राम मंदिर दान चोरी पर सपा सांसद रुचि वीरा की माँग: सुप्रीम कोर्ट कराए निष्पक्ष जाँच, दोषियों पर हो सख्त कार्रवाई
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी (सपा) की सांसद रुचि वीरा ने 19 जून को मुरादाबाद में मीडिया से बात करते हुए राम मंदिर दान एवं पत्थर चोरी विवाद को अत्यंत गंभीर बताया और सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में निष्पक्ष जाँच की माँग की। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल एक साधारण चोरी नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से सीधे जुड़ा हुआ है। इसके अलावा उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर विपक्षी दलों को तोड़ने का आरोप लगाया और कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर के बयानों को बेबुनियाद करार दिया।
राम मंदिर दान चोरी: क्या है मामला
रुचि वीरा ने कहा कि अयोध्या में सैकड़ों करोड़ रुपये मूल्य के पत्थर चोरी होने की खबरें सामने आई हैं और जिन लोगों पर आरोप लगाए जा रहे हैं, वे कथित तौर पर मंदिर प्रबंधन से जुड़े बताए जा रहे हैं। उन्होंने इसे 'डकैती' की श्रेणी में रखने की बात कही। सांसद ने कहा कि देशभर के श्रद्धालुओं ने भगवान राम के मंदिर निर्माण के लिए अपनी भावना और आस्था से चंदा दिया था — यदि उस धन या सामग्री का दुरुपयोग हुआ है, तो यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।
उन्होंने स्पष्ट रूप से माँग की कि सर्वोच्च न्यायालय इस मामले में हस्तक्षेप करे, निष्पक्ष जाँच सुनिश्चित करे और दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई हो। यह ऐसे समय में आया है जब राम मंदिर से जुड़े वित्तीय प्रबंधन पर विभिन्न राजनीतिक दलों की नज़र लगातार बनी हुई है।
भाजपा पर विपक्ष तोड़ने का आरोप
तृणमूल कांग्रेस (TMC) और शिवसेना (UBT) के कुछ सांसदों द्वारा अलग रुख अपनाने तथा दलों में कथित टूट की खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए रुचि वीरा ने BJP पर निशाना साधा। उनका कहना था कि जहाँ जनता BJP को नहीं चुनती, वहाँ वह राजनीतिक दलों को तोड़ने जैसी गतिविधियों का सहारा लेती है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि समाजवादी पार्टी की स्थिति बिल्कुल अलग है। उनके शब्दों में — समाजवादी पार्टी को TMC समझने की भूल न की जाए और उत्तर प्रदेश को बंगाल समझने की गलती भी नहीं होनी चाहिए।
ओम प्रकाश राजभर के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया
उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर द्वारा उन्हें BJP में शामिल होने की सलाह दिए जाने की खबरों पर रुचि वीरा ने कहा कि राजभर की बातों को गंभीरता से लेने की कोई आवश्यकता नहीं है और ये बातें पूरी तरह बेबुनियाद हैं।
उन्होंने उलटा दावा किया कि विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार BJP के कई नेता समाजवादी पार्टी में शामिल होने की इच्छा रखते हैं — और यहाँ तक कि स्वयं ओम प्रकाश राजभर भी सपा में आने का प्रयास कर रहे हैं। यह दावा उन्होंने अपनी ओर से किया; इसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
पार्टी से दूरी की अटकलों पर सफाई
कुछ राजनीतिक हलकों में रुचि वीरा के सपा से दूरी बनाने की चर्चाओं पर उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी खुद को पार्टी से अलग नहीं किया। उन्होंने कहा कि जिस कार्यक्रम की चर्चा हो रही है, उसके आयोजकों ने न तो उनकी तस्वीर लगाई और न ही उन्हें आमंत्रित किया — इसका अर्थ यह नहीं कि उन्होंने पार्टी से दूरी बना ली।
उन्होंने कहा कि वह पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) अभियान के लिए निरंतर काम कर रही हैं और राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव तथा पार्टी की एकजुटता पर उन्हें पूरा भरोसा है।
सपा के भीतर बैठक पर सवाल, जाँच की माँग
सपा के कुछ नेताओं द्वारा आयोजित एक आंतरिक बैठक पर भी रुचि वीरा ने सवाल उठाए। उनका आरोप था कि इस कार्यक्रम के पीछे ऐसे लोग हैं जो पार्टी को नुकसान पहुँचाने की कोशिश कर रहे हैं — कुछ सामने हैं, कुछ पर्दे के पीछे और कुछ पूरी पटकथा लिख रहे हैं।
उन्होंने अखिलेश यादव से माँग की कि ऐसे तत्वों की पहचान कर उनके विरुद्ध सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए और उन्हें उनके मूल जिलों में वापस भेजा जाए, ताकि संगठन में अनुशासन बना रहे। गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले विभिन्न दलों में आंतरिक खींचतान की खबरें आम हो गई हैं।