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जयपुर में विदेश संपर्क कार्यक्रम: MEA और राजस्थान सरकार ने प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा पर की गहन चर्चा

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जयपुर में विदेश संपर्क कार्यक्रम: MEA और राजस्थान सरकार ने प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा पर की गहन चर्चा

सारांश

विदेश मंत्रालय और राजस्थान सरकार ने 16 जुलाई को जयपुर में 'विदेश संपर्क कार्यक्रम' के ज़रिए प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा, कांसुलर सेवाओं और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर मंथन किया। 2017 से शुरू यह पहल अब 13 राज्यों तक पहुँच चुकी है।

मुख्य बातें

विदेश मंत्रालय ने 16 जुलाई 2026 को जयपुर में राजस्थान सरकार के सहयोग से 'विदेश संपर्क कार्यक्रम' आयोजित किया।
कार्यक्रम की संयुक्त अध्यक्षता MEA सचिव श्रीप्रिया रंगनाथन और राजस्थान के मुख्य सचिव वी.
प्रवासी भारतीयों का कल्याण, पासपोर्ट-वीज़ा-कांसुलर सेवाएँ , सुरक्षित प्रवास और व्यापार-निवेश मुख्य एजेंडे में रहे।
यह कार्यक्रम 2017 में शुरू हुआ था और राजस्थान से पहले 12 राज्यों में आयोजित हो चुका है।
MEA ने अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ भी यह कार्यक्रम जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई।

विदेश मंत्रालय (MEA) ने 16 जुलाई 2026 को राजस्थान सरकार के साथ मिलकर जयपुर में 'विदेश संपर्क कार्यक्रम' का आयोजन किया, जिसमें प्रवासी भारतीयों के कल्याण, सुरक्षित विदेश यात्रा, कांसुलर सेवाओं और राज्य के अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मज़बूत करने पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। यह कार्यक्रम सहकारी संघवाद की भावना के तहत केंद्र और राज्य के बीच तालमेल बढ़ाने की MEA की चल रही पहल का हिस्सा है।

कार्यक्रम का नेतृत्व और भागीदारी

कार्यक्रम की संयुक्त अध्यक्षता विदेश मंत्रालय की सचिव श्रीप्रिया रंगनाथन और राजस्थान सरकार के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने की। इसमें MEA और राजस्थान सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ जयपुर के क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, भर्ती एजेंसियों के प्रतिनिधि और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ भी शामिल हुए।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर बताया कि इस कार्यक्रम में 'प्रवासी भारतीयों से जुड़ाव बढ़ाने, विदेशों में रहने वाले भारतीय छात्रों को सहायता देने, सुरक्षित और जिम्मेदार तरीके से विदेश जाने को बढ़ावा देने तथा व्यापार और निवेश संबंधों को मजबूत बनाने' जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।

मुख्य विषय और चर्चा के बिंदु

मंत्रालय के अनुसार, कार्यक्रम में निम्नलिखित प्रमुख मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया गया:

विदेशों में रहने वाले भारतीय नागरिकों, विशेषकर छात्रों की सुरक्षा और सहायता सुनिश्चित करना; पासपोर्ट, वीज़ा और कांसुलर सेवाओं से जुड़ी नई पहलों की जानकारी देना; सुरक्षित और कानूनी तरीके से विदेश में काम करने को प्रोत्साहन देना; तथा राजस्थान में व्यापार, निवेश, रोज़गार और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के नए अवसरों की पहचान करना।

गौरतलब है कि राजस्थान से बड़ी संख्या में नागरिक खाड़ी देशों और अन्य अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों में काम करने जाते हैं, जिससे इस राज्य के लिए प्रवासी कल्याण से जुड़े मुद्दे विशेष रूप से प्रासंगिक हैं।

विदेश संपर्क कार्यक्रम की पृष्ठभूमि

MEA ने बताया कि विदेश संपर्क कार्यक्रम की शुरुआत वर्ष 2017 में हुई थी। इसका उद्देश्य राज्य सरकारों के साथ मिलकर प्रवासी भारतीयों, कांसुलर सेवाओं और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से जुड़े मुद्दों पर समन्वय बेहतर करना है।

