जयपुर में विदेश संपर्क कार्यक्रम: MEA और राजस्थान सरकार ने प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा पर की गहन चर्चा
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्रालय (MEA) ने 16 जुलाई 2026 को राजस्थान सरकार के साथ मिलकर जयपुर में 'विदेश संपर्क कार्यक्रम' का आयोजन किया, जिसमें प्रवासी भारतीयों के कल्याण, सुरक्षित विदेश यात्रा, कांसुलर सेवाओं और राज्य के अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मज़बूत करने पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। यह कार्यक्रम सहकारी संघवाद की भावना के तहत केंद्र और राज्य के बीच तालमेल बढ़ाने की MEA की चल रही पहल का हिस्सा है।
कार्यक्रम का नेतृत्व और भागीदारी
कार्यक्रम की संयुक्त अध्यक्षता विदेश मंत्रालय की सचिव श्रीप्रिया रंगनाथन और राजस्थान सरकार के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने की। इसमें MEA और राजस्थान सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ जयपुर के क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, भर्ती एजेंसियों के प्रतिनिधि और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ भी शामिल हुए।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर बताया कि इस कार्यक्रम में 'प्रवासी भारतीयों से जुड़ाव बढ़ाने, विदेशों में रहने वाले भारतीय छात्रों को सहायता देने, सुरक्षित और जिम्मेदार तरीके से विदेश जाने को बढ़ावा देने तथा व्यापार और निवेश संबंधों को मजबूत बनाने' जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।
मुख्य विषय और चर्चा के बिंदु
मंत्रालय के अनुसार, कार्यक्रम में निम्नलिखित प्रमुख मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया गया:
विदेशों में रहने वाले भारतीय नागरिकों, विशेषकर छात्रों की सुरक्षा और सहायता सुनिश्चित करना; पासपोर्ट, वीज़ा और कांसुलर सेवाओं से जुड़ी नई पहलों की जानकारी देना; सुरक्षित और कानूनी तरीके से विदेश में काम करने को प्रोत्साहन देना; तथा राजस्थान में व्यापार, निवेश, रोज़गार और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के नए अवसरों की पहचान करना।
गौरतलब है कि राजस्थान से बड़ी संख्या में नागरिक खाड़ी देशों और अन्य अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों में काम करने जाते हैं, जिससे इस राज्य के लिए प्रवासी कल्याण से जुड़े मुद्दे विशेष रूप से प्रासंगिक हैं।
विदेश संपर्क कार्यक्रम की पृष्ठभूमि
MEA ने बताया कि विदेश संपर्क कार्यक्रम की शुरुआत वर्ष 2017 में हुई थी। इसका उद्देश्य राज्य सरकारों के साथ मिलकर प्रवासी भारतीयों, कांसुलर सेवाओं और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से जुड़े मुद्दों पर समन्वय बेहतर करना है।
अब तक यह कार्यक्रम तेलंगाना, केरल, महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, हरियाणा, पंजाब, त्रिपुरा, बिहार, उत्तराखंड और आंध्र प्रदेश — कुल 12 राज्यों — के साथ आयोजित किया जा चुका है। राजस्थान इस श्रृंखला में नवीनतम राज्य है।
सहकारी संघवाद की दिशा में कदम
यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार विदेश नीति के क्रियान्वयन में राज्यों की भूमिका को अधिक सक्रिय बनाने पर जोर दे रही है। कार्यक्रम में सभी प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा किए और उन क्षेत्रों की पहचान की जहाँ केंद्र और राज्य मिलकर प्रवासी भारतीयों से जुड़ी योजनाओं को अधिक प्रभावी ढंग से लागू कर सकते हैं।
MEA ने स्पष्ट किया कि आने वाले वर्षों में भी अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ इस कार्यक्रम के माध्यम से संवाद और सहयोग जारी रहेगा।