत निर्वाचन आयोग (ECI) की निष्पक्षता पर सवाल उठाते रहे हैं।
लोकतंत्र और संविधान पर चेतावनी
दलवाई ने आगे कहा, "अगर इसी तरह देश चलेगा तो यहां संविधान और लोकतंत्र नहीं रहेगा, यहां फासीवाद रहेगा। आरएसएस वाले फासीवाद फैला रहे हैं।" यह बयान ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दल केंद्र सरकार और उससे जुड़े संगठनों पर लगातार हमलावर हैं। आने वाले दिनों में इस राजनीतिक विवाद के और तीखे होने की संभावना है।