विदेश मंत्री जयशंकर का 10-11 जून को बुल्गारिया-फिनलैंड दौरा, सोफिया और 14वें कुल्तरांता टॉक्स में अहम बैठकें
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री एस. जयशंकर 10 से 11 जून 2026 तक बुल्गारिया और फिनलैंड की द्विदेशीय यात्रा पर रहेंगे, जिसमें वे दोनों देशों के शीर्ष नेताओं से द्विपक्षीय वार्ता करेंगे और फिनलैंड में एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय नीति सम्मेलन में भाग लेंगे। विदेश मंत्रालय ने इस दौरे की पुष्टि की है।
बुल्गारिया में कार्यक्रम
जयशंकर बुधवार, 10 जून को बुल्गारिया की राजधानी सोफिया पहुँचेंगे। वहाँ वे बुल्गारिया के शीर्ष नेताओं से मुलाकात करेंगे और अपने समकक्ष विदेश मंत्री के साथ विभिन्न द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा करेंगे। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब अप्रैल 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुल्गारिया के राष्ट्रपति रूमेन रादेव और उनकी पार्टी प्रोग्रेसिव बुल्गारिया को संसदीय चुनावों में जीत की बधाई देते हुए दोनों देशों के संबंधों को और प्रगाढ़ करने की इच्छा जताई थी।
प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर लिखा था, 'रूमेन रादेव और उनकी पार्टी प्रोग्रेसिव बुल्गारिया को हाल ही में हुए संसदीय चुनावों में जीत की हार्दिक बधाई। मैं उनके साथ मिलकर भारत और बुल्गारिया के बीच दोस्ताना और बहुआयामी संबंधों को और मजबूत बनाने तथा क्षेत्रीय सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए काम करने का इच्छुक हूँ।'
फिनलैंड में कुल्तरांता टॉक्स
दौरे के दूसरे दिन, 11 जून को जयशंकर फिनलैंड पहुँचेंगे, जहाँ वे प्रतिष्ठित 14वें 'कुल्तरांता टॉक्स' सम्मेलन में भाग लेंगे। इस वर्ष सम्मेलन का केंद्रीय विषय है — 'बदलती दुनिया: वैश्विक, क्षेत्रीय और स्थानीय दृष्टिकोण'। फिनलैंड में भी विदेश मंत्री अपने समकक्ष और वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात करेंगे।
भारत-बुल्गारिया संबंधों की पृष्ठभूमि
भारत और बुल्गारिया के बीच औपचारिक राजनयिक संबंध 1954 में स्थापित हुए थे, लेकिन दोनों देशों के लोगों के बीच सांस्कृतिक और जन-संपर्क उससे भी पहले से चले आ रहे हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार, पिछले 60 से अधिक वर्षों में दोनों देशों में कई राजनीतिक बदलाव आए, फिर भी भारत-बुल्गारिया संबंध निरंतर मजबूत और बहुआयामी बने रहे हैं।
गौरतलब है कि यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब भारत अपनी यूरोपीय कूटनीति को नई ऊर्जा देने में जुटा है। प्रोग्रेसिव बुल्गारिया गठबंधन की हालिया चुनावी जीत के बाद नई सरकार के साथ संबंधों को और सुदृढ़ करना इस दौरे का एक प्रमुख कूटनीतिक उद्देश्य माना जा रहा है।
आगे क्या
जयशंकर की यह यात्रा भारत की सक्रिय बहुपक्षीय विदेश नीति का हिस्सा है, जिसमें यूरोप के छोटे लेकिन रणनीतिक रूप से महत्त्वपूर्ण देशों के साथ संबंध विस्तार पर ज़ोर दिया जा रहा है। कुल्तरांता टॉक्स में उनकी भागीदारी वैश्विक नीति-चर्चाओं में भारत की उपस्थिति को और मुखर करेगी।