जयशंकर का सोफिया में बड़ा बयान: भारत-बुल्गारिया संबंधों को आधुनिक साझेदारी में बदलना जरूरी
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 11 जून 2026 को सोफिया में बुल्गारिया की विदेश मंत्री वेलीस्लावा पेट्रोवा के साथ द्विपक्षीय वार्ता के बाद कहा कि भारत और बुल्गारिया के पारंपरिक रूप से मजबूत रिश्तों को अब एक आधुनिक और भविष्योन्मुखी साझेदारी में ढालने की जरूरत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों देशों के राजनीतिक दृष्टिकोण में व्यापक समानता है।
बातचीत के तीन मुख्य बिंदु
संयुक्त प्रेस वार्ता में जयशंकर ने बताया, 'आज हमारी चर्चा तीन धुरियों पर केंद्रित रही — पहला, भारत-बुल्गारिया द्विपक्षीय सहयोग; दूसरा, भारत-यूरोपीय संघ साझेदारी; और तीसरा, दोनों देश मिलकर वैश्विक स्तर पर क्या योगदान दे सकते हैं।' उन्होंने इस यात्रा के दौरान बुल्गारिया के प्रधानमंत्री रुमेन रादेव से भी मुलाकात की और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से शुभकामनाएं पहुंचाईं।
भारत-यूरोपीय संघ समझौतों का संदर्भ
जयशंकर ने जनवरी 2026 में संपन्न हुए भारत-यूरोपीय संघ के तीन अहम समझौतों — मुक्त व्यापार समझौता (FTA), सुरक्षा एवं रक्षा साझेदारी और मोबिलिटी फ्रेमवर्क — का उल्लेख किया। उनके अनुसार ये समझौते दोनों पक्षों के बीच सहयोग को नई ऊँचाई दे सकते हैं। बुल्गारिया यूरोपीय संघ का सदस्य होने के नाते इन समझौतों के क्रियान्वयन में भागीदार भूमिका निभा सकता है।
वैश्विक अस्थिरता पर भारत का स्पष्ट रुख
विदेश मंत्री ने कहा कि आज दुनिया 'बड़े संघर्षों, आर्थिक सुरक्षा की चिंताओं, महामारी के अनुभव और आतंकवाद के लगातार खतरे' से जूझ रही है। उन्होंने दोहराया, 'भारत का मानना है कि यह युद्ध का समय नहीं है। संघर्षों का समाधान केवल बातचीत और कूटनीति से होना चाहिए।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि समुद्री व्यापार को किसी भी कीमत पर बाधित नहीं होने देना चाहिए और सप्लाई चेन को विविध एवं सुदृढ़ बनाना आर्थिक जोखिमों का सबसे कारगर समाधान है।
ग्लोबल साउथ और आतंकवाद पर जोर
जयशंकर ने ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताओं — विशेष रूप से ऊर्जा, खाद्य और उर्वरक सुरक्षा — पर भारत के सतत आग्रह को दोहराया। उन्होंने कोविड महामारी का हवाला देते हुए कहा कि स्वास्थ्य सुरक्षा के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग की अनिवार्यता भारत और बुल्गारिया दोनों ने समान रूप से महसूस की है। आतंकवाद के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया को 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनानी होगी और इस विषय पर दोनों देशों के बीच पूरी सहमति है।
आगे की राह
यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब भारत अपनी यूरोपीय कूटनीति को नई गति दे रहा है — जनवरी में EU के साथ हुए ऐतिहासिक समझौतों के बाद यह दौरा उन प्रतिबद्धताओं को सदस्य देशों के स्तर पर मजबूत करने की कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। दोनों देशों के बीच बनी सहमति आने वाले महीनों में ठोस सहयोग परियोजनाओं का आधार बन सकती है।