वाराणसी गंगा इफ्तार पर विनोद बंसल की कड़ी प्रतिक्रिया, कहा- हिंदू आस्था का अपमान बर्दाश्त नहीं
सारांश
Key Takeaways
- गंगा इफ्तार विवाद ने हिंदू आस्था को प्रभावित किया है।
- विनोद बंसल ने इसे हमला बताया।
- सरकार ने आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
- कुछ राजनीतिक दलों की चुप्पी पर सवाल उठाया गया है।
- धार्मिक स्थलों पर सख्त नियंत्रण की आवश्यकता है।
नई दिल्ली, 18 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने वाराणसी में गंगा नदी पर एक नाव में हुए इफ्तार को लेकर उठे विवाद पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि यह घटना हिंदुओं की आस्था, विश्वास और संस्कृति पर सीधा हमला है, जिसे किसी भी हालत में सहन नहीं किया जाएगा।
राष्ट्र प्रेस से बातचीत के दौरान, उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ इस्लामी चरमपंथी तत्वों ने गंगा के पवित्र जल को अपवित्र करने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि इन तत्वों ने न केवल धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई है, बल्कि उपवास जैसे धार्मिक अनुष्ठानों में भी बाधा डालने का प्रयास किया है। उनके अनुसार, नदी में चढ़ावा फेंकने और भड़काऊ वीडियो फैलाने जैसी घटनाएं एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा हैं, जिसका उद्देश्य हिंदू समाज को उकसाना है।
विनोद बंसल ने कहा कि ऐसी घटनाएं हिंदू आस्था और संस्कृति पर हमला हैं, जिसे किसी भी स्थिति में सहन नहीं किया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि ये कृत्य तथाकथित 'जिहादी षड्यंत्र' के अंतर्गत किए जा रहे हैं और इसके पीछे संगठित गिरोह सक्रिय हैं। उन्होंने मांग की कि ऐसे मामलों में शामिल लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसे घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के उपद्रवी तत्वों के कारण हिंदू समाज को कई बार मजबूरी में यह मांग करनी पड़ती है कि गंगा तटों, मंदिरों के आसपास और धार्मिक यात्राओं के दौरान ऐसे लोगों की गतिविधियों पर सख्त नियंत्रण रखा जाए। पवित्र स्थलों के आसपास संदिग्ध गतिविधियों में लिप्त लोगों की मौजूदगी धार्मिक माहौल को प्रभावित करती है, जिसे रोकना आवश्यक है।
प्रवक्ता ने उत्तर प्रदेश सरकार की कार्रवाई का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने तत्परता दिखाते हुए आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो सराहनीय कदम है। हालांकि, उन्होंने इस मुद्दे पर कुछ इस्लामिक संगठनों और तथाकथित सेक्युलर नेताओं की चुप्पी पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह सोचने का विषय है कि ऐसे मामलों में कुछ संगठन और राजनीतिक दल खुलकर विरोध क्यों नहीं करते।
विनोद बंसल ने कांग्रेस पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पार्टी ने ऐसे तत्वों के प्रति सहानुभूति दिखाई है। उन्होंने कहा कि इससे यह संकेत मिलता है कि कुछ सेक्युलर नेता अप्रत्यक्ष रूप से इन तत्वों को समर्थन दे रहे हैं, जो समाज के लिए चिंता का विषय है।