क्या ईडी ने धोखेबाज कल्याण बनर्जी को गिरफ्तार किया, नौहेरा शेख मामले की जांच में दखल देने की कोशिश?
सारांश
Key Takeaways
- ईडी ने कल्याण बनर्जी को गिरफ्तार किया है।
- नौहेरा शेख के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग की जांच चल रही है।
- धोखाधड़ी के कारण हजारों लोग प्रभावित हुए हैं।
- जांच में दखलअंदाजी को ईडी बर्दाश्त नहीं करेगी।
- संपत्तियों की नीलामी के माध्यम से निवेशकों को पैसा लौटाया जाएगा।
हैदराबाद, 12 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के हैदराबाद जोनल ऑफिस ने धोखेबाज कल्याण बनर्जी को गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत चल रही जांच में दखल देने की कोशिश के आरोप में की गई है।
ईडी विभिन्न राज्यों की पुलिस द्वारा दर्ज कई एफआईआर के आधार पर नौहेरा शेख और उनके साथियों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला जांच रही है। जांच में पता चला कि नौहेरा शेख और उनके सहयोगियों ने भोले-भाले लोगों से सालाना 36 प्रतिशत से ज्यादा रिटर्न का लालच देकर 5,978 करोड़ रुपए से अधिक की राशि जमा कराई, लेकिन वे निवेशकों को मूल राशि भी नहीं लौटा पाए, जिससे हजारों लोग ठगे गए।
जांच के दौरान ईडी ने अपराध से कमाई गई रकम से खरीदी गई अचल संपत्तियों की पहचान की। इनमें नौहेरा शेख, उनकी कंपनियों और रिश्तेदारों के नाम पर संपत्तियां शामिल हैं। अब तक 428 करोड़ रुपए की संपत्तियां जब्त की जा चुकी हैं। ईडी ने हैदराबाद की विशेष पीएमएलए अदालत में अभियोजन शिकायत और पूरक शिकायत भी दाखिल की है।
सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान ईडी ने जब्त संपत्तियों की नीलामी का प्रस्ताव रखा था ताकि मिलने वाली रकम ठगी के शिकार निवेशकों को वापस की जा सके। अदालत की अनुमति से कई संपत्तियां एमएसटीसी के माध्यम से नीलामी के लिए रखी गईं, लेकिन नौहेरा शेख ने सुप्रीम कोर्ट और तेलंगाना हाईकोर्ट में बार-बार नीलामी रोकने की कोशिश की। 5 जनवरी 2026 को हुई पिछली नीलामी को रोकने के लिए उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की, जिसमें नीलामी प्रक्रिया पर दुर्भावना का आरोप लगाया गया। अदालत ने याचिका खारिज कर दी और नौहेरा शेख पर 5 करोड़ रुपए का भारी जुर्माना लगाया। अदालत ने आदेश दिया कि यह राशि प्रधानमंत्री राहत कोष में जमा की जाए।
कानूनी रास्ते से संपत्तियां बचाने में नाकाम रहने के बाद नौहेरा शेख ने कल्याण बनर्जी को मासिक सैलरी और कमीशन पर काम पर रखा। बनर्जी ने ईडी अधिकारियों को मैसेज और कॉल करके दबाव डालने की कोशिश की। उन्होंने खुद को बड़े नौकरशाहों और नेताओं का करीबी बताया और नीलामी प्रक्रिया में हेरफेर करने का लालच दिया। जब अधिकारियों ने कानूनी प्रक्रिया का पालन करने को कहा तो उन्होंने धमकी दी।
खुफिया जानकारी से पता चला कि बनर्जी एक धोखेबाज है, जो विभिन्न विभागों में कंसल्टेंट होने और सीनियर अधिकारियों से जुड़ाव का नाटक करता था। उसके मोबाइल सिम के केवाईसी में अधूरा पता मिला। 10 जनवरी 2026 को सिकंदराबाद में उसके ठिकाने पर पीएमएलए की धारा 17 के तहत तलाशी ली गई। उसके फोन से नौहेरा शेख और उनके साथियों के साथ आपत्तिजनक व्हाट्सएप चैट मिलीं, जिनमें जांच और न्यायिक प्रक्रिया में हेरफेर की कोशिश साफ दिख रही थी। बनर्जी ने अवैध सौदों से कमीशन कमाने की योजना भी बनाई थी।
पीएमएलए के तहत दर्ज बयानों में बनर्जी ने धोखाधड़ी करके दबाव डालने की बात कबूल की। उसने स्वीकार किया कि वह नौहेरा शेख और उनके निर्देश पर काम कर रहा था। 11 जनवरी 2026 को उसे नामपल्ली की विशेष पीएमएलए अदालत में पेश किया गया, जहां अदालत ने उसे 23 जनवरी 2026 तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया। ईडी ने स्पष्ट किया है कि जांच में किसी भी तरह की दखलंदाजी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।