मौलाना जर्जिस के विवादित बयान पर विहिप के विनोद बंसल बोले — तत्काल कार्रवाई हो
सारांश
मुख्य बातें
विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने 16 जुलाई को मौलाना जर्जिस अंसारी के विवादित बयान और हैदराबाद के एक स्कूल में हिंदू छात्र को कथित तौर पर 'कलमा' तथा 'सूरह अल-फातिहा' याद कराने के मामले पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। बंसल ने दोनों मामलों में प्रशासन से तत्काल और कठोर कार्रवाई की माँग की।
मौलाना जर्जिस के बयान पर विहिप की प्रतिक्रिया
विनोद बंसल ने कहा कि मौलाना जर्जिस अंसारी का विवादित बयान कोई अकेली घटना नहीं है। उन्होंने इससे पहले मौलाना अरशद मदनी की ओर से दिल्ली की एक सभा में भगवान शंकर के विषय में की गई टिप्पणियों का हवाला दिया। बंसल ने कहा, 'मौलाना जर्जिस जैसे लोगों को शर्म नहीं आती। ऐसे लोग बेहुदी बातें करने से बाज नहीं आते। शासन-प्रशासन को इनके लिए और इंतजाम करना पड़ेगा।'
बंसल ने यह भी कहा कि हिंदू आस्था और विश्वास पर इस तरह के आघात अस्वीकार्य हैं। उनके अनुसार, 'अगर इनके किसी के बारे में कोई कुछ कह दे तो 'सर तन से जुदा' की गैंग खड़ी हो जाती है और इनकी ओर से हमारे आराध्य देवों के बारे में ऐसी टिप्पणियाँ की जाती हैं — यह अस्वीकार्य है। इनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।'
कुणाल कामरा के बयान पर विहिप का रुख
माँ सीता को लेकर कॉमेडियन कुणाल कामरा के कथित बयान पर भी बंसल ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि कामरा के दिल्ली में कई कार्यक्रम रद्द हो चुके हैं और अदालत की ओर से भी उनके खिलाफ कड़ी टिप्पणियाँ की गई हैं। बंसल ने कहा कि हिंदू समाज ऐसे सभी मामलों में समय पर सबक सिखाएगा।
हैदराबाद स्कूल 'कलमा' विवाद
हैदराबाद के एक स्कूल में हिंदू छात्र को होमवर्क में कथित तौर पर 'कलमा' और 'सूरह अल-फातिहा' याद करने को कहे जाने के मामले पर बंसल ने कहा कि यह हिंदू आस्था पर गंभीर हमला है। उन्होंने बताया कि विहिप की ओर से उक्त विद्यालय के सामने प्रदर्शन किया गया और सरकार से अविलंब कठोरतम कार्रवाई की माँग की गई।
बंसल ने यह भी कहा कि तेलंगाना के मुख्यमंत्री के कथित बयान — 'मुस्लिम इज कांग्रेस और कांग्रेस इज मुस्लिम' — के बाद से ऐसे मामलों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। उन्होंने माँग की कि इन सभी मामलों पर अंकुश लगाया जाए।
सरकार और प्रशासन से माँग
विहिप प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि हिंदू समाज इस तरह की घटनाएँ बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों से अपील की कि धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाले बयानों और स्कूलों में धार्मिक दबाव जैसे मामलों में कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। विहिप का कहना है कि ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रशासनिक तंत्र को और सक्रिय होना होगा।