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ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में रवि शंकर तिवारी को गिरफ्तार किया, ₹10,314 करोड़ के घोटाले की जांच

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ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में रवि शंकर तिवारी को गिरफ्तार किया, ₹10,314 करोड़ के घोटाले की जांच

सारांश

ईडी ने सागा ग्रुप से जुड़े ₹10,314 करोड़ के निवेश घोटाले में रवि शंकर तिवारी को गिरफ्तार किया है। 30.51 लाख से अधिक निवेशकों को ठगने के इस मामले में पटियाला हाउस कोर्ट ने 10 दिनों की ईडी हिरासत मंजूर की। सागा ग्रुप का कथित सूत्रधार समीर अग्रवाल फिलहाल विदेश में है।

मुख्य बातें

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने रवि शंकर तिवारी को 14 जुलाई 2026 को पीएमएलए, 2002 के तहत गिरफ्तार किया।
पटियाला हाउस कोर्ट ने 15 जुलाई 2026 को उन्हें 10 दिनों की ईडी हिरासत में भेजा।
मामला एलयूसीसी , एलजेसीसी और ऑप्शन वन इंडस्ट्रीज से जुड़ा है; 30.51 लाख से अधिक निवेशकों के ₹10,314 करोड़ के गबन का आरोप।
तिवारी 2009 से समीर अग्रवाल के नेतृत्व वाले सागा ग्रुप नेटवर्क से वरिष्ठ पदाधिकारी के रूप में जुड़े थे।
ईडी की जांच में परिवार के बैंक खातों में अस्पष्ट भारी जमा और अपराध की आय से अर्जित संपत्तियाँ मिलीं; अचल संपत्तियों की कुर्की हो चुकी है।
सागा ग्रुप का कथित मुखिया समीर अग्रवाल फिलहाल विदेश में है; जांच जारी है।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की मुख्यालय जांच इकाई ने रवि शंकर तिवारी उर्फ रवि तिवारी को 14 जुलाई 2026 को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी लोनी अर्बन मल्टी-स्टेट क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट कोऑपरेटिव सोसाइटी (एलयूसीसी) और संबद्ध संस्थाओं से जुड़े एक बड़े निवेश धोखाधड़ी मामले की जांच के सिलसिले में हुई है, जिसमें 30.51 लाख से अधिक निवेशकों के करीब ₹10,314 करोड़ के गबन का आरोप है।

न्यायालय ने 10 दिनों की ईडी हिरासत मंजूर की

गिरफ्तारी के अगले दिन, 15 जुलाई 2026 को, रवि शंकर तिवारी को नई दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश-7 के समक्ष पेश किया गया। न्यायालय ने उन्हें 10 दिनों की ईडी हिरासत में भेज दिया, जिससे जांच एजेंसी को आगे की पूछताछ का अवसर मिला है।

सागा ग्रुप नेटवर्क और धोखाधड़ी की पूरी कहानी

ईडी की जांच के अनुसार, रवि शंकर तिवारी 2009 से समीर अग्रवाल के नेतृत्व वाले सागा ग्रुप नेटवर्क से एक वरिष्ठ पदाधिकारी के रूप में जुड़े हुए थे। वे एडवांटेज ट्रेडकॉम इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, ऑप्शन वन इंडस्ट्रीज लिमिटेड, एलयूसीसी और अन्य सागा ग्रुप कंपनियों में टीम लीडर की भूमिका निभाते थे।

जांच में सामने आया कि इन संस्थाओं ने आम जनता को उच्च रिटर्न का प्रलोभन देकर जमा योजनाओं में निवेश के लिए प्रेरित किया और बाद में निवेशित राशि का गबन कर लिया। उत्तर प्रदेश के ललितपुर और मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ सहित देश भर के कई राज्यों में इन संस्थाओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज हैं। गौरतलब है कि एलयूसीसी, लस्टनेस जनहित क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड (एलजेसीसी) और ऑप्शन वन इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने अखिल भारतीय स्तर पर अपना जाल फैलाया था।

