वाराणसी: गंगा में नॉन-वेज फेंकने के आरोप में 14 व्यक्तियों की गिरफ्तारी
सारांश
Key Takeaways
- गंगा नदी में नॉन-वेज फेंकने की घटना से धार्मिक भावनाएं आहत हुईं।
- पुलिस ने 14 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया।
- इस घटना ने सार्वजनिक स्थानों पर धार्मिक भावनाओं के सम्मान की आवश्यकता को उजागर किया।
नई दिल्ली, 17 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। वाराणसी में गंगा नदी के बीच एक नाव पर कुछ व्यक्तियों द्वारा इफ्तार पार्टी मनाने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में है। इस वीडियो में लोग नॉन-वेज भोजन को गंगा में फेंकते हुए देखे गए। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने 14 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया।
वीडियो में यह आरोप लगाया गया है कि नाव पर उपस्थित लोगों ने मांसाहारी खाना खाया और बचे हुए खाने को गंगा में फेंक दिया। यह माना जा रहा है कि इससे स्थानीय लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हुईं, क्योंकि गंगा नदी को धार्मिक रूप से अत्यंत पवित्र माना जाता है और यहाँ लाखों लोग पूजा और स्नान करते हैं।
यह वीडियो इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफार्मों पर तेजी से वायरल हुआ। इसमें सूर्यास्त के समय एक छोटी नाव पर कुछ लोग चिकन बिरयानी और अन्य खाद्य पदार्थों का आनंद लेते दिखाई दे रहे हैं।
भाजपा की युवा शाखा के एक नेता की शिकायत के बाद, कोतवाली पुलिस ने इस घटना में शामिल व्यक्तियों और नाव के चालक के खिलाफ मामला दर्ज किया। उन पर धार्मिक भावनाएं आहत करने, गंदगी फैलाने और सार्वजनिक उपद्रव करने के आरोप लगाए गए हैं।
इस मामले में अब तक 14 लोगों को हिरासत में लिया गया है। पुलिस का कहना है कि जांच अभी जारी है और वीडियो की सत्यता की भी जांच की जा रही है। साथ ही, वीडियो में दिख रहे अन्य लोगों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है।
राष्ट्र प्रेस से बात करते हुए कोतवाली के एसीपी विजय प्रताप सिंह ने कहा, "कल हमें इंस्टाग्राम पर वायरल हो रहे एक वीडियो की जानकारी मिली। इसमें कुछ लोग एक नाव पर इफ्तार पार्टी कर रहे थे, खाना खा रहे थे और हड्डियां नदी में फेंक रहे थे। नाव के मध्य में एक बर्तन था, जिसमें चिकन बिरयानी थी और सभी उसी से खा रहे थे। इसके बाद 14 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया।"
अधिकारियों ने कहा कि कानून से ऊपर कोई नहीं है। जो लोग प्रदूषण फैलाते हैं या सार्वजनिक नियमों का उल्लंघन करते हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि अब नदी और घाटों पर तैनात पुलिस नावों पर ज्यादा निगरानी रख रही है, ताकि ऐसी घटनाएं पुनः न हों।
इस मामले ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि सार्वजनिक स्थानों पर धार्मिक भावनाओं का सम्मान करना और पर्यावरण को स्वच्छ बनाए रखना कितना महत्वपूर्ण है, विशेषकर वाराणसी जैसे शहरों में, जहाँ धर्म और पर्यटन दोनों का महत्वपूर्ण स्थान है।
राष्ट्र प्रेस
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