वाराणसी में इफ्तार विवाद पर इमरान मसूद का सवाल: यह बवाल क्यों?
सारांश
Key Takeaways
- वाराणसी में इफ्तार विवाद ने धार्मिक संवेदनाओं को झकझोर दिया है।
- इमरान मसूद ने विवाद को तूल देने से मना किया है।
- सरकार की नीतियों पर उठाए सवाल।
सहारनपुर, 19 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। वाराणसी में कुछ मुस्लिम युवकों द्वारा इफ्तार पार्टी और बिरयानी के अवशेषों को गंगा नदी में फेंकने को लेकर विवाद बढ़ गया है। इस पर कांग्रेस नेता इमरान मसूद ने सवाल उठाते हुए कहा कि इस मुद्दे पर इतना बवाल क्यों हो रहा है? उन्होंने कहा कि इसे अधिक तूल देने की कोई आवश्यकता नहीं है।
गुरुवार को समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत में उन्होंने कहा कि आज की तारीख में गंगा नदी की स्थिति किसी से छुपी नहीं है। सारा अपशिष्ट गंगा नदी में प्रवाहित किया जा रहा है, लेकिन सरकार ने इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया है। स्थिति यह है कि जब उन युवकों ने इफ्तारी की, तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। अब पुलिस उन्हें गिरफ्तार करेगी और साथ में दंड भी लगाएगी, क्योंकि ये युवक मुस्लिम समुदाय से हैं।
इसके अलावा, उन्होंने गंगा नदी में इफ्तारी करने वाले मुस्लिम युवकों पर भी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि मुझे समझ में नहीं आता कि ये लोग गंगा नदी में इफ्तारी क्यों गए? अगर इफ्तारी करनी थी, तो कहीं और जा सकते थे या अपने घर पर ही कर सकते थे। गंगा नदी के पास जाने का कोई कारण नहीं था। ये लोग मुस्लिम समुदाय के प्रति नफरत रखते हैं और इनका पूरा एजेंडा मुस्लिम समुदाय के खिलाफ है। ऐसी स्थिति में इन लोगों को गंगा नदी के पास जाकर इफ्तारी नहीं करनी चाहिए थी।
उन्होंने कांग्रेस सांसद शशि थरूर पर भी निशाना साधा, कहकर कि थरूर साहब, आपके लिए ठीक रहेगा कि आप प्रधानमंत्री की ज्यादा तरफदारी न करें। इससे आपको कोई लाभ नहीं होने वाला है। प्रधानमंत्री के इजरायल दौरे के बाद युद्ध का सिलसिला शुरू हुआ है, जिसका असर भारत पर भी पड़ा है। अब ऐसी स्थिति बन चुकी है कि देश की जनता कतारों में लग चुकी है।
उन्होंने आगे कहा कि मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि ईरान युद्ध नहीं हारेगा। मैं यह बात पहले ही दिन से कहता आ रहा हूं कि ईरान युद्ध किसी भी कीमत पर हार नहीं सकता। ईरान ने इसे साबित भी किया है। अमेरिका की स्थिति भी अब ठीक नहीं है, वहां अंतर्कलह का सिलसिला जारी है।
उन्होंने कहा कि अगर किसी ने सोच लिया है कि उसे मरना है या उसे मौत का सामना करना है, तो आप उसका क्या कर सकते हैं? अब स्थिति ऐसी हो चुकी है कि ट्रंप इजरायल नहीं आ रहे हैं और सिर्फ अमेरिका से बयानबाजी कर रहे हैं।