बयानों और बैंक खातों से उजागर हुई संलिप्तता

पीएमएलए, 2002 की धारा 50 के तहत दर्ज किए गए रवि शंकर तिवारी के बयानों से अपराध में उनकी प्रत्यक्ष संलिप्तता उजागर हुई। जांच में यह भी पता चला कि उनके और उनके परिवार के सदस्यों के बैंक खातों में सागा ग्रुप कंपनियों से भारी मात्रा में धनराशि जमा हुई, जिसका वे कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दे सके।

इसके अलावा, रवि शंकर तिवारी की कई ऐसी संस्थाओं में हिस्सेदारी पाई गई, जिनका उपयोग अपराध से प्राप्त धन की प्राप्ति, हस्तांतरण और निकासी के लिए किया जाता था। अधिकारियों के अनुसार, उन्होंने इस अपराध की आय से अपने और परिजनों के नाम पर अनेक आवासीय एवं व्यावसायिक संपत्तियाँ भी अर्जित की थीं।

संपत्तियों की कुर्की और आगे की जांच

ईडी इस मामले में पहले ही अचल संपत्तियों की कुर्की कर चुकी है। समीर अग्रवाल, जो कथित तौर पर वर्तमान में विदेश में हैं, सागा ग्रुप के सूत्रधार बताए जाते हैं और जांच एजेंसी की नज़र उन पर भी बनी हुई है। आगे की जांच जारी है और आने वाले दिनों में और खुलासों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

तब नियामक तंत्र कहाँ था — क्योंकि बहु-राज्यीय सहकारी समितियों पर निगरानी की जिम्मेदारी केंद्र और राज्य दोनों की होती है। सागा ग्रुप का कथित सूत्रधार समीर अग्रवाल विदेश में बैठा है और उसका प्रत्यर्पण अभी भी अनिश्चित है — बिना उसके, ₹10,314 करोड़ की वसूली और पीड़ित निवेशकों को न्याय मिलना एक लंबी लड़ाई बनी रहेगी।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रवि शंकर तिवारी को ईडी ने क्यों गिरफ्तार किया?
ईडी ने रवि शंकर तिवारी को 14 जुलाई 2026 को पीएमएलए, 2002 के तहत एलयूसीसी और सागा ग्रुप से जुड़े ₹10,314 करोड़ के निवेश घोटाले में गिरफ्तार किया। जांच में उनकी अपराध की आय प्राप्त करने, हस्तांतरित करने और संपत्तियाँ अर्जित करने में प्रत्यक्ष भूमिका सामने आई।
एलयूसीसी और सागा ग्रुप घोटाला क्या है?
लोनी अर्बन मल्टी-स्टेट क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट कोऑपरेटिव सोसाइटी (एलयूसीसी) और सागा ग्रुप की संबद्ध संस्थाओं ने जनता को उच्च रिटर्न का वादा करके निवेश कराया और बाद में उस धन का गबन किया। इस घोटाले में 30.51 लाख से अधिक निवेशकों के करीब ₹10,314 करोड़ की ठगी का आरोप है।
पटियाला हाउस कोर्ट ने कितने दिनों की हिरासत दी?
पटियाला हाउस कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश-7 ने 15 जुलाई 2026 को रवि शंकर तिवारी को 10 दिनों की ईडी हिरासत में भेजा, ताकि जांच एजेंसी आगे की पूछताछ कर सके।
सागा ग्रुप का मुखिया समीर अग्रवाल कहाँ है?
जांच के अनुसार, सागा ग्रुप का कथित सूत्रधार समीर अग्रवाल वर्तमान में विदेश में है। ईडी की जांच में तिवारी पर एलयूसीसी और एलजेसीसी के संचालन में अग्रवाल की सक्रिय रूप से सहायता करने का आरोप है।
इस मामले में ईडी ने अब तक क्या कार्रवाई की है?
ईडी ने इस मामले में पहले ही अचल संपत्तियों की कुर्की कर ली है और अब रवि शंकर तिवारी की गिरफ्तारी के साथ जांच को नई गति मिली है। उत्तर प्रदेश के ललितपुर और मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ सहित देशभर में दर्ज एफआईआर के आधार पर यह जांच चल रही है और आगे भी कार्रवाई जारी रहने की संभावना है।
राष्ट्र प्रेस
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