अब तक यह कार्यक्रम तेलंगाना, केरल, महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, हरियाणा, पंजाब, त्रिपुरा, बिहार, उत्तराखंड और आंध्र प्रदेश — कुल 12 राज्यों — के साथ आयोजित किया जा चुका है। राजस्थान इस श्रृंखला में नवीनतम राज्य है।

सहकारी संघवाद की दिशा में कदम

यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार विदेश नीति के क्रियान्वयन में राज्यों की भूमिका को अधिक सक्रिय बनाने पर जोर दे रही है। कार्यक्रम में सभी प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा किए और उन क्षेत्रों की पहचान की जहाँ केंद्र और राज्य मिलकर प्रवासी भारतीयों से जुड़ी योजनाओं को अधिक प्रभावी ढंग से लागू कर सकते हैं।

MEA ने स्पष्ट किया कि आने वाले वर्षों में भी अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ इस कार्यक्रम के माध्यम से संवाद और सहयोग जारी रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि इन वार्षिक बैठकों के ठोस परिणाम क्या निकलते हैं। 2017 से अब तक 13 राज्यों में यह कार्यक्रम हो चुका है, फिर भी विदेशों में फँसे भारतीय श्रमिकों की समस्याएँ — विशेषकर खाड़ी देशों में — नियमित रूप से सामने आती हैं। राजस्थान जैसे राज्य से बड़ी संख्या में प्रवासी मज़दूर जाते हैं, इसलिए यहाँ की बैठक में भर्ती एजेंसियों की जवाबदेही और श्रमिक सुरक्षा पर ठोस नीतिगत प्रतिबद्धता की दरकार थी। बिना मापने योग्य लक्ष्यों और अनुवर्ती तंत्र के, ये कार्यक्रम समन्वय की औपचारिकता बनकर रह जाने का जोखिम उठाते हैं।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विदेश संपर्क कार्यक्रम क्या है और इसकी शुरुआत कब हुई?
विदेश संपर्क कार्यक्रम विदेश मंत्रालय की एक पहल है जिसे 2017 में शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य राज्य सरकारों के साथ मिलकर प्रवासी भारतीयों के कल्याण, कांसुलर सेवाओं और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर समन्वय बेहतर करना है।
जयपुर में 16 जुलाई को हुए विदेश संपर्क कार्यक्रम में किन मुद्दों पर चर्चा हुई?
कार्यक्रम में प्रवासी भारतीयों का कल्याण, विदेश में रहने वाले भारतीय छात्रों की सुरक्षा, पासपोर्ट-वीज़ा-कांसुलर सेवाओं की नई पहलें, सुरक्षित और कानूनी प्रवास को प्रोत्साहन तथा राजस्थान में व्यापार और निवेश के अवसर — इन सभी विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई।
इस कार्यक्रम की अध्यक्षता किसने की?
कार्यक्रम की संयुक्त अध्यक्षता विदेश मंत्रालय की सचिव श्रीप्रिया रंगनाथन और राजस्थान सरकार के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने की। इसमें MEA व राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, पासपोर्ट अधिकारी, उद्योग और भर्ती एजेंसियों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए।
अब तक यह कार्यक्रम किन-किन राज्यों में आयोजित हो चुका है?
राजस्थान से पहले यह कार्यक्रम तेलंगाना, केरल, महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, हरियाणा, पंजाब, त्रिपुरा, बिहार, उत्तराखंड और आंध्र प्रदेश — कुल 12 राज्यों में आयोजित किया जा चुका है। MEA ने आगे भी अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में यह कार्यक्रम जारी रखने की बात कही है।
राजस्थान के प्रवासी भारतीयों के लिए यह कार्यक्रम क्यों महत्वपूर्ण है?
राजस्थान से बड़ी संख्या में नागरिक खाड़ी देशों और अन्य अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों में रोज़गार के लिए जाते हैं। यह कार्यक्रम उन्हें सुरक्षित प्रवास, कांसुलर सहायता और कल्याण योजनाओं की जानकारी देने के साथ-साथ केंद्र व राज्य के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करता है।
राष्ट्र प्रेस